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कौन है भीम आर्मी का 'रावण' जिसकी रिहाई के लिए दिल्ली में होगा बड़ा प्रदर्शन

भीम आर्मी ने सहारनपुर जातीय हिंसा के आरोप में जेल में बंद अपने अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई समेत अन्य मुद्दों को लेकर 19 अगस्त को दिल्ली के संसद मार्ग पर एक बड़ी रैली बुलाई है

Updated On: Aug 02, 2018 05:11 PM IST

FP Staff

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कौन है भीम आर्मी का 'रावण' जिसकी रिहाई के लिए दिल्ली में होगा बड़ा प्रदर्शन

भीम आर्मी ने सहारनपुर जातीय हिंसा के आरोप में जेल में बंद अपने अध्यक्ष चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई समेत अन्य मुद्दों को लेकर 19 अगस्त को दिल्ली के संसद मार्ग पर एक बड़ी रैली बुलाई है. भीम आर्मी की 'भारत एकता मिशन' ने इस रैली के लिए एक पोस्टर भी जारी किया है. उनकी मांग है कि चंद्रशेखर समेत जेल में बंद अन्य साथियों की रिहाई की जाए. साथ ही उनकी मांग है कि 2 अप्रैल के भारत बंद के दौरान जेल में बंद सभी सदस्यों के केस वापस लिए जाएं.

भीम आर्मी के मुताबिक, दलितों के खिलाफ उत्पीड़न और भेदभाव की बढ़ती घटनाओं को सरकार रोकने में नाकाम रही है. जिसकी वजह से देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है.

इससे पहले भी की थी रैली

इससे पहले पिछले साल मई में भी भीम आर्मी ने संसद मार्ग पर प्रदर्शन कर अपनी ताकत दिखाई थी. लिहाजा इस बार पुलिस भी भीम आर्मी की प्रस्तावित रैली को देखते हुए पैनी नजर बनाए हुए है.

दरअसल, पिछले तीन साल में भीम आर्मी ने पश्चिम यूपी में अपनी ताकत बढ़ाई है और वह दलित सियासत की धुरी बनकर उभरी है. भीम आर्मी की इस रैली से एक बार फिर दलित संगठनों के एकजुट होने की उम्मीद है.

भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल का कहना है कि बीजेपी ने बहुजन समाज की आवाज को दबाने और कुचलने की कोशिश की है. लेकिन बहुजन समाज संविधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज उठाता रहेगा. नौटियाल ने बताया कि शीघ्र ही दिल्ली में एक बैठक आयोजित कर चंद्रशेखर पर बढ़ाई गई रासुका अवधि को लेकर देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी.

भीम आर्मी है क्या?

भीम आर्मी एक बहुजन संगठन है, जिसे भारत एकता मिशन भी कहा जाता है. ये दलित चिंतक सतीश कुमार के दिमाग की उपज है. इसे 2014 में चंद्रशेखर आजाद 'रावण' और विनय रतन आर्य ने हाशिए वाले वर्गों के विकास के लिए स्थापित किया गया. भीम आर्मी का कहना है कि वह शिक्षा के माध्यम से दलितों के लिए काम कर रहा है.

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इसका बेस कहां है?

इसका बेस मुख्य तौर पर यूपी में है. सहारनपुर में ये वर्ष 2017 में चर्चाओं में आया. चर्चाओं में आने की वजह थी जाति संघर्ष. हिंसा के आरोपों के बाद भीम आर्मी के मुख्य कर्ताधर्ता चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया गया था. चंद्रशेखर की अगुवाई में 25 युवा भीम आर्मी संभालते हैं. भीम सेना और अंबेडकर सेना भी ऐसे ही संगठन हैं लेकिन भीम सेना हरियाणा में ही काम कर रही है और अंबेडकर सेना का गढ़ पूर्वी यूपी में है. भीम आर्मी दलित शब्द के खिलाफ है और अंबेडकरवादी सोच वालों का स्वागत करती है.

चंद्रशेखर आजाद 'रावण' कौन हैं?

