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यूपी, हरियाणा और राजस्थान कुंभकरण की तरह सो रहे थेः SC

पीठ ने केंद्र के हलफनामे का अवलोकन करने के बाद कहा कि किस आधार पर आप कह रहे हैं कि बगैर नोटिस दिए ऐसा किया गया, अगर राज्यों की सरकारें सोएंगी तो ये काम भी न्यायालय ही करेगा क्या

Updated On: Dec 13, 2017 10:31 PM IST

PTI

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यूपी, हरियाणा और राजस्थान कुंभकरण की तरह सो रहे थेः SC

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकार को फटकार लगाया है. कोर्ट ने कहा कि इन राज्यों की सरकारें कुंभकरण की तरह सो रही थी. अब कोर्ट पर पेट कोक और फर्नेस ऑयल के उपयोग का आदेश देने का दोष मढ रही हैं. जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता ने इन राज्यों द्वारा ऐसा माहौल बनाने पर कड़ी आपत्ति की कि शीर्ष अदालत ने उन्हें नोटिस दिए बगैर ही यह आदेश पारित किया. नाराज पीठ ने कहा कि क्या इन राज्यों को नींद से जगाने का काम भी न्यायालय का है.

राज्य सरकारों को नींद से जगाना भी क्या कोर्ट का काम

पीठ ने केंद्र के हलफनामे का अवलोकन करने के बाद कहा कि किस आधार पर आप कह रहे हैं कि बगैर नोटिस दिए ऐसा किया गया. अगर राज्यों की सरकारें सोएंगी तो ये काम भी न्यायालय ही करेगा क्या. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने तुरंत ही जवाब दिया कि केंद्र ने ऐसा कुछ नहीं कहा है परंतु वही कहा है जो इन राज्यों ने पेट कोक और फर्नेस ऑयल के उपयोग पर प्रतिबंध के मसले पर अपने रिपोर्ट में कहा है.

राजस्थान सरकार का पक्ष रख रहे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा वह इस मामले को देखेंगे. उन्होंने बेंच को आश्वासन दिया कि जो कमी रह गई है उसे वापस ले लेंगे. उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तरफ से पक्ष रखने वाले वकीलों ने भी हलफनामा दायर करने की बात कहीं.

दो सप्ताह के भीतर दाखिल करें हलफनामा

पीठ ने तीनों राज्यों से कहा कि दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करें. हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने 24 अक्टूबर को बिना नोटिस के ही आदेश दिया था, इस मामले में खुद ही हलफनामा दाखिल करने की बात भी कही है.

पीठ ने कहा कि जब 24 अक्टूबर को इन राज्यों को 1 नवंबर से पेट कोक और फर्नेस ऑयल पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया तब उत्तर प्रदेश और राजस्थान की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ. कोर्ट ने इस बारे में राज्यों को बताया भी था.

केंद्र ने बाद में सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा को अगले आदेश तक पेट कोक और फर्नेस ऑयल के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे. दिल्ली में पेट कोक और फर्नेस ऑयल का उपयोग पहले से ही प्रतिबंधित है. कोर्ट ने 1985 में पर्यावरणविद् एमसी मेहता द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की थी, जिन्होंने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया था. इससे पहले, कोर्ट ने पेट कोक और फर्नेस ऑयल के उद्योगों में इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभाव को बताया था.

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