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क्या सीबीआई में वर्चस्व की जंग समाप्त हो गई है या कोल्ड वॉर अभी जारी है

पिछले कुछ महीनों से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसियों में शुमार सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) लगातार विवादों में रह रही है.

Updated On: Jan 28, 2019 09:17 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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क्या सीबीआई में वर्चस्व की जंग समाप्त हो गई है या कोल्ड वॉर अभी जारी है

पिछले कुछ महीनों से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसियों में शुमार सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) लगातार विवादों में रह रही है. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना का विवाद खत्म हुए अभी 20 दिन भी नहीं हुए थे कि एक और विवाद ने सीबीआई की साख को बट्टा लगा दिया. आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वेणुगोपाल धूत के खिलाफ षड्यंत्र का केस दर्ज करने वाले एक अधिकारी के तबादले से सीबीआई की काफी किरकिरी हो रही है.

हालांकि, सीबीआई का कहना है कि आईसीआईसीआई बैंक घोखाधड़ी मामले की जांच करने वाले अधिकारी सुधांशु धर मिश्रा और अन्य पर छापेमारी से जुड़ी जानकारी लीक करने की जांच चल रही है और यह एक रुटीन ट्रांसफर है.

बता दें कि सुधांशु धर मिश्रा सीबीआई के बैंकिंग फ्रॉड और सिक्योरिटी फ्रॉड सेल के अधिकारी थे. मिश्रा ने 22 जनवरी 2019 को चंदा कोचर के खिलाफ एफआईआर पर हस्ताक्षर किए थे. सीबीआई का कहना है कि मिश्रा और अन्य के खिलाफ इस मामले में जानबूझ कर एफआईआर दर्ज करने में देरी के साथ तलाशी अभियान से जुड़ी सूचनाएं लीक करने के संदेह में अंदरूनी जांच भी शुरू की जा चुकी है.

सुधांशु धर मिश्रा की जगह इस केस की जांच अब विश्वजीत दास को सौंपी गई है, जो कोलकाता के इकोनॉमिक ऑफेंस ब्रांच में तैनात थे. दास को अब मिश्रा की जगह बैंकिंग और सिक्योरिटी फ्रॉड सेल का एसपी बनाया गया है.

बीते शुक्रवार को ही केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग पर चंदा कोचर और इस केस से जुड़े अन्य लोगों के ठिकानों पर सीबीआई छापेमारी की आलोचना की थी. जेटली ने सीबीआई को दुस्साहस से बचने तथा सिर्फ दोषियों पर ध्यान देने की नसीहत दी थी. जेटली ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की थी जब एक दिन पहले ही सीबीआई ने चंदा कोचर, केके वी कामत और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में पूछताछ के लिए नामजद किया था.

एनडीए सरकार में यह पहली बार हुआ है जब सत्ता पक्ष के ही किसी कद्दावर मंत्री ने सीबीआई के काम करने की शैली पर सवाल खड़ा किया हो. केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने हालिया ब्लॉग में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे. केंद्र सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले अरुण जेटली का सीबीआई पर इस तरह का आरोप लगाना सीबीआई की गिरती साख की खुद कहानी बयां करता है.

अरुण जेटली ने सीबीआई के जांच करने के तरीकों पर सवाल उठाते हुए साफ-साफ कहा था कि जांच एजेंसी जांच में अपराध की तह तक पहुंचने की बजाय रोमांच तलाशने में लगी रहती है.

अरुण जेटली की जगह वित्तमंत्री मंत्री का कार्यभार देख रहे पीयूष गोयल और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी जेटली की टिप्पणी को रीट्विट किया था. सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बातचीत में कहते हैं, ‘जेटली की टिप्पणी सिर्फ एक सलाह है और इसे एजेंसी में दखंलदाजी के तौर पर नहीं देखना चाहिए. जेटली ने वैध तर्क दिया है. आप किसी को भी सबूत के बिना अनुमानों के आधार पर किसी पर इतना बड़ा आरोप नहीं लगा सकते हैं. आप कैसे बिना किसी सबूत के टॉप बोर्ड सदस्यों का नाम ले सकते हैं?’

वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है. कांग्रेस का आरोप है कि जेटली ने सीबीआई पर दबाव बनाकर इस मामले पर धीमी चाल चलने को कहा है. राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि जेटली की टिप्पणी की एजेंसी को फटकार और धमकी की तरह है.

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, उनका बयान असाधारण है. यह सीबीआई को धीमी चाल चलने के लिए कहने का स्पष्ट संकेत यह दोहरे मानकों की भी दिखाता है जो निश्चित तौर पर उनके लिए नया नहीं है.

वहीं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बैंकरों को अविवेकपूर्ण तरीके से निशाना बनाने के लिए सीबीआई पर निशाना साधते हुए कहा है कि जांच एजेंसी को इस कार्रवाई के लिये केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से असल प्रमाणपत्र मिल गया है, जिन्होंने इस कार्रवाई की निंदा की थी.

पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा था, ‘उन्हें खुशी है कि जेटली की अंतरात्मा और विधिक कुशाग्रता में आखिरकार हलचल हुई और उन्होंने उन मामलों में प्रमुख बैंकरों को अविवेकपूर्ण तरीके से निशाना बनाने की आलोचना की, जहां आरोप हजारों करोड़ रुपयों के हैं.’

दूसरी तरफ सीबीआई में हो रही उठापटक को लेकर कई पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने चिंता जाहिर की है. यूपी के पूर्व डीजीपी और देश में पुलिस रिफॉर्म की मुहिम शुरू करने वाले तेज तर्रार आईपीएस अधिकारियों में शुमार प्रकाश सिंह फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, देखिए सीबीआई के अंदर हाल में जो घटनाक्रम घटित हुए हैं वह काफी चिंता की बात है. इन सब घटनाओं से सीबीआई की विश्वसनीयता में तो जरूर कमी आई है, लेकिन मैं आपको कहना चाहता हूं कि सीबीआई के अंदर जो जांच अधिकारी हैं वह बेहद ही काबिल और ईमानदार हैं. बशर्ते उनको ठीक से काम करने दिया जाए. मुझे आश्चर्य हुआ जब जेटली जी ने आईसीआईसीआई धोखाधड़ी मामले में सीबीआई को लेकर कमेंट किया. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि आखिर में जेटली जी क्या कहना चाह रहे हैं? क्या कोई व्यक्ति अगर किसी बड़े पद पर बैठा है और वह अगर आरोपी है तो उसको गिरफ्तार नहीं करना चाहिए? जेटली जी टिप्पणी अवांछनीय है. सीबीआई में इस समय जरूरत है कि काबिल और ईमानदार अधिकारी आएं. बेईमान और चापलूस अधिकारियों को सीबीआई से बाहर करना चाहिए. जहां तक सीबीआई की जानकारी लीक होने की बात है तो यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए था. अगर किसी अधिकारी ने ऐसा किया है तो वह दंडनीय अपराध है.’

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बता दें कि सीबीआई को लेकर लगातार हो रही फजीहत के बाद केंद्र सरकार ने सीबीआई में सफाई अभियान की शुरुआत कर दी है. कई अधिकारियों का तबादला किया जा चुका है तो कई अधिकारियों के कार्यकाल में कटौती की गई है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के एक सीनियर अधिकारी फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए अगले एक सप्ताह के अंदर सीबीआई के अंदर कई बदलाव आपको नजर आएंगे. देर सिर्फ नए सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर हो रही है. देशभर के 80 आईपीएस और आईआरएस अधिकारियों की एक लिस्ट तैयार की जा चुकी है. उन अधिकारियों का पिछला रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है और बहुत जल्द ही उनमें से कुछ अधिकारियों को सीबीआई में तैनाती की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.’

जानकारों का भी मानना है कि सीबीआई से आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की विदाई के साथ ही ‘सफाई’ का काम शुरू हो चुका है. नंबर वन और नंबर टू का विवाद जो बीते साल शुरू हुआ था वह अब भी अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी रूप में दिखाई पड़ जाता है. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना की छुट्टी होने के बाद भी दोनों के सिपहसालार कुछ न कुछ ऐसा काम कर देते हैं, जिससे सीबीआई की किरकिरी हो रही है. इसलिए सरकार भांप चुकी है कि सीबीआई को पूरी तरह से दुरुस्त करने की अब जरूरत है.

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