S M L

योगी के फैसले से दुख, दर्द और गुस्से से भरे हैं दंगा पीड़ितों के परिवार

दंगों का इस कदर बुरा असर पड़ा है कि मुजफ्फरपुर के कुतबा गांव में अब तक कोई लौट कर नहीं आया है

Updated On: Mar 23, 2018 12:14 PM IST

FP Staff

0
योगी के फैसले से दुख, दर्द और गुस्से से भरे हैं दंगा पीड़ितों के परिवार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर और शामली दंगों से जुड़े 131 मुकदमों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साल 2013 के इन दंगों में 13 हत्या और 11 हत्या की कोशिश के मामले दर्ज हैं.

सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना हो रही है और पीड़ित परिवार के लोग भी इससे बेहद दुखी नजर आ रहे हैं. एक ऐसा ही दंगा पीड़ित परिवार इनाम का भी है. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए 26 साल के इनाम ने कहा कि जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसकी कल्पना कोई नहीं कर सकता और अब ये खबर सामने आ रही है. अपनी बेबसी को देख मुझे रोना आता है. दंगों में इनाम के पिता की हत्या कर दी गई थी. उसका केस भी सरकार की उस लिस्ट में है, जिन मामलों को योगी सरकार खत्म करने जा रही है.

दंगों का इस कदर बुरा असर पड़ा है कि मुजफ्फरनगर के कुतबा गांव में अब तक कोई लौट कर नहीं आया है. यहां आठ लोगों की हत्या हुई और 110 लोग दंगों के अभियुक्त हैं. ये सभी हिंदू हैं. दंगों में मारे गए 65 साल के खातून की बहू अफसाना का कहना है कि दंगों के कुछ महीनों बाद पुलिस प्रोटेक्शन के साथ हमारे परिवार के पुरुष बचे हुए सामान की तलाश में गए थे. लेकिन महिलाएं और बच्चे कभी वहां लौट कर नहीं गए. अफसाना अब अपने परिवार के साथ कुतबा गांव से पांच किलोमीटर दूर दूसरे गांव में रह रही हैं.

दंगों में मारे गए 70 साल के वहीद और खातून को 8 सितंबर, 2013 को अपने घर में पनाह देने वाले गयूर ने कहा कि वो घर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और तभी भीड़ ने उनपर हमला किया और गन्ना काटने वाले गंडासे से उन्हें काट दिया. शिकायतकर्ता मोहम्मद रियासत ने कहा कि योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर और शामली दंगों से जुड़े 131 मुकदमों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस खबर को सुनकर वो दंग हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें पुलिस और आरोपियों की ओर से समझौते को लेकर कई फोन आ चुके हैं.

सरकार के फैसले से नाखुश एक अन्य पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा कि जिस भी परिवार के सदस्य की हत्या हुई है, वो कभी भी ये स्वीकार नहीं करेगा कि केस वापस लिए जाएं. मेरी दादी की लाश चार दिन बाद मिली. जबकि दादा के शव का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है. गांव में मारे गए 13 लोग बुजुर्ग थे. जिन मुस्लिम परिवारों पर हमला हुआ वो सभी आर्थिक रूप से कमजोर थे.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, कई ऐसे मुकदमे भी हैं जिनमें 'गंभीर अपराध' की धाराएं लगाई गई हैं. इनमें कम से कम सात जेल की सजा का प्रावधान है. दंगे से जुड़े 16 केस भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए के हैं जो धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में दर्ज किए गए हैं. दो मामले धारा 295 के तहत दर्ज हैं जो जानबूझ कर या दुर्भावना से किसी धर्म या धार्मिक विश्वास के अपमान को लेकर दर्ज हैं.

सितंबर 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली इलाकों में भड़के दंगों में कम से कम 62 लोग मारे गए थे और हजारों लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा था. हिंसा को देखते हुए तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने मुजफ्फरनगर और शामली थानों में करीब 1,455 लोगों के खिलाफ 503 मामले दर्ज कराए थे.

प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही दंगों में दर्ज मामले वापस लेने की मांग उठ रही थी. इस बाबत बीजेपी सांसद संजीव बालियान और बुढ़ाना के विधायक उमेश कौशि‍क की अगुआई में मुजफ्फरनगर और शामली के नुमाइंदों ने बीते 5 फरवरी को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. सीएम से 179 मामलों को रद्द करने मांग की गई थी. गौरतलब है कि इन सभी मामलों में आरोपी हिंदू हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi