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किसानों की कर्ज माफी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं: वेंकैया नायडू

उप-राष्ट्रपति ने चुनावों के दौरान कृषि क्षेत्र को लेकर बड़े-बड़े लोक लुभावन वादों पर चिंता जताई है.

Updated On: Oct 26, 2018 08:51 PM IST

Bhasha

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किसानों की कर्ज माफी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं: वेंकैया नायडू
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चुनावों के दौरान कृषि क्षेत्र को लेकर बड़े-बड़े लोक लुभावन वादे किए जाने पर चिंता जताते हुए उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि किसानों के फसल कर्ज माफ करने से क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता. कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना लागू करने की जरूरत है.

कांग्रेस ने कहा है कि यदि वह 2019 में केंद्र में सत्ता में आई तो वह किसानों के सभी कृषि कर्ज माफ कर देगी. राज्य विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पार्टी के अपना यह वादा दोहराए जाने के एक दिन बाद उपराष्ट्रपति ने यह टिप्पणी की है. नायडू ने कहा कि संसद, राजनीतिक दलों, सोच विचार करने वालों, नीति आयोग और मीडिया को, बढ़ती खाद्य मांग को देखते हुए जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण में गिरावट की बढ़ती चुनौतियों के बीच किसानों से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

नायडू ने एक कार्यक्रम में कहा, 'चुनाव के दौरान लोगों का दिल जीतने के लिए हम बड़ी-बड़ी लोक लुभावन बातें करते हैं. इससे कृषि क्षेत्र में किसी समस्या का हल नहीं होने वाला है. हम मुफ्त बिजली की बात करते हैं. मैं मुफ्त बिजली के पक्ष में नहीं हूं. हम किसानों का कर्ज माफ करने की भी बात करते हैं. यह भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता.' उन्होंने कहा कि फसल ऋण को एक बार माफ करने से समस्या नहीं सुलझेगी क्योंकि किसानों को हर साल ऋण लेने की जरूरत होती है. राजनीतिक दल चुनाव के दौरान ऐसे वादे तो करते हैं, कुछ इसे पूरा भी कर सकते हैं, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है.

समय की मांग

उन्होंने कहा, 'क्या ऐसे कोई बैंक हैं जो पैसे उधार देते हैं और वापस लेने की बात नहीं करते हैं? मेरा विचार है कि हमें दीर्घकालिक स्तर पर सोचना होगा. कर्ज माफी स्थायी समाधान नहीं हो सकता है. किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को इस मामले पर गंभीरता से सोचना चाहिए.' किसानों को मुफ्त बिजली देने को एक जबरदस्त लोक लुभावन उपाय करार देते हुए नायडू ने कहा, 'मैं मुक्त बिजली के पक्ष में नहीं हूं. मुफ्त बिजली का मतलब है कि पहले कम बिजली और बाद में कोई बिजली नहीं. कोई बिजली नहीं ही असल में मुफ्त बिजली है. लोग चौबीस घंटे आश्वस्त और गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति चाहते हैं और यह समय की मांग है.' उपराष्ट्रपति कृषि क्षेत्र में अपना उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को एक लाख डालर का विश्व कृषि पुरस्कार देने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे. इस पुरस्कार की शुरुआत एक निजी संस्था आईसीएफए ने की है.

दरअसल अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था 'अगर कांग्रेस केंद्र सत्ता में आती है तो हमारा पहला प्रमुख काम किसानों के ऋण को माफ करना होगा. राहुल गांधी ने पहले से ही यह घोषणा की हुई है.' साल 2030 तक भुखमरी खत्म करने के लक्ष्य को हासिल करने की आवश्यकता पर बल देते हुए नायडू ने कहा कि पिछले कई सालों के दौरान विभिन्न सरकारों के जरिए सुप्रीम कोर्ट की कोशिशों के बावजूद कृषि क्षेत्र को नई समस्याएं और चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा हैं.

कृषि प्रोत्साहन

उन्होंने कहा, 'कृषि को भारत और देश के अन्य हिस्सों में बड़ा प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है. यह साफ है कि कृषि क्षेत्र के विकास को प्रभावित करने वाले तमाम मुद्दों और मुख्य रूप से खेती पर निर्भर करने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर असर डालने वाले तमाम मुद्दों के संदर्भ में समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है.' भारत के कृषि क्षेत्र में स्वामीनाथन के योगदान की सराहना करते हुए वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि देश आयात पर निर्भरता वाली पहले की स्थिति से उबर गया है और अब वह कृषि उत्पादों का निर्यातक देश बन गया है.

उन्होंने कहा कि एक कृषि निर्यात नीति तैयार की गई है और जल्द ही इसके लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी ली जाएगी. उन्होंने कहा कि किसानों के लिए कृषि को आर्थिक रूप से लाभप्रद बनाने की जरूरत है. इस आयोजन में केरल के राज्यपाल पलानीसामी सताशिवम, हरियाणा के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनकड़, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक टी महापात्रा भी उपस्थित थे.

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