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मुफ्त तीर्थयात्रा के जरिए 'वोट' फिक्स करने का जुगाड़ तलाशते अरविंद केजरीवाल

दिल्ली सरकार के इस योजना के शुरुआत के साथ ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हज यात्रा पर जाने वाले हाजियों को सब्सिडी देने पर रोक लगा दी थी.

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 09, 2018 08:57 PM IST

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मुफ्त तीर्थयात्रा के जरिए 'वोट' फिक्स करने का जुगाड़ तलाशते अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की मंजूरी दे दी है. अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की मंजूरी दे दी. इस योजना की मंजूरी मिलने के साथ ही दिल्ली की हर विधानसभा से 1100 वरिष्ठ नागरिकों को अब योजना का लाभ मिलेगा.

बता दें कि दिल्ली सरकार ने अपने पिछले बजट में भी इस योजना का जिक्र किया था, लेकिन उपराज्यपाल की मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह योजना काफी दिनों से अटकी पड़ी थी.

दिल्ली सरकार योजना के शुरुआत में 5 रूट तय किए हैं. ये रूट मथुरा-वृदांवन, हरिद्वार-ऋषिकेश-नीलकंठ, पुष्कर-अजमेर, अमृतसर-बाघा-आनंतपुर साहिब, वैष्णो देवी-जम्मू हैं. योजना के तहत दिल्ली के 77 हजार वरिष्ठ नागरिकों को सरकार मुफ्त में तीर्थ यात्रा कराएगी. तीर्थयात्रा 3 दिन और 2 रात की होगी.

दिल्ली सरकार के राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फेंस कर इसकी जानकारी दी. कैलाश गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा,‘8 जनवरी 2018 को कैबिनेट ने इस योजना की मंजूरी दे दे थी, लेकिन दिल्ली के उपराज्यपाल की तरफ से इस पर आपत्ति लगा दी गई थी. इसी वजह से इस योजना को अब तक लागू नहीं किया गया. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार और एलजी के बीच चल रहे अधिकारों की लड़ाई में एक लकीर खींच दी थी. इसके बाद ही दिल्ली सरकार ने इस योजना को लागू करने का फैसला किया है.

इससे पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर इस योजना के बारे में जानकारी दी थी. मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत दिल्ली के हर विधानसभा से हर साल 1100 यात्रियों को तीर्थ यात्रा करवाई जाएगी. इस तीर्थयात्रा का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. इस तरह हर साल 77 हजार वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त में पांच तीर्थस्थलों का भ्रमण कराया जाएगा.

इस योजना का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी बातों का भी ख्याल रखना होगा.

1- यात्रा करने वाला आदमी दिल्ली का नागरिक होना चाहिए

2- यात्रा करने वाले की उम्र 60 से अधिक होनी चाहिए.

3- इस योजना के लिए चयनित नागरिक अपने साथ एक 18 साल से अधिक उम्र के एक सहयोगी को भी ले जा सकेंगे, जिसका भी पूरा खर्च दिल्ली सरकार ही उठाएगी.

4- सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

5- इस योजना का लाभ उठाने वाले व्यक्ति को सेल्फ सर्टिफिकेशन से बताना होगा कि उसने सही सूचनाएं दी हैं और पहले कभी इस योजना का लाभ नहीं उठाया है.

6- तीर्थयात्रा के लिए चयनित व्यक्तियों को एक लाख का बीमा होगा.

7- तीर्थयात्री एसी बसों से तीर्थयात्रा पर जाएंगे. खाने-पीने की व्यवस्था भी दिल्ली सरकार के तरफ से ही की जाएगी.

8- सभी आवेदन पत्र ऑनलाइन भरे जाएंगे. आवेदन पत्र डिविजनल कमिश्नर ऑफिस, संबंधित विधानसभा के विधायक या फिर तीर्थ यात्रा कमेटी के ऑफिस से भरे जाएंगे.

9- लॉटरी से ड्रॉ तीर्थयात्रियों का चयन किया जाएगा

10- संबंधित विधायक सर्टिफाई करेंगे कि तीर्थयात्रा करने वाला व्यक्ति दिल्ली का नागरिक है.

बता दें कि पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली सरकार ताबड़तोड़ फैसले ले रही है. साल 2019 लोकसभा चुनाव को देखते हुए दिल्ली की केजरीवाल सरकार लगातार एक के बाद एक ऐसे फैसले ले रही है, जिसका संबंध सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है. मोहल्ला क्लिनिक का मामला हो या फिर घर-घर राशन डिलवरी का ये कुछ ऐसे फैसले हैं जो कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता से जोड़ने का काम करेगी.

दूसरी तरफ दिल्ली सरकार के इस योजना के शुरुआत के साथ ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है. हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हज यात्रा पर जाने वाले हाजियों को सब्सिडी देने पर रोक लगा दी थी. इसके बाद से ही कई धार्मिक यात्राओं पर भी सब्सिडी पर सवाल खड़े किए जाने लगे हैं. ऐसे में अरविंद केजरीवाल का यह फैसला विरोधियों को नागवार गुजर सकता है.

इसके बावजूद कई राज्य सरकारें धार्मिक यात्रा पर जाने वाले लोगों को सब्सिडी देती रही हैं. मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार ने साल 2012 में तीर्थयात्रियों के लिए एक योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के तहत शिरडी, अजमेर शरीफ, बद्रीनाथ, केदारनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, वैष्णो देवी जैसे कई और तीर्थस्थलों पर वरिष्ठ नागरिकों को भेजा जाता है.

साल 2012 में राज्य के 51 जिलों के 89 हजार वरिष्ठ नागरिकों ने इस योजना का लाभ उठाया था. यही नहीं राज्य की शिवराज सरकार ने पाकिस्तान में ननकाना साहेब और हिंगलाज माता मंदिर, मानसरोवर यात्रा, श्रीलंका में सीता मंदिर और अशोक वाटिका की यात्रा पर जाने वालों को भी 50 फीसदी खर्च उठाती है.

उत्तर प्रदेश सरकार भी मानसरोवर यात्रा और सिंधू दर्शन यात्रा के लिए सब्सिडी देती रही है. मानसरोवर यात्रा के लिए योगी सरकार ने पिछले साल ही 50 हजार रुपए राशि को बढ़ा कर एक लाख रुपए कर दिया.

देश में कई ऐसे राज्य हैं जो धार्मिक यात्रा पर जाने वाले लोगों को सब्सिडी देते हैं. गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और असम जैसे राज्यों में भी तीर्थ यात्रा के लिए विशेष सब्सिडी दी जाती है. हाल के दिनों में तीर्थाटन पर दी जा रही सब्सिडी को लेकर सवाल भी उठे हैं, जिसके बाद से कई राज्यों ने सब्सिडी में कटौती करना भी शुरू कर दिया है. ऐसे में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने गैर मुस्लिमों के लिए भी तीर्थ यात्रा की योजना शुरू कर इसको और हवा देने का काम किया है.

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