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बिना इजाजत धर्मस्थलों पर लगे लाउड स्पीकर हटाएगी योगी सरकार!

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दिसंबर में धर्मस्थलों पर बज रहे लाउडस्पीकरों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सरकारी अधिकारियों को फटकार लगाई थी

FP Staff Updated On: Jan 07, 2018 06:35 PM IST

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बिना इजाजत धर्मस्थलों पर लगे लाउड स्पीकर हटाएगी योगी सरकार!

हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद यूपी में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर पर लगाम लगाने की तैयारी है. यूपी सरकार की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, धार्मिक स्थलों पर बिना इजाजत लगाए गए लाउडस्पीकर हटाए जाएंगे.

राज्य सरकार ने अदालती आदेश का हवाला देते हुए सभी जिला प्रशासन को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया कि सभी धार्मिक स्थलों को लाउडस्पीकर के लिए 15 जनवरी तक अनुमति लेनी होगी. इसके बाद बिना अनुमति वाले लाउडस्पीकरों को हटा दिया जाएगा. आदेश के मुताबिक, जिला प्रशासन को 20 जनवरी तक इस संबंध में रिपोर्ट देना होगा.

दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दिसंबर में धर्मस्थलों पर बज रहे लाउडस्पीकरों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सरकारी अधिकारियों को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को अलग-अलग हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया था.

बता दें वरिष्ठ वकील मोतीलाल यादव ने याचिका दायर कर सरकार को मस्जिद, मंदिर, चर्च और गुरुद्वारों जैसे धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए निर्देश जारी करने की गुहार लगाई थी. इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोइन की खंडपीठ ने बेहद सख्त लहजे सवाल किया था कि क्या अफसर बहरे बैठे हैं.

कोर्ट ने कहा कि प्रमुख सचिव गृह, सिविल सेक्रेटेरियट और यूपी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन को छह हफ्ते के अंदर अलग-अलग व्यक्तिगत हलफनामा देकर बताना होगा कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए उन्होंने क्या किया. वहीं जवाब दाखिल न करने की स्थिति में अफसरों को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पर 1 फरवरी 2018 को पेश होना होगा.

कोर्ट ने इन बिंदुओं पर मांगे हैं जवाब

क्या धर्मस्थलों पर लगाए गए लाउडस्पीकर के लिए प्रशासन से लिखित अनुमति ली गई है? अगर नहीं ली गई है तो इन लाउडस्पीकर को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए?

बिना लिखित अनुमति के इन धर्मस्थलों पर लाउडस्पीकर लगाने दिए गए तो उन अधिकारियों पर क्या ऐक्शन लिया गया?

सरकार बताए अब तक कितने ऐसे लाउडस्पीकर को धर्मस्थलों से हटाया गया है? जिनके पास लिखित अनुमति नहीं थी.

उन धार्मिक यात्राओं और जुलूसों पर क्या कार्रवाई की गई? जो दिन-रात कभी भी शोर-शराबे के साथ निकाले जाते हैं. इनमें बारात भी शामिल है?

(न्यूज18 के लिए अवनीश विद्यार्थी की रिपोर्ट)

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