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वाराणसीः गंगा सीवर के पानी से मुक्त होगी, पीएम की संसदीय सीट पर तेजी से हो रहा काम

नितिन गडकरी के तहत आने वाले गंगा पुनरूद्धार मंत्रालय और राष्ट्रीय गंगा स्वछता मिशन (एनएमसीजी) ने वाराणसी में सीवर के पानी के शोधन के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं

Updated On: Feb 03, 2019 05:35 PM IST

FP Staff

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वाराणसीः गंगा सीवर के पानी से मुक्त होगी, पीएम की संसदीय सीट पर तेजी से हो रहा काम

गंगा कार्य योजना की शुरुआत होने के तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद इस वर्ष नवंबर से पवित्र नदी में सीवेज का पानी नहीं जाएगा. गंगा नदी में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 14 जून 1986 को वाराणसी में गंगा कार्य योजना की शुरुआत की थी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के अनुसार नितिन गडकरी के तहत आने वाले गंगा पुनरूद्धार मंत्रालय और राष्ट्रीय गंगा स्वछता मिशन (एनएमसीजी) ने वाराणसी में सीवर के पानी के शोधन के लिए कई परियोजनाएं शुरू की हैं. बता दें कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है.

सीवर के गंदे पानी को गंगा में जाने से पूरी तरह से रोका जा सकेगा

एनएमसीजी के अधिकारियों ने बताया- रमना के नजदीक 50 एमएलडी सीवेज शोधन संयंत्र का काम करीब करीब पूरा हो गया है. उम्मीद है कि यह इस साल नवंबर तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा और अस्सी नाले से निकलने वाले पानी का शोधन करेगा. इससे वाराणसी शहर के सीवर के गंदे पानी को गंगा में जाने से पूरी तरह से रोका जा सकेगा. शहर से रोजाना करीब 30 करोड़ लीटर सीवर का पानी निकलता है. पिछले साल प्रधानमंत्री द्वारा दीनापुर में 140 एमएलडी सीवेज शोधन संयंत्र का उद्घाटन करने से सीवर के पानी का शोधन करने की क्षमता में इजाफा हुआ है.

गोइठा में एक और 120 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल चल रहा है

एनएमसीजी ने 36 घाटों की मरम्मत के लिए 11.73 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है जिनका काम इस साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है. वहीं गोइठा में एक और 120 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल चल रहा है, जिससे सीवेज ट्रीटमेंट कैपेसिटी बढ़कर 412 एमएलडी हो जाएगी. एनएमसीजी के अधिकारियों ने कहा कि सीवेज उत्पादन 2035 तक 400 एमएलडी तक बढ़ने की उम्मीद है. एसटीपी के अलावा अन्य परियोजनाओं को लेकर भी एजेंसियां काम कर रही हैं ताकि शहर को भविष्य के लिए तैयार किया जा सके और गंगा के प्राचीन स्वरूप को सुनिश्चित किया जा सके. बता दें कि वाराणसी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का एक बहुत बड़ा केंद्र है. इस प्रयास के फलस्वरूप लोगों ने गंगा नदी के किनारे घाटों की साफ-सफाई और बेहतर स्थिति के बारे में बात करना शुरू कर दिया है.

एनएमसीजी ने घाटों की मरम्मत के लिए 11.73 करोड़ रुपए मंजूर किए 

अब यहां पर्यटक भी अधिक संख्या में आने लगे हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 करोड़ रुपए की लागत से 84 घाटों की नियमित सफाई के लिए परियोजनाएं और 2.48 करोड़ रुपए खर्च के साथ फ्लोटिंग कचरा हटाने के लिए नदी की सतह की कटाई, शहर में चालू कर दी गई है. एनएमसीजी ने 36 घाटों की मरम्मत के लिए 11.73 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं जो जून तक पूरा होने की उम्मीद है. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वाराणसी के लिए 913 करोड़ रुपए की कुल 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. अधिकारियों ने कहा कि इसके अलावा, जेएनएनयूआरएम और एएमआरयूटी योजनाओं के तहत 703.14 करोड़ रुपए की निकासी परियोजनाएं ली गई हैं.

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