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विराट-अनुष्का: देशभक्ति की कोई क्रीम नहीं जो 6 हफ्तों में राष्ट्रवादी बना दे

बीजेपी एमएलए पन्नालाल शाक्य का कहना है कि विराट-अनुष्का ने देश से बाहर शादी कर देश को धोखा दिया है

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Dec 20, 2017 12:51 PM IST

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विराट-अनुष्का: देशभक्ति की कोई क्रीम नहीं जो 6 हफ्तों में राष्ट्रवादी बना दे

क्या आपको पता है कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा देशद्रोही हैं. क्योंकि उन्होंने हिंदुस्तान नहीं इटली में शादी की. ये तर्क गुना से बीजेपी एमएलए पन्नालाल शाक्य ने दिया है. शाक्य के इस बयान पर बात करने से पहले कुछ बातें दोहरा लेते हैं. आपको पूनम पांडे याद हैं? या ज्ञानदेव आहूजा?  इन दोनों की एक ही पहचान ज्यादातर लोगों को याद है.

पूनम पांडे के करियर का एक ही हासिल है. 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर टीम इंडिया जीत गईं तो वो बिना कपड़ों के तस्वीरें खिचवाएंगी. ज्ञान देव आहुजा ने जेएनयू विवाद के दौरान बयान दिया था कि यूनिवर्सिटी के कूड़े में रोज कितने कॉन्डम मिलते हैं.

इन दोनों बयानों का कोई मतलब नहीं है. दोनों बयानों का कोई तुक नहीं है मगर इन बयानों के चलते ये दोनों याद किए जाते हैं. हर पल कुछ नया तलाश रहे मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा में आने का ये सबसे आसान और कारगर तरीका है. कोई विवाद, बड़ा इवेंट चल रहा हो, उसमें आकर एक कतई बेसिर-पैर की टिप्पणी करिए. पक्ष-विपक्ष, तमाम जोक बनाने वाले उस नाम के साथ चुटकुले बनाएंगे, स्टेटस अपडेट करेंगे और टीवी पर खबर चलेगी.

वैसे बीजेपी नेता के इस बयान का एक दूसरा पहलू भी है. पिछले कुछ समय में देशभक्ति की बातें किसी फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन की तरह हो गई हैं. आजकल हर जगह तुरंत पाएं निखार की तर्ज पर तुरंत बनें राष्ट्रभक्त की बात हो रही है. आपने देश और समाज की भलाई के ढेर सारे काम किए हों, लेकिन सिनेमा हॉल में अगर आप नेशनल एंथम पर खड़े नहीं हुए तो आपकी देश के प्रति निष्ठा पर सवाल उठ जाएंगे.

virat anushkaa

विराट कोहली के नेतृत्व में टीम इंडिया कितने रिकॉर्ड बना ले, एक और वर्ल्ड कप जीत ले लेकिन कोहली एक तबके के लिए देशभक्त नहीं होंगे क्योंकि उन्होंने देश में शादी नहीं की. अगर इस फॉर्मूले पर ही चलें तो क्या देश में शादी करके मैच फिक्सिंग करने वाले खिलाड़ियों को देशभक्त माना जाएगा?

आज जिन विजय माल्या पर देश के तमाम टैक्सपेयर का पैसा लेकर भाग जाने का आरोप है वो एक समय पर टीपू सुल्तान की तलवार और गांधी जी की आखिरी निशानियां वापस खरीद कर लाने के लिए भी मशहूर थे. प्रतीकों के जरिए तुरत-फुरत देशभक्ति और देशद्रोह तय करना कितना गलत हो सकता है माल्या के उदाहरण से समझा जा सकता है.

इंस्टेंट देशभक्ति के ये पैरामीटर सोशल मीडिया के दौर में हर ओर पैर पसार रहे हैं. जो चीज़ें आज से एक-दो दशक पहले तक सामान्य थीं उनको अछूत बना दिया जा रहा है. गुजरात चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गांधी फिल्म देखने गए. इस पर कुछ मीडिया चैनल और सोशल मीडिया ने उनके खिलाफ लिखना शुरू किया. क्या हम एक नेता या किसी भी सेलिब्रिटी के सामान्य इंसान होने की उम्मीद नहीं रख सकते.

देश के तमाम बड़े नेता अपनी सामान्य शौक के लिए प्रसिद्ध रहे हैं. कई बार खबरें आती थीं कि फलां फिल्म का विशेष प्रदर्शन प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के लिए रखा गया. पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम के प्रोटोकॉल से बाहर जाकर सामान्य जन की तरह व्यवहार करने की मिसाल दी जाती है. तो किसी और नेता का ऐसा व्यवहार क्यों आपत्तिजनक बन गया है.

जिस दौर में भारतीय मूल के विदेशी अभिनेता टाइल्स और सीमेंट भी देशभक्ति के नाम पर बेच रहें हो. वहां मान लीजिए कि देश के नाम पर आपको बनाया जा रहा है. हमारे नेताओं की जिम्मेदारी है कि हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करें, बुनियादी जरूरतें मुहैया करवाएं. देश यहां रह रहे लोगों से बनता है और देशभक्ति अपनी जिम्मेदारियां निभाने से आती है न कि शादी की जगह देखकर. वैसे कोई ताज्जुब मत कीजिएगा कि आने वाले समय में शुद्ध देसी क्रीम भी मिलने लगे जिसे लगाने से देशभक्ति की आने का दावा किया जाए.

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