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ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे हादसों के लिए क्या सरकार की कोई जवाबदेही नहीं बनती?

जीडीए ने सिर्फ नोटिस देने के अलावा ऐसा कुछ नहीं किया जिससे कहा जा सकता है कि प्रशासन को लोगों की जान-माल की थोड़ी बहुत फिक्र थी?

Updated On: Jul 24, 2018 08:56 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे हादसों के लिए क्या सरकार की कोई जवाबदेही नहीं बनती?

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की मीडिया में खूब चर्चाएं हो रही हैं. मीडिया में चर्चा होने का कारण है कि इन इलाकों में अवैध निर्माण और अवैध इमारतों की बाढ़ आ जाना. अब इन इमारतों के धराशायी होने का सिलसिला शुरू हो गया है. इन इमारतों के धराशायी होने से बेकसूर और मासूम लोगों की जान जा रही है. उन बेजुबानों और मासूमों की जान जा रही है, जिसके लिए वह या उनके माता-पिता किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है. अगर इसके लिए कोई जिम्मेदार है तो वह सरकार, सरकार की गलत नीति, मुनाफाखोरी, रिश्वतखोरी, शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार.

बता दें कि इन इमारतों की धराशायी होने से पिछले दिनों 13 लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी थी. इसके बाद यूपी सरकार को भी अवैध बिल्डिंग और बिल्डरों पर कार्रवाई करने के आदेश देने पड़े. हालांकि यह कार्रवाई भी मौसमी ही जान पड़ती है इसके बावजूद मारे गए लोगों को रिश्तेदारों और इलाके के लोगों में कुछ उम्मीद ले कर आई है.

बता दें कि पिछले दिनों गाजियाबाद के डासना के पास आकाश नगर में एक चार मंजिला इमारत के जमींदोज होने के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण(जीडीए) की नींद खुल गई है. इमारत के गिरने से 2 लोगों की मौत हो गई थी और मलबे में दबे 8 लोगों को एनडीआरएफ ने काफी मुश्किल से जिंदा बाहर निकाला था.

इस घटना के बाद जीडीए ने इलाके की कई अवैध इमारतों पर कार्रवाई की शुरुआत कर दी है. जीडीए ने इलाके के 100 से अधिक अवैध इमारतों को सील करने का आदेश जारी किया है. अवैध इमारतों को सील करने का काम शुरू भी हो गया है.

Yogi Adityanath at meeting

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश के बाद जीडीए ने भी सख्ती दिखानी शुरू कर दी है. गाजियाबाद के आकाश नगर से पहले पिछले दिनों ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में भी दो छह मंजिला इमारत गिरने के बाद ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने भी सख्त रुख अख्तियार किया है. शाहबेरी इलाके की 40 बिल्डिंगों पर नोटिस चिपका कर उन्हें एक हफ्ते में गिराने के निर्देश दिए हैं.

जीडीए उपाध्यक्ष ने इस घटना की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है. कमेटी अपनी रिपोर्ट मंगलवार शाम तक सौंप सकती है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जीडीए के कई और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है.

इसके बावजूद इस इलाके में अब भी स्थिति बहुत भयावह है. इन दो घटनाओं के बाद बिल्डरों पर शासन-प्रशासन के द्वारा लगातार नकेल कसने की खबर तो आ रही है. लेकिन धरातल पर हालात वहीं के वहीं हैं.

फ़र्स्टपोस्ट हिंदी ने मंगलवार को गाजियाबाद के कई इलाके में अवैध निर्माण के कार्य का मुआयना किया. दो लगातार घटनाएं होने के बावजूद अब भी इस इलाके में अवैध निर्माण का काम जारी है. आकाश नगर में जिस जगह इमारत गिरी थी उसके एक-दो किलोमीटर के दायरे में अब भी अवैध निर्माण धड़ल्ले से चल रहा है. जीडीए के तमाम अधिकारियों की मौजूदगी में ही अवैध निर्माण चल रहा है. अफसरों की गाड़ियों का काफिला आ-जा रहा है लेकिन निर्माण कार्य पर किसी तरह को कोई प्रभाव नजर नहीं आ रहा है. हां, कुछ साइट्स पर जीडीए के अधिकारी का डंडा जरूर चला है.

greater noida

बता दें कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष ऋतु माहेश्वरी ने अवैध निर्माण पर रोक लगाने और उसको सील करने का आदेश सोमवार को जारी किया था. इसके बावजूद गाजियाबाद के कृष्णा नगर, आकाश नगर, बालाजी एंक्लेव, विजय एंक्लेव, गोविंद विहार, कैलाशपुरम और सदरपुर रोड जैसी कई जगहों पर अब भी अवैध निर्माण धड़ल्ले से हो रहे हैं.

गाजियाबाद में आकाश नगर हादसे के बाद मेरठ की मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जिले की जिलाधिकारी ऋतु माहेश्वरी के निर्देश पर बिल्डरों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. अपर जिलाधिकारी सुनील कुमार मजिस्ट्रेटी जांच कर रिपोर्ट सौंप चुके हैं.

मजिस्ट्रेटी जांच में बिल्डरों की लापरवाही उजागर हुई है. इमारत में बनने वाले सभी कॉलम पतले और बीम चौड़े बनाए गए हैं, जो नियम के खिलाफ हैं. साथ ही जीडीए के नोटिस जारी होने के बाद भी इमारत में तीन और लिंटर डाले गए. इसमें जीडीए के इंजीनियरों के पैसा लेने की बात भी सामने आई है.

