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कोशी नदी के तेज बहाव में फंसे SSP को गांववालों ने बचाया

इलाके के नए एसएसपी मनोज कुमार तिलकेश्वरस्थान ओपी के दियारा इलाके का दौरा करने निकले थे. यहां पहुंचने का रास्ता इतना मुश्किल है कि पिछले 6 साल से कोई भी एसएसपी वहां नहीं आया था

FP Staff Updated On: May 29, 2018 06:32 PM IST

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कोशी नदी के तेज बहाव में फंसे SSP को गांववालों ने बचाया

कुछ ही दिन पहले दरभंगा जिले के एसएसपी पद का कार्यभार संभालने वाले मनोज कुमार जिले के सबसे पिछड़े इलाके तिलकेश्वरस्थान ओपी के दियारा इलाके का दौरा करने निकले थे. इलाका इतना पिछड़ा है कि वहां 6 साल बाद कोई एसएसपी पहुंचा था. वहां तक पहुंचने के लिए सिर्फ बाइक ही एकमात्र जरिया है.

यही वजह है कि एसएसपी मनोज कुमार खुद बाइक चलाकर कच्ची-पक्की सड़कों पर धूल फांकते हुए इलाके की ओर निकले. लेकिन थाने तक पहुंचने के लिए उन्हें अपनी बाइक नाव पर लेकर जानी पड़ी. नाविक की चूक के कारण नाव नदी के तेज प्रवाह में बह गई.

6 साल बाद पहुंचा कोई बड़ा अधिकारी

यह इलाका चार जिलों सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर और दरभंगा का बॉर्डर होने और दियारा होने के कारण बड़े अपराधियों का ठिकाना बन गया है. साथ ही इस इलाके में पुलिस के अधिकारी भी बमुश्किल ही पहुंच पाते हैं. यही वजह है कि 6 साल बाज कोई एसएसपी वहां पहुंचा था.

दरभंगा के नए एसएसपी मनोज कुमार की जान तब मुश्किल में फंस गई जब नाविक नाव में बंधी रस्सी के सहारे खींचकर नदी पार करा रहे थे. उसी वक्त नाविक के हाथ से रस्सी छूट गई. एसएसपी की नाव कोशी की धार में अचानक तेजी से बहने लगी.

इसके बाद नदी किनारे खड़े पुलिस के जवानों और गांव के लोग नाव को बचाने की जुगत भिड़ाने लगे. इसी बीच नाव पर सवार नाविक ने नदी में छलांग लगा दी रस्सी पकड़कर नाव को किनारे लाने की कोशिश करने लगा. पानी का बहाव इतना तेज था कि नाव में बंधी रस्सी को किनारे तक ले जाना मुश्किल हो रहा था. यह देख नदी किनारे खड़े दो-तीन युवकों ने भी नदी में छलांग लगा दी और रस्सी से खींच कर किनारे तक नाव पहुंचाई.

गांववालों से खुश एसएसपी

इस घटना के बाद एसएसपी मनोज कुमार ने मीडिया से बात करते हुए आम लोगों की प्रसंशा की और कहा कि ग्रामीणों नें अपनी सूझ-बूझ से हमें सकुशल बाहर निकाल  लिया. साथ ही एसएसपी ने माना कि इलाका काफी दुर्गम और पिछड़ा है. तभी इतने दुर्गम इलाके में इतने वर्षों बाद कोई बड़े पदाधिकारी को थाने में आते देख ग्रामीण भी वहां जुट गए. ग्रामीणों में खुशी इस बात की थी कि इतने मुश्किल रास्ते से होकर कोई पदाधिकारी वहां पहुंचा.

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