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पाक टेरर फंडिंग के खिलाफ नरेंद्र मोदी का वार

सरकार की तरफ से बार-बार आतंकवाद में जाली नोट के इस्तेमाल की बात की जा रही है.

Updated On: Nov 18, 2016 11:32 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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पाक टेरर फंडिंग के खिलाफ नरेंद्र मोदी का वार

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि आतंकवाद को आर्थिक मदद देने में जाली नोटों की अहम भूमिका रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मंगलवार रात को 500 और 1000 रुपए के नोट को अवैध करार देने का ऐलान किया था तब वे ब्लैकमनी के साथ जाली नोट का जिक्र करना नहीं भूले.

रुकेगी टेरर फंडिंग

शुक्रवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात का जिक्र करना नहीं भूले कि 500 और 1000 रुपए की पुरानी करेंसी को अवैध करार देने से आतंकवाद, हवाला और ड्रग्स का धंधा करने वालों को तगड़ा झटका लगेगा.

सरकार की तरफ से बार-बार आतंकवाद में जाली नोट के इस्तेमाल की बात की जा रही है. इससे इसकी अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है. हालांकि, सरकार ने अपने इस फैसले से एक तीर दो शिकार किया है. इस फैसले से एक तरफ आंतकवाद को होने वाली फंडिंग में कुछ कमी आई है और दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था से आवारा पूंजी का पत्ता साफ हो गया.

छोटी सी पहल 

ऐसा नहीं है कि सरकार के इस फैसले से आतंकवाद की फंडिंग पूरी तरह रुक जाएगी. आतंकवाद की फंडिंग का जरिया सिर्फ ब्लैकमनी और जाली भारतीय मुद्रा ही नहीं है. जाली नोट का धंधा करने वाले डॉलर या दूसरी करेंसी भी छापकर फंडिंग के लिए जरूरी पैसे का इंतजाम कर सकते हैं. लेकिन सरकार के अचानक लिए इस फैसले से इतना तो जरूर हुआ है कि सरकार ने संभलने का मौका दिए बगैर सख्त कदम उठाया है.

सत्ता संभालने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले ढाई साल में नकली नोटों के 8 मामलों को एनआईए को सौंपा है. 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए का गठन किया गया था. एनआईए के गठन का मकसद आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करना है.

आतंक के पीछे पाकिस्तान का हाथ

इसमें शायद ही किसी को शक हो कि नकली भारतीय करेंसी नोट के जरिए पाकिस्तानी खुफिया संस्था आईएसआई आतंक को बढ़ावा देती है. नकली नोटों से एक तरफ टेरर फंडिंग होती है तो दूसरी तरफ इसका नकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है.

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक अगर 10 लाख नोटों में से 15 नकली नोट हों तो यह अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है. लेकिन हाल ही में एनआईए की एक स्टडी में पता चला है कि देश में अभी हर 10 लाख नोटों में से करीब 250 नकली हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हालात कितने खतरनाक हैं. 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बैन करने से भारतीय करीब 6.5 लाख नोट रद्दी हो चुके हैं.

निश्चित तौर पर सरकार के इस फैसले से आम लोगों को दिक्कतें भी हो रही हैं. लेकिन यह ब्लैकमनी के आतंकवाद पर भी करारा प्रहार है.

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