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कट्टरता उदारता के लिए है- मेरठ में मोहन भागवत

संघ के इस विराट कार्यक्रम के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं.

Updated On: Feb 25, 2018 07:35 PM IST

FP Staff

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कट्टरता उदारता के लिए है- मेरठ में मोहन भागवत

मेरठ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अब तक के सबसे बड़े स्वयंसेवक समागम राष्ट्रोदय की शुरुआत हो चुकी है. समागम में सर संघचालक मोहन भागवत के साथ जैन संत विहर्ष सागर महाराज और स्वामी अवधेशानंद गिरी भी उपस्थित रहे. अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने कहा, 'भारत ही दुनिया को राह दिखा सकता है. उन्होंने कहा कि देश में एकता के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे. इसको लेकर षड्यंत्र खूब होते रहे हैं, होंगे भी लेकिन हमें एकजुट होना है.' उन्होंने कहा कि कट्टर हिंदुत्व यानी कट्टर अहिंसा. उन्होंने कहा कि कट्टरता उदारता के लिए है. दुनिया भी अच्छी बातों को तभी मानती है, जब उसके पीछे कोई शक्ति खड़ी हो.

हिंदुओं को एक होना है

उन्होंने कहा कि हम हिंदुओं को एक होना है. प्राचीन काल से ये हमारा घर है. हमारे लिए दूसरे देश में जाने की जगह नहीं है. इस देश का कुछ बिगड़ता है तो जवाब हमें देना पड़ेगा. इस देश के लिए हम दायित्ववान लोग है, हमें तैयार होना पड़ेगा. हमारे झगड़ों पर सभी अपनी रोटियां सेंकते हैं. हमें ये मानना पड़ेगा कि हर हिंदू मेरा सहोदर भाई है. पंथ कोई हो, पूजा पद्धति कोई भी हो, जाति कोई भी हो, भगवान कोई भी हो. भारत माता को अपनी माता मानने वाला हिंदू है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं, जो हिंदू हैं लेकिन जानते नहीं है कि वे हिंदू हैं.

मुख्य मंच के बाईं ओर बनाए गए संतों के मंच पर ख्यातिलब्ध योग गुरु स्वामी कर्मवीर, जूना अखाड़े के नारायण गिरी, रविदास मिशन के सतीश दास, शुक्रताल से स्वामी सत्यानंद सहित काफी संख्या में साधु-संत मौजूद रहेंगे। मंच पर जैन, बौद्ध, सिख आदि संप्रदायों से संत बैठेंगे. राष्ट्रोदय में इस पर भी ध्यान दिया गया है कि सभी जातियों की भागीदारी हो. खापों से भी संघ पदाधिकारियों ने संपर्क किया है.

बता दें संघ के इस विराट कार्यक्रम के कई सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. कार्यक्रम में पश्चिम उत्तर प्रदेश से सभी केंद्रीय मंत्री डा. महेश शर्मा, जनरल वीके सिंह, डा.सत्यपाल सिंह सहित प्रदेश सरकार के मंत्री चेतन चौहान, धर्म सिंह सैनी के साथ सभी सांसद, विधायक भी मौजूद हैं.

माना जा रहा है कि इस आयोजन के पीछे मुख्य मकसद 2019 के लोकसभा चुनावों की नब्ज टटोलना है. कारण ये है कि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे बढ़िया प्रदर्शन किया था. अब इस आयोजन को युवा मतदाताओं को लुभाने से जोड़कर देखा रहा है.

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