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उप राष्ट्रपति ने इस वजह से खारिज किया CJI के खिलाफ महाभियोग का नोटिस

यह पहली बार है जब किसी मौजूदा चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया गया था

FP Staff Updated On: Apr 23, 2018 01:29 PM IST

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उप राष्ट्रपति ने इस वजह से खारिज किया CJI के खिलाफ महाभियोग का नोटिस

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया. नायडू ने नोटिस में ठोस कारणों की कमी बताते हुए इसे ठुकरा दिया. सभापति ने इस बारे में कानूनी और संवैधानिक जानकारों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया.

नोटिस खारिज करने के बाद नायडू ने कहा, मैंने उन सभी पांच कारणों पर गौर किया है, जिन्हें आधार बना कर कांग्रेस ने सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था. कोई भी तथ्य ऐसा नहीं था जो सीजेआई के खराब व्यवहार की पुष्टि करता हो.

सूत्रों की मानें तो उपराष्ट्रपति नायडू ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपने दौरे में बदलाव किया और इस मामले में कई विशेषज्ञों के साथ सलाह मश्विरा किया.

कांग्रेस सहित सात पार्टियों ने महाभियोग नोटिस दिया था. यह पहली बार है जब किसी मौजूदा चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया गया था.

उपसभापति की इस कार्रवाई पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, उन्होंने (वेंकैया नायडू) सही फैसला किया. उन्हें इस पर गौर करने के लिए दो दिन लेने की जरूरत नहीं थी. उन्हें नोटिस को अमान्य मानते हुए शुरू में ही फेंक देना चाहिए था. कांग्रेस ने यह नोटिस देकर खुदकुशी का काम किया है.

इससे पहले कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि जब तक चीफ जस्टिस रिटायर नहीं हो जाते, तब तक मैं उनकी कोर्ट में नहीं जाउंगा. क्योंकि मैं अपने पेशे में नैतिकता के उच्चतम मानदंडों का पालन करता हूं. महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज करने को लेकर कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने कहा, ये बेहद गंभीर विषय है. हमें नहीं पता कि महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने की क्या वजह है. कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियां कानूनी जानकारों से बात करेंगी और अगला कदम उठाएंगी.

इन वजहों से खारिज हुआ महाभियोग का नोटिस

- सांसदों को अपने ही लगाए आरोपों पर भरोसा नहीं.

- तथ्य न तो भरोसेमंद, न जांचे हुए.

- आरोप न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं.

- रोस्टर बनाने के मामले का सुप्रीम कोर्ट ही निपटारा करे, ये उसका अंदरूनी मामला है.

आप नीचे दिए गए उपराष्ट्रपति के स्टेटमेंट में वो सभी कारण पढ़ सकते हैं, जो विपक्ष के इस प्रस्ताव को खारिज करते हैं-

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