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बिहार के इस गांव से सीखें कि शहीदों का सम्मान कैसे होता है?

देश के लिए शहीद हुए महापुरूषों और जवानों के लिए न सिर्फ मंदिर बनाया है बल्कि लोग यहां शहीदों को भगवान का दर्जा भी देते हैं

FP Staff Updated On: Jan 25, 2018 05:30 PM IST

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बिहार के इस गांव से सीखें कि शहीदों का सम्मान कैसे होता है?

आम तौर पर देश के लिए शहीद होने वाले महापुरूषों और वीर जवानों की प्रतिमा लोग चौक-चौराहों पर स्थापित करते हैं. और इन प्रतिमाओं को जयंती-पुण्यतिथि पर ही याद किया जाता है. लेकिन हम आज आपको बता रहे हैं बिहार के एक ऐसे गांव की कहानी जहां शहीदों को भगवान का दर्जा मिला है.

उनका स्थान किसी सड़क या मुहल्ले का चौक-चौराहा नहीं बल्कि मंदिर होता है. ये गांव बिहार के सारण जिले में है और इसका नाम है कोहरा बाजार गांव के ग्रामीणों ने देश के लिये शहीद हुए महापुरूषों और जवानों के लिए न सिर्फ मंदिर बनाया है बल्कि लोग यहां शहीदों को भगवान का दर्जा भी देते हैं. इस मंदिर में राष्ट्रीय पर्व पर इन जवानों को श्रद्धांजलि तो दी ही जाती है आम दिनों में भी लोग यहां पूजा-पाठ करते हैं.

छपरा मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर इस गांव का नामकरण भी लोगों ने कोहरा बाजार से बदल कर शहीदों के नाम पर रखा और आज ये भगत सिंह नगर के नाम से जाना जाने लगा. स्थानीय निवासी रविशंकर सिंह के अनुसार जिन शहीदों ने हमारी रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी उनको सम्मान देना हमारी भी जिम्मेदारी बनती है, इसलिये हमने शहीदों के लिये इस मंदिर का निर्माण कराया है.

saheed gaon

स्थानीय पत्रकार संजय सिंह के अनुसार इस मंदिर के आसपास राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर भव्य मेला लगता है. और दूर दराज के लोग भी यहां शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं. गांव के शुरू में ही बना ये मंदिर देशप्रेम की अनोखी मिसाल है. इस मंदिर का निर्माण जन सहयोग से किया गया है लेकिन इसके निर्माण की शुरुआत एक शिक्षक ने की थी.

(न्यूज 18 के लिए संतोष गुप्ता की रिपोर्ट)

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