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बैसाखी 2018: इस साल बन रहा है खास संयोग, गंगा स्नान से मिलेगा पुण्य

सिखों के लिए इस त्योहार का खास महत्व है. सिख इसे सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं

FP Staff Updated On: Apr 12, 2018 08:34 AM IST

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बैसाखी 2018: इस साल बन रहा है खास संयोग, गंगा स्नान से मिलेगा पुण्य

फसल काटने के बाद नए साल की शुरुआत के तौर पर मनाया जाने वाला पर्व बैसाखी 14 अप्रैल यानी शनिवार को मनाया जाएगा. ये त्योहार खास तौर से खेती से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि बैसाखी के बाद ही गेहूं की फसल की कटाई शुरू होती है. सिखों के लिए इस त्योहार का खास महत्व है. सिख इसे सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं. बताया जाता है कि वैशाख की षष्ठी तिथि को ही खालसा पंथ की स्थापना की गई थी. गुरू गोबिंद सिंह ने इस दिन अपने पंज प्यारों के हाथ से अमृत पीकर सिंह की उपाधी धारण की थी.

कैसे मनाई जाती है बैसाखी

इस दिन मुख्य समारोह आनंदपुर साहिब में होता है जहां खालसा पंथ की नींव रखी गई थी. इस दिन भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है. इसके बाद शाम को आग जलाकर नई फसलों की खुशी मनाई जाती है. श्रद्धालु इस दिन कारसेवा भी करते है. इसके साथ गुरू गोबिंद और पंज प्यारों के सम्मान में कीर्तन किए जाते हैं.

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम

बैसाखी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है. केरल में लोग इसे विशु के नाम से मनाते हैं वही बंगाल में ये पोइला बैसाख (पहला बैसाख) के नाम से जाना जाता है. असम में इसे रोंगाली बिहु तो वहीं तमिलनाडु में पुथंडू के नाम से जाना जाता है.

इस साल बैसाखी का बन रहा है शुभ संयोग

इस साल बैसाखी का शुभ संयोग बन रहा है. बताया जा रहा है कि इस साल बैसाख का महीना 60 दिनों का होगा. मतलब इस बार लगातार दो महीने बैसाख के महीने के तौर चलेंगे. पहला महीना 30 मार्च से शुरू हो चुका है जो 28 अप्रैल तक चलेगा वहीं दूसरा महीना 29 अप्रैल से 28 मई तक चलेगा.

इस दिन गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि इस दिन पापमोचनी गंगा में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन दान दक्षिणा करने का भी खास महत्व बताया गया है.

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