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उत्कल एक्सप्रेस हादसा: जांच ही नहीं सबूतों में भी की गई छेड़छाड़

उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे मे सिर्फ रेलवे की बड़ी लापरवाही ही सामने नहीं आई है बल्कि हादसे के बाद इसकी जांच में भी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है

Updated On: Sep 20, 2017 02:54 PM IST

FP Staff

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उत्कल एक्सप्रेस हादसा: जांच ही नहीं सबूतों में भी की गई छेड़छाड़

उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे मे सिर्फ रेलवे की बड़ी लापरवाही ही सामने नहीं आई है बल्कि हादसे के बाद इसकी जांच में भी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है. पता चला है कि इस हादसे की जांच में सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी हुई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मामले में अपने आपको बचाने के लिए रेलवे के अधिकारी ने ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है. इस बात का खुलासा सीआरएस की रिपोर्ट में हुआ है.

CRS की रिपोर्ट के मुताबिक, खतौली में जब पुरी-हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस पटरी से उतरी, उससे करीब 45 मिनट पहले ही स्थानीय रेलवे कर्मचारी मोहनलाल मीणा ने खतौली स्टेशन मास्टर प्रकाश चंद को एक मेमो लिखा था. मेमो में मीणा ने लिखा है कि अनसेफ है, ब्लॉक देने की कृपा करें. इस मेमो के बाद सिस्टम को अलर्ट हो जाना चाहिए. इस तरह के आग्रह को रूटीन वर्क माना जाता है, जिस कारण इसे नजरअंदाज कर दिया गया. लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि मेमो में 'अनसेफ' शब्द का भी इस्तेमाल किया गया था, जो कि रूटीन वर्क में नहीं होता है.

हालांकि रिकॉर्ड्स में दिखाया गया है कि किसी तरह की अलार्म बेल नहीं बजाई गई. क्योंकि मीणा ने कथित रूप से अपने मेमो के साथ छेड़छाड़ की है. मीणा के मेमो की कार्बन कॉपी में 'अनसेफ है ब्लॉक देने की कृपा करें' उनकी हैडराइटिंग में लिखा गया है जबकि बाकी सब लिखावट कार्बन कॉपी में है. गड़बड़ी सिर्फ यही नहीं है. मेमो की ऑरिजनल और कार्बन कॉपी में दो अलग अलग तारीखें हैं. एक मेमो में हादसे वाली 19 तारीख डाली गई है. जबकि दूसरे मेमो में 20 तारीख डालकर मीणा का हस्ताक्षर दिखाया गया है.

बता दें कि हादसा 19 अगस्त की शाम 5 बजकर 46 मिनट पर हुआ. इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 40 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे और 66 लोगों को मामूली चोटें आई थीं.

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