live
S M L

यूपी एटीएस की बड़ी सफलता है जासूसी रिंग का पर्दाफाश

एटीएस की इस कार्रवाई ने समय रहते बड़े नुकसान को रोक लिया.

Updated On: Jan 28, 2017 04:45 PM IST

Shantanu Mukharji

0
यूपी एटीएस की बड़ी सफलता है जासूसी रिंग का पर्दाफाश

उत्तर प्रदेश में चुनाव को लेकर जारी सियासी सरगर्मी के बीच एंटी टेरर स्क्वैड (एटीएस) ने एक जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. एटीएस की इस कार्रवाई ने समय रहते बड़े नुकसान को रोक लिया.

कुछ ही दिन पहले गुलशन नाम के एक शख्स को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. गुलशन फिलहाल पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है. गुलशन तकनीक का जानकार है. खुफिया यंत्रों के इस्तेमाल में माहिर भी.

ATS1

आईटी एक्सपर्ट गुलशन काम के सिलसिले में अफगानिस्तान में पांच साल रह चुका है. वहां वो अमेरिका की एक कंपनी के लिए काम किया करता था. और ये कंपनी कॉट्रैक्टरों के जरिए उपभोक्ताओं तक सामान की सप्लाई करती है.

आईटी जानकार के पर्दे में जासूसी

दरअसल यही वो मुखौटा था जिसके पीछे गुलशन अवांछनीय गतिविधियों को संचालित किया करता था. हैरानी तो इस बात को लेकर होती है कि दिल्ली के महरौली इलाके में वो फिटजी कोचिंग सेंटर चलाया करता था. लेकिन असल में इन धंधों की आड़ में दरअसल वो देशी-विदेशी जासूसों का पूरा का पूरा नेटवर्क चला रहा था. इस नेटवर्क के काम करने का तरीका बेहद शातिराना था. अवैध टेलीफोन एक्सचेंज के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े लोग सउदी अरब, कुवैत और दूसरे खाड़ी देशों से कॉल किया करते थे. और भारतीय सेना से जुड़ी जानकारी इकट्ठा किया करते थे.

सेना की मूवमेंट और तैनाती से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए ये नेटवर्क जाली सिम का इस्तेमाल किया करता था. और तो और इन्हीं जाली सीम की मदद से नेटवर्क से जुड़े कॉलर खुद को भारतीय सेना के अधिकारी बताया करते थे. और जम्मू कश्मीर में सेना की छावनी से अहम जानकारी हासिल किया करते थे.

महत्वपूर्ण बात तो ये है कि जो सिम कार्ड इस्तेमाल में लाया जा रहा था वो सभी भारतीय थे. यही नहीं इससे ये पता कर पाना भी बेहद कठिन था कि वास्तव में कॉल कहां से की गई है. ऐसा लगता था कि सारे कॉल विदेशी धरती से किए गए हैं.

सेना की खुफिया जानकारी में सेंध

दूसरी चिंताजनक बात तो ये थी कि ये जासूसी भारतीय सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए की जा रही थी.  इससे ये बात साफ होती है कि देश में सेना से जुड़ी तमाम खुफिया जानकारी को इकट्ठा करने के लिए जासूसों का एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा है.

army

हालांकि ये पहला मौका नहीं है कि जब सेना से जुड़ी खुफिया जानकारी हासिल करने में जुटी किसी जासूसी रिंग का भंडाफोड़ हुआ हो. सेना के सेंट्रल कमांड का हेडक्वार्टर चूंकि लखनऊ में है. इस लिहाज से लखनऊ हमेशा से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और उसके एजेंटों के निशाने पर रहा है.

2016 में भी कई ऐसे जासूसी नेटवर्क को भंडाफोड़ किया गया था. हालांकि ऐसे नेटवर्क में ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा था. ऐसे नेटवर्क में भारतीय एजेंटो की बहाली की जाती थी. ताकि उनसे खास तरह की जानकारी हासिल करवाई जा सके. मसलन, सैन्य ठिकानों की तस्वीरें हों या फिर सेना के मूवमेंट की जानकारी हो.

बरेली और मेरठ सैन्य छावनी भी देश के खिलाफ जासूसी करने वालों के निशाने पर हमेशा से रही है.

तकनीकी ताकत के दम पर बड़ी कामयाबी

हालांकि यूपी एटीएस ने इस बार अपनी तकनीकी ताकत के दम पर जासूसों के इस गैंग को समय रहते पकड़ लिया. टेलिफोन विभाग के टेलिकॉम इनफोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनिटरिंग सेल ने यूपी एटीएस के साथ मिलकर इस बात की गहन छानबीन की आखिर मनी लॉन्डरिंग का मूल स्त्रोत कहां से था? क्या इस पूरे नेटवर्क में भारतीय टेलिफोन एक्सचेंज का भी इस्तेमाल किया गया. यूपी के हरदोई, सीतापुर से इस नेटवर्क का कनेक्शन क्या है इसकी भी गहरी छानबीन हो रही है.

यूपी एटीएस की ये बड़ी कामयाबी है और इस कार्रवाई को कामयाब बनाने में एटीएस ने दिल्ली, जम्मू कश्मीर पुलिस समेत तमाम सुरक्षा एजेंसियों के साथ जबरदस्त संपर्क बना कर रखा.

उत्तर प्रदेश की आबादी 18 करोड़ है. और ये सूबा अपने आप में एक देश से कम नहीं. लिहाजा इसे लेकर कई समस्याएं भी हैं. अगर राज्य में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने हैं. तो यहां का सांप्रदायिक और जातिगत ताना बाना हमेशा से संवेदनशील रहा है. यहां घटने वाली राजनीतिक घटना का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखा जाता है. यही वजह है कि सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर देश में जासूसी करने वालों के लिए ये जमीन खुफिया जानकारी की खान है. कहने का मतलब है कि हर लिहाज से ये सूबा अतिसंवेदनशील है.

कई मायनों में अहम है यूपी

बहुत दिन पहले की बात नहीं है जब सत्ताधारी दल के एक मंत्री के सचिव को गिरफ्तार किया गया था. उस पर आईएसआई के वेतन पर संवेदनशील राजनीतिक जानकारी इकट्ठा कर सीमा पार पहुंचाने का गंभीर आरोप लगा था.

क्योंकि आईएसआई के लिए राजनीतिक खुफिया जानकारी भी अहम है. क्योंकि इन्हीं जानकारी की बदौलत वो भविष्य के राजनीतिक बदलावों की समीक्षा कर पाते हैं. जबकि सेना को निशाना बनाना बोनस की तरह है.

benares

इसमें दो राय नहीं कि यूपी पुलिस के लिए यूपी एटीएस कारगर और पेशेवर साबित हुई है. क्योंकि इसमें वैसे लोग शामिल हैं जो अपने काम में माहिर है. साथ ही यूपी पुलिस के उन जवानों को जिन्हें अक्सर लोग सुस्त और नॉन परफार्मर बताते हैं उनसे इन लोगों का कोई मुकाबला नहीं.

यहां तक कि यूपी पुलिस के जवानों को कई बार उनकी राजनीतिक रुझान को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ता है. लेकिन एटीएस राजनीति से ऊपर है. और सत्ता में बैठे लोग भी इसके पेशेवर कार्रवाई में टांग नहीं अड़ाते. इस लिहाज से एटीएस को और स्वतंत्र बनाने के लिए जरूरी है कि इस पर किसी तरह की अड़चनें नहीं लगाई जाए.

यूपी में चुनाव बेहद नजदीक है. देश से गद्दारी करने वाले तमाम जासूस यूपी को टारगेट करने में जुटे हैं. ऐसे गद्दार सूबे में सांप्रदायिक दंगा तक भड़का सकते हैं. तो कानून व्यवस्था से जुड़ी कोई बड़ी समस्या खड़ी कर सकते हैं. खास कर तब जबकि राज्य प्रशासन चुनावी तैयारियों में जुटा हुआ है.

यूपी एटीएस की बड़ी सफलता

ऐसे में जरूरी है कि केंद्रीय एजेंसियां एटीएस के साथ पूर्ण सहयोग करे. ताकि गुलशन की पूछताछ के दौरान देश के गद्दारों की जो भी प्लानिंग का खुलासा होता है. उसे समय रहते रोका जा सके.

गुलशन अफगानिस्तान में पांच साल रह चुका है. वो आईटी एक्सपर्ट है. ये साबित हो चुका है कि वो जासूसी के खेल में शामिल है. लेकिन खतरा यहीं तक सीमित नहीं है. अफगानिस्तान आतंक का गढ़ है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अफगानिस्तान में बेहद सक्रिय है. तो कई आतंकी संगठन यहां हैं जिनका अंतरर्राष्ट्रीय नेटवर्क है. यही वजह है कि हमारी सुरक्षा हितों को कोई नुकसान हो इससे पहले इस नेटवर्क की सच्चाई को खंगालना जरूरी है.

सामान्य तौर पर यूपी को उसकी उपलब्धि के लिए नहीं पूछा जाता. जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों के एटीएस को यूपी एटीएस से बेहतर माना जाता है. लेकिन य़ूपी एटीएस ने अपने काम से इस मिथक को तोड़ा है. और इसकी सफलता इसी बात में है कि ये अब तक गैर राजनीतिक रहा है. वक्त हो चला है जब यूपी एटीएस को और संसाधन मुहैया कर बेहतर बनाया जाए ताकि हमारी सुरक्षा हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सके.

(लेखक यूपी काडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं) 

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi