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यूपी पुलिस के ATS ने कानपुर से किया हिज्बुल मुजाहिदीन का आतंकी गिरफ्तार

ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि एटीएस और कानपुर नगर पुलिस ने चकेरी थानाक्षेत्र में असम निवासी कमर-उज-जमां नामक हिज्बुल आतंकवादी को गिरफ्तार किया है

Updated On: Sep 13, 2018 08:45 PM IST

Bhasha

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यूपी पुलिस के ATS ने कानपुर से किया हिज्बुल मुजाहिदीन का आतंकी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को बृहस्पतिवार को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया.

यूपी के पुलिस महानिदेशक ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि एटीएस और कानपुर नगर पुलिस ने चकेरी थानाक्षेत्र में असम निवासी कमर-उज-जमां नामक हिज्बुल आतंकवादी को गिरफ्तार किया है. इस अभियान में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का भी सहयोग मिला.

उन्होंने बताया कि शुरुआती पूछताछ में असम के जमुनामुख निवासी जमां ने स्वीकार किया है कि वह हिज्बुल का सक्रिय सदस्य था. यह भी पता लगा है कि वह बृहस्पतिवार से शुरू हुए दस दिवसीय गणेश पूजा समारोह के दौरान कानपुर में किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था. उसने कानपुर में एक मंदिर की रेकी भी की थी.

सिंह ने बताया कि जमां अप्रैल 2017 में ओसामा नामक व्यक्ति के साथ जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के पर्वतीय जंगलों में आतंकवाद का प्रशिक्षण लेने गया था.

उन्होंने बताया कि जमां ने अप्रैल 2018 में सोशल मीडिया पर A.K-47 राइफल के साथ अपनी एक तस्वीर पोस्ट की थी. इसके बाद से ही उसकी तलाश की जा रही थी.

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि गिरफ्तार आतंकवादी से गहन पूछताछ की जा रही है और इसमें अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद भी ली जा रही है. यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह आतंकवादी कश्मीर से कब कानपुर आकर छिपा था. उसके और कौन-कौन से साथी हैं. इसके अलावा उसके निशाने पर और कौन-कौन स्थान अथवा लोग थे.

उन्होंने बताया कि जमां 2008 से 2012 तक फिलीपीन के पास पलाउ गणराज्य में भी रह चुका है. एक बेटे के पिता जमां की शादी वर्ष 2013 में असम में ही हुई थी.

सिंह ने बताया कि आतंकवादी के पास से अभी सिर्फ उसका मोबाइल फोन मिला है जिसकी कॉल डिटेल खंगाली जा रही है.

UP एटीएस ने इस साल मार्च में दस लोगों को पकड़ा था, जिनके बारे में एटीएस का दावा था कि उनके लश्कर ए तय्यबा से संबंध थे और वे आतंकियों को धन मुहैया कराने में लिप्त थे.

एटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि लश्कर का एक सदस्य उनके संपर्क में रहता था और उसने उनसे फर्जी नामों से बैंक खाते खोलने को कहा था तथा यह निर्देश भी दिया था कि कितना धन किस खाते में डालना है. इसके लिए भारतीय एजेंट 10 से 20 प्रतिशत कमीशन पाते थे.

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