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घातक विस्फोटक है पीईटीएन, 500 ग्राम की मात्रा उड़ा सकती है पूरी बिल्डिंग

पीईटीएन लाने-ले जाने में आसान है और ये सुरक्षा जांच से आसानी से बच सकता है.

Bhasha Updated On: Jul 14, 2017 05:40 PM IST

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घातक विस्फोटक है पीईटीएन, 500 ग्राम की मात्रा उड़ा सकती है पूरी बिल्डिंग

2 दिन पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायक की सीट के नीचे मिले पैकेट में सफेद पाउडर पाया गया. शुक्रवार को इसकी पुष्टि हुई कि ये पाउडर खतरनाक विस्फोटक पीईटीएन (पेंटाएरीथ्रिटाल टेट्रा नाइट्रेट) था.

राम गोविंद चौधरी की सीट के निकट करीब डेढ सौ ग्राम पाउडर एक कागज में लिपटा पाया गया. यह जगह विधानसभा अध्यक्ष के आसन के एकदम नजदीक है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सदन को बताया कि यह पीईटीएन है. यह एक खतरनाक पदार्थ है.

उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के मुताबिक इस विस्फोटक की 500 ग्राम मात्रा सदन को उड़ाने के लिए काफी है.

काले बाजार में उपलब्ध

पीईटीएन खतरनाक प्लास्टिक विस्फोटकों में शुमार किया जाता है जो काला बाजार में उपलब्ध है. यह नाइट्रोग्लिसरीन की ही तरह होता है.

आतंकवादी समूह इस विस्फोटक का बहुतायत में इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह रंगहीन क्रिस्टल आकार में होता है और इसका आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता. अधिकांश विस्फोटक डिटेक्टर के रूप में मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल होता है लेकिन पीईटीएन को सीलबंद डिब्बे में रखा जा सकता है. इसे किसी बिजली के उपकरण के बीच भी रखा जा सकता है. इसे सुरक्षा जांच में आसानी से छिपाकर ले जाया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉग स्क्वाड भी इस विस्फोटक को पहचान पाने में विफल रहा. पाउडर 12 जुलाई को सदन के सफाईकर्मियों को मिला था.

आसान है लाना-ले जाना

दुनिया के कई देशों में पीईटीएन की खरीद पर प्रतिबंध है. इसे पाउडर या पतली प्लास्टिक शीट के रूप में ले जाया जा सकता है. सेना और खनन उद्योग में पीईटीएन का उपयोग वैध तौर पर होता है.

विशेषज्ञों की मानें तो पीईटीएन में खुद विस्फोट नहीं होता बल्कि इसे डेटोनेट करने के लिए अन्य उपकरण की आवश्यकता होती है. पीईटीएन लाने-ले जाने में सुरक्षित होता है लेकिन इसे डेटोनेट करने के लिए कोई प्राथमिक विस्फोटक जरूरी होता है.

पीईटीएन का इस्तेमाल पिछले वर्षों के