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का कहना है कि बिल्डरों पर रासुका के तहत कार्रवाई होगी. इस घटना के लिए जीडीए के 15 अधिकारी दोषी पाए गए हैं. इनमें से चार इंजीनियरों को जिलाधिकारी ने फिलहाल निलंबित कर दिया है. मेरठ जोन के मंडालायुक्त के निर्देश के बाद इन चार इंजीनियरों पर मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है.

जीडीए ने इस पूरे मामले के बाद इलाके के पांच बिल्डरों को नोटिस भी भेजा है. इन बिल्डरों को एक हफ्ते के अंदर इमारत निर्माण के प्रमाणपत्र देने को कहा गया है. नोटिस में इमारत में लगने वाली सामग्री के गुणवत्ता के बारे में बताने को कहा गया है. जीडीए का कहना है कि इस तरह के मापदंड अब भविष्य में जिले के हर बिल्डर को देना होगा.

Builder

आकाश नगर में सोमवार को मलबा हटाने का काम पूरा हो गया है. एनडीआरएफ ने 27 घंटे बाद अपना ऑपरेशन सोमवार शाम को समाप्त किया. इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई जबकि आठ लोगों को जिंदा बचा लिया गया. सोमवार सुबह एक छह वर्षीय बच्चे को मलबे से निकाला गया लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी. बच्चे की पहचान सागर के रूप में हुई है वह गीता और राजकुमार का छोटा बेटा था.

मलबे में गीता के भाई की भी मौत हो चुकी है. गीता अब भी अस्पताल में है. गीता और उसके पति राजकुमार को अपने मासूम बेटे और भाई की मौत के बारे में जानकारी देने से डॉक्टर ने मना कर रखा है. डॉक्टर का कहना है कि दोनों की मानसिक स्थिति हादसे को सहने वाली नहीं है.

गीता के दो बेटे हैं. हादसे का शिकार हुए सागर का जन्मदिन अगले महीने के 27 अगस्त को आने वाला था. परिवार जुलाई महीने की मजदूरी मिलने के बाद बेटे का जन्मदिन मनाने गांव जाने की तैयारी में था लेकिन इससे पहले ही यह घटना घट गई.

आकाश नगर हादसे के जिम्मेदार बिल्डर और अन्य आरोपी पुलिस की पकड़ से कोसों दूर है. जीडीए ने इमारत गिरने के मामले में बिल्डर और अन्य के खिलाफ कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है. गाजियाबाद पुलिस आरोपी बिल्डर और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापे मार रही है.

गाजियाबाद के एसएसपी वैभव कृष्ण के मुताबिक बिल्डर सहित कई अन्य आरोपियों पर आईपीसी और क्रिमिनल एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है. इन लोगों पर धारा 7, 34, 288, 304, 308, 337, 338, 427 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

Pune Building Collapse

आकाश नगर घटना के तार ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी से जुड़ने की खबर आ रही है. आकाश नगर में हुए हादसे के बाद जमीन मालिक की खोजबीन में यह कनेक्शन आने की बात सामने आ रही है. जिले के एसएसपी के मुताबिक ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी बिल्डिंग हादसे का एक आरोपी दिनेश और आकाश नगर हादसे का आरोपी मनीष का कनेक्शन का पता चला है. पुलिस जांच में दोनों के परिवार का नजदीकी सामने आया है. पुलिस का कहना है कि दोनों परिवार के पुख्ता कनेक्शन की पुष्टि के बाद परिवार के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई संभव है.

आकाश नगर में जिस बिल्डर की इमारत में हादसा हुआ है वह इस इलाके में और भी कई इमारतें बना चुका है. कुछ इमारतों में सोमवार तक निर्माण कार्य किए जा रहे थे. इस हादसे के बाद लोगों ने इमारतों में लगने वाली सामग्री की गुणवत्ता की शिकायत जब जिला प्रशासन से की तो निर्माणकार्य रुकवा दिया गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बिल्डर ने इलाके में लगभग एक दर्जन इमारत बना रखी हैं. 18 से 20 लाख रुपए में लोगों ने फ्लैट बुक करा रखे हैं.

Greater Noida Building Collapse

स्थानीय लोगों और खरीददारों ने जीडीए प्रशासन पर अवैध निर्माण कराने में भागीदारी के भी आरोप लगाए हैं. गाजियाबाद को काफी दिनों से कवर कर रहे एक पत्रकार अंकुर फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘इसके लिए संबंधित विभाग पूरी तरह दोषी है. राज्य सरकार को इसके लिए कड़े नियम बनाने ही होंगे और जो नियम पहले से चले आ रहे हैं उनको भी कठोर तरीके से लागू कराना ही होगा. बिना जीडीए और पुलिस प्रशासन की मिलीभगत के अवैध निर्माण का सवाल ही नहीं उठता. कहीं न कहीं दोनों विभागों के कुछ अधिकारी दोषी हैं. जीडीए में इस समय बिल्डर माफिया और भू-माफिया का बोलबाला है. हमलोग लगातार इस बारे में शासन-प्रशासन से सवाल-जवाब करते रहे हैं लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकलता है.’

गाजियाबाद के आकाश नगर में जिस इमारत में हादसा हुआ है उसको लेकर संबंधित अथॉरिटी को एक-डेढ़ साल पहले ही आगाह कर दिया गया था. फरवरी महीने में भी गीता नाम की जिस महिला ने अपना बेटा और भाई खोया है उसने बिल्डिंग में दरारें देखी थीं और इस बात की जानकारी बिल्डर को दी थी. इसके बावजूद बिल्डर निर्माणकार्य करता रहा. जीडीए ने सिर्फ नोटिस देने के अलावा ऐसा कुछ नहीं किया जिससे कहा जा सकता है कि प्रशासन को लोगों की जान-माल की थोड़ी बहुत फिक्र थी?

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