चंद्रशेखर का जन्म सहारनपुर में चटमलपुर के पास धडकूलि गांव में हुआ था. जिले के एक स्थानीय कॉलेज से उन्होंने कानून की पढ़ाई की. वो पहली बार 2015 में विवादों में घिरे थे. उन्होंने अपने मूल स्थान पर एक बोर्ड लगाया था, जिसमें 'धडकाली वेलकम यू द ग्रेट चमार्स' लिखा था. इस कदम ने गांव में दलितों और ठाकुर के बीच तनाव पैदा कर दिया था.

चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया के जरिए काफी सुर्खियां बटोरी हैं. चंद्रशेखर ने फेसबुक और व्हाट्सअप के जरिए लोगों को भीम आर्मी से जोड़ने का काम किया.

भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने अपनी ताकत उस वक्त दिखायी, जब नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में दलितों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया. सहारनपुर में दलितों पर हुई हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन के बाद चंद्रशेखर ने कहा था कि यदि 37 निर्दोष दलित जमानत पर रिहा किये जाएं, तो वह आत्मसमर्पण कर देगा.

इसका मूल संस्थापक कौन?

भीम आर्मी’के मूल संस्थापक छुटमलपुर निवासी एक दलित चिंतक सतीश कुमार हैं. इस आर्मी को उनके दिमाग की उपज बताया जाता है. सतीश कुमार पिछले कई वर्षों से ऐसे संगठन बनाने की जुगत में थे, जो दलितों का उत्पीड़न करनेवालों को जवाब दे सके. लेकिन, उन्हें कोई योग्य दलित युवा नहीं मिला, जो कमान संभाल सके. ऐसे में सतीश कुमार को जब चंद्रशेखर मिले, तो उन्होंने चंद्रशेखर को ‘भीम आर्मी’ का अध्यक्ष बना दिया.

भीम आर्मी ने रफ्तार कैसे पकड़ी?

सितंबर साल 2016 में सहारपुर के छुटमलपुर में स्थित एएचपी इंटर कॉलेज में दलित छात्रों की कथित पिटाई के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पहली बार यह संगठन सुर्खियों में आया था.

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इसके बाद भीम आर्मी ने क्या किया?

5 मई 2017 को सहारनपुर से 25 किलोमीटर दूर शब्बीरपुर गांव में राजपूतों और दलितों के बीच हिंसा हुई थी. इस हिंसा में कथित तौर पर दलितों के 25 घर जला दिए गए थे और एक शख्स की मौत हो गई थी. इस हिंसा के विरोध में जब प्रदर्शन किया गया तो पुलिस ने 37 लोगों को जेल में डाल दिया और 300 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. इस पूरे मामले के बाद चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भीम आर्मी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया.

दिल्ली में किस तरह ताकत दिखाई

भीम आर्मी सेना ने रफ्तार पकड़ी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीड़ इकट्ठा करके. भीड़ के लिए भीम आर्मी ने सोशल मीडिया का सहारा लिया. लगातार फेसबुक व व्हाट्सअप पर ग्रुप बनाकर लोगों से जंतर-मंतर पर जुटने की अपील की गयी थी. वायरल किए गए वीडियो में देशभर में दलितों पर हो रहे अत्याचार का दावा करते हुये जंतर-मंतर पर जुटकर इंसाफ की मांग करने को कहा गया. खास बात यह है कि इस अपील का खासा असर जंतर-मंतर पर देखने को मिला. क्योंकि हजारों की संख्या में युवा दिल्ली पहुंचे. जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में दलितों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया.

चंद्रशेखर कब से जेल में हैं

सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा के मामले में चंद्रेशखर पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई लेकिन उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई. इसके बाद कथित तौर पर फरार चंद्रशेखर को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने हिमाचल प्रदेश के डलहौजी से 8 जून 2017 को गिरफ्तार किया. तब से वह जेल में ही बंद है. इलाहबाद कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी उन पर रासुका लगाकर रिहा नहीं किया गया. मई में एक बार फिर रावण पर तीन महीने के लिए रासुका बढ़ा दी गई है.

(न्यूज 18 से साभार)

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