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विवेक तिवारी हत्याकांड- सर गाड़ी नहीं रोकना चाहते थे क्योंकि पुलिसवाले गुस्से में थे: सना खान

'वो बहुत ही गुस्से में आए थे और रुकने के लिए कह रहे थे. बाहर आने के लिए बोल रहे थे. एक लाठी विंडो के अंदर घुसाने लगा... जब ये सब चीजें होने लगीं तो सर को रुकना ठीक नहीं लगा...'

Updated On: Oct 02, 2018 03:50 PM IST

FP Staff

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विवेक तिवारी हत्याकांड- सर गाड़ी नहीं रोकना चाहते थे क्योंकि पुलिसवाले गुस्से में थे: सना खान

पुलिसकर्मियों ने शुक्रवार की रात को विवेक तिवारी को गोली मारने के पहले गाड़ी रुकवाने की कोशिश की थी. वो चाहते थे कि गाड़ी रुक जाए और विवेक गाड़ी के बाहर निकलकर आए. लेकिन जैसे ही एक पुलिस वाले ने अपनी बेंत को खिड़की के अंदर डालने की कोशिश की सर को गाड़ी रोकना ठीक नहीं लगा. और वो वहां से चले जाना चाहते थे. तिवारी हत्याकांड में प्रत्यक्षदर्शी सना खान ने बताया.

उस रात की घटना को बयान करते हुए सना ने बताया कि- 'वो बहुत ही गुस्से में आए थे और रुकने के लिए कह रहे थे. बाहर आने के लिए बोल रहे थे. एक लाठी विंडो के अंदर घुसाने लगा... जब ये सब चीजें होने लगीं तो सर को रुकना ठीक नहीं लगा...' इसके बाद जब तिवारी आगे जाने की कोशिश करने लगे तो उनकी बाइक गिर गई. 'दोनों पुलिसवाले दूसरी तरफ खड़े थे. फिर जैसे ही सर ने गाड़ी बढ़ाने की कोशिश की, जो बाइक चला रहा था उसने सर पर गोली चला दी. सर ने कुछ मिनट गाड़ी चलाई और फिर गाड़ी दीवार से जाकर टकरा गई. उनका लगातार खून बह रहा था.'

खून बहुत बह रहा था पर वो सांस ले रहे थे:

सना ने बताया कि उस वक्त उनका खून बहुत बह रहा था. वो सांस ले रहे थे पर कुछ बोल नहीं पा रहे थे. सना का फोन उस दिन घर पर ही रह गया था और विवेक का फोन लॉक था. सना ने कहा- 'इसलिए मैं गाड़ी से उतरी और रोने लगी. मदद की गुहार लगाने लगी. कुछ ट्रक रोड के किनारे लगे थे. मैं उनके पास गई और उन्हें कहा कि मुझे एक फोन करना है. लेकिन ड्राइवर ने कहा कि उसके पास फोन नहीं है. पंद्रह मिनट के बाद एक पुलिस की गाड़ी आई और एंबुलेंस को बुलाया.'

Vivek Tiwari death case

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सना ने कहा कि एंबुलेंस को आने में वक्त लग रहा था इसलिए उसने पुलिस वालों से तिवारी को हॉस्पिटल ले जाने के लिए कहा. इसके बाद तिवारी को लोहिया हॉस्पिटल ले जाया गया और सना को पुलिस स्टेशन ले गए. वहां एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल ने सना का बयान लिखा और उस पर उसके दस्तख्त लिए.

सना ने बताया कि- 'मैंने पुलिसवालों से विनती की कि मुझे मेरे कमरे पर ले चलें ताकि मैं अपना फोन ले सकूं और सर की फैमिली को खबर कर दूं. पुलिस वाले मुझे मेरे रुम में ले गए लेकिन मुझे सिर्फ मेरी मां को ही फोन करने की इजाजत दी और उसके बाद मुझे फिर से थाने ले आए.'

 

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