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शराब की दुकानों को बचाने के लिए रातों-रात हाईवे बना 'अदर डिस्क्रिक्ट रोड'

यूपी सरकार ने सरकारी रिकॉर्ड में हाईवे और बाईपास का नाम बदल दिया है.

Updated On: Apr 04, 2017 11:51 AM IST

FP Staff

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शराब की दुकानों को बचाने के लिए रातों-रात हाईवे बना 'अदर डिस्क्रिक्ट रोड'

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजमार्गों पर पड़ने वाली शराब की दुकानों को बचाने के लिए यूपी सरकार ने सरकारी रिकॉर्ड में हाईवे और बाईपास का नाम ही बदल दिया है.

घनी बस्‍ती से गुजरने वाले राजमार्गों को ओडीआर यानी अदर डिस्ट्रिक्ट रोड का दर्जा दे दिया गया है.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद यूपी के हाइवे पर करीब 8000 दुकानें बंद हो गई हैं. इनसे होने वाली राजस्व के नुकसान को लेकर योगी सरकार के अफसर चिंतित हैं.

आबकारी विभाग राजस्व नुकसान के आंकलन को जुटाने में लग गए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि इन दुकानों में से 5334 दुकानों को दूसरी जगहों पर स्थानांतरित कर दिया गया है जबकि 3231 दुकानों को सील कर दिया गया है.

जो दुकानें स्थानांतरित की गईं हैं उनके सामने ग्राहकों की नई समस्या खड़ी हो गई है. कारण ये है कि उन क्षेत्रों में पहले से ही दुकानें आवंटित हैं.

वैसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन तो प्रदेश सरकार कर रही है लेकिन शराब के शौकीन लोगों और शराब व्यापारियों को राहत देने के लिए भी तमाम तरीके निकाल रही है.

Wine drinking

शराब के ठेके पर शराब पीते लोग

अदर डिस्ट्रिक्ट रोड

इसी क्रम में सरकार ने प्रदेश की उन सड़कों को ओडीआर यानी अदर डिस्ट्रिक्ट रोड का दर्जा दे दिया है जहां बाईपास बने हुए हैं. ऐसे जिलों में आबादी से गुजरने वाला रास्ता अब राजमार्ग नहीं कहलाएगा.

सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन जिलों में बाईपास बने हुए हैं वहां बाईपास को ही राजमार्ग माना जाएगा लेकिन आबादी के बीच से गुजरने वाली सड़क राजमार्ग की श्रेणी में नहीं माने जाएंगे.

सरकार के इस फैसले से प्रदेश की करीब 500 शराब की दुकानें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बच गई हैं.

इस पूरी कवायद में आबकारी आयुक्त ने दुकानों के बंद होने से राजस्व हानि की रिपोर्ट जिला आबकारी अधिकारियों से मांगी है.

आबकारी आयुक्त मृत्युंजय नारायण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होने वाले नुकसान की भरपाई की रणनीति बनाई जा रही है.

हाईवे के किनारे 5334 दुकानें दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कर दी गई हैं जबकि 3231 दुकानेां को सील कर दिया गया है.

जो दुकानें शिफ्ट हुई हैं उनमें पहले से ही शराब की दुकानें हैं. ऐसे में इन दुकानों से आय हासिल करना चुनौती बन गया है.

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