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विदेशों में कुछ ऐसी है वाहन स्क्रैपिंग नीति, दिया जाता है इंसेंटिव

विदेशों में पुराने वाहन स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और इंसेंटिव भी दिया जाता है.

Updated On: Nov 02, 2018 04:04 PM IST

FP Staff

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विदेशों में कुछ ऐसी है वाहन स्क्रैपिंग नीति, दिया जाता है इंसेंटिव
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के परिवहन विभागों को निर्देश दिया कि 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहन दिल्ली एनसीआर में शामिल नहीं होंगे. दिल्ली की आबो-हवा बिगड़ने के साथ ही परिवहन विभाग ने एक नोटिस के जरिए चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश के खिलाफ जाकर जो 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल और 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल गाड़ियां दिल्ली में चल रही हैं, उन्हें जब्त कर लिया जाएगा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक अकेले दिल्ली में ही इस दर्जे में आने वाली करीब 38 लाख गाड़ियां हैं. हालांकि, ये दिल्ली परिवहन विभाग में पंजीकृत वाहनों की संख्या हैं. दिल्ली-एनसीआर में अभी भी कितने लोग पुराने वाहन चला रहे हैं इसके लिए कोई आंकड़ा नहीं हैं. ऐसे वाहनों को या तो दिल्ली-एनसीआर के बाहर बेचा जाना चाहिए जहां उन्हें चलाने की अनुमति हो और उन्हें स्क्रैप या रिसाइकिल किया जाना चाहिए.

हालांकि, भारत की वाहन स्क्रैपिंग नीति कम से कम तीन साल चर्चा और योजना के तहत रही है. अगस्त 2015 में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'हम ऐसी योजना ला रहे हैं, जिससे आप अपना पुराना वाहन बेचते हैं तो आपको एक प्रमाणपत्र मिलेगा. जिसके चलते नई खरीद के समय आपको 50,000 रुपए तक की छूट मिल जाएगी. कारों जैसे छोटे वाहनों के लिए यह 30,000 रुपए तक होगी. इसके अलावा करों में छूट होगी और ट्रक जैसे बड़े वाहनों के लिए यह 1.5 लाख रुपए तक होगा.

वहीं इस साल की शुरुआत में दिल्ली के परिवहन विभाग ने पुराने और अनधिकृत वाहनों को स्क्रैप करने के आदेश भी जारी किए थे. इस नीति के तहत, जो लोग अपने वाहनों को छोड़ना चाहते हैं उन्हें मंजूरी और मोटर लाइसेंसिंग अधिकारी क्षेत्र से प्रमाण पत्र प्राप्त करना है. एक सार्वजनिक सेवा उपक्रम एमएसटीसी और महिंद्रा मोटर्स ने ग्रेटर नोएडा में एक स्वचालित वाहन स्क्रैपिंग और रिसाइक्लिंग इकाई शुरू कर दी है.

हालांकि दिल्ली के नियम पुराने वाहन को स्क्रैप करने और नए वाहन की खरीद पर किसी तरह का कोई इंसेंटिव नहीं देते हैं. वहीं दूसरे देशों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम दोनों ने 2009 में नीतियों के तहत लोगों को पुराने वाहन स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहित किया था. इन नीति का लक्ष्य मोटर उद्योग की बिक्री को बढ़ाना भी था.

विदेशों में दिया जाता है प्रोत्साहन

अमेरिका में वाहन को स्क्रैप करने के कार्यक्रम को 'कैश फॉर क्लंकर्स' कहा गया. जिसमें प्रति लीटर 7.7 किमी माइलेज वाले पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए 2500 से 4500 डॉलर के बीच की पेशकश लोगों की जाती थी.

वहीं यूके में ऐसी योजना चलाई गई जिसमें पुराने वाहनों को स्क्रैप करने और नया खरीदने पर कार मालिकों को 2000 पाउंड तक दिया गया. यह योजना केवल तभी वैध थी जब व्यक्ति ने अधिक ईंधन-कुशल वाहन को खरीदा. हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी में वाहन स्क्रैप योजनाओं पर एक ब्रीफिंग पेपर के अनुसार इस योजना के तहत करीब 400000 दावों को प्रस्तुत किया गया था.

इसके अलावा बीजिंग में सड़कों से प्रदूषण वाली कारों के लिए प्रोत्साहन आधारित नीति लाई गई. साल 2011 में एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें साल 1995 या उससे पहले में पंजीकृत कारों को लक्षित किया था. इन वाहनों को स्क्रैप करने के लिए लोगों को 350 और 2300 डॉलर के बीच भुगतान किया गया था.

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