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H1-B वीजा एप्लिकेशन में बड़ी गिरावट, ट्रंप की सख्ती का असर

कभी H1-B वीजा हासिल करना भारतीय इंजीनियर्स की ख्वाहिश होती थी लेकिन अब वे इससे कतरा रहे हैं

Updated On: Apr 03, 2018 09:43 PM IST

FP Staff

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H1-B वीजा एप्लिकेशन में बड़ी गिरावट, ट्रंप की सख्ती का असर

इंडियन आईटी कंपनियों के H1-B वीजा एप्लिकेशन में इसबार हैरतअंगेज ढंग से गिरावट आई है. डोनाल्ड ट्रंप सरकार के कड़े इमिग्रेशन नियमों के कारण भी भारतीय विदेशी कंपनियों में काम करने से कतरा रहे हैं.

सिलिकन वैली के न्यूज पेपर सैन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल्स के संपादकीय बोर्ड का कहना है कि H1-B वीजा के आवेदकों को लगता है कि इसके लिए उन्हें हाल के साल में सबसे सख्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. इससे आवेदक और उन्हें नौकरी देने वाली अमेरिकी कंपनियां, दोनों प्रभावित हुए हैं.

 

अखबार ने कहा, ‘भारतीय कंपनियों की तरफ से पहले भारी संख्या में H1-B वीजा के लिए आवेदन आते थे. उनके आवेदनों की संख्या में अब काफी गिरावट आई है.

किसे मिलता है  H1-B वीजा?

 

H1-B वीजा के तहत भारतीय किसी अमेरिकी कंपनी या भारतीय कंपनी की अमेरिकी शाखा में काम कर सकते हैं. अमेरिकी आईटी कंपनियां हर साल इस वीजा के जरिए हजारों चाइनीज और इंडियंस प्रोफेशनल्स को हायर करती हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल का कहना है कि अभी तक जो चीजें सामने आ रही हैं उनसे पता चलता है कि  H1-B वीजा की मांग घट रही है.

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