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तीसरे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव न देना असंवैधानिक: हाई कोर्ट

अदालत ने 30 जुलाई को अपने फैसले में कहा कि इस नियम को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 42 और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 27 के खिलाफ है

Updated On: Aug 04, 2018 09:12 PM IST

Bhasha

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तीसरे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव न देना असंवैधानिक: हाई कोर्ट

उत्तराखंड में महिला कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश देने का कोई नियम नहीं है. इस दौरान उन्हें सेवा में रहना होता है.  राज्य सरकार के इसी नियम को असंवैधानिक करार देते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सरकार को खरी खोटी सुनाई है.

कोर्ट ने हल्द्वानी की रहने वाली उर्मिला मनीष द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य की तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश की मनाही वाला सरकारी नियम 'असंवैधानिक' है.

उत्तराखंड द्वारा अपनाए गए उत्तर प्रदेश मौलिक नियमों की वित्तीय पुस्तिका के मौलिक नियम 153 के दूसरे प्रावधान में किसी महिला सरकारी कर्मचारी को तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश से इनकार किया गया है.

अदालत ने 30 जुलाई को अपने फैसले में कहा कि इस नियम को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 42 और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 27 के खिलाफ है जो 'काम के लिए सही एवं मानवीय दशा और मातृत्व राहत' प्रदान करता है.

इस पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता को यह अवकाश दिया जाए.

मनीष को इस आधार पर मातृत्व अवकाश देने से इनकार कर दिया गया था कि उनके पहले से ही दो बच्चे हैं और उन्हें तीसरे बच्चे के लिए यह अवकाश नहीं मिल सकता है.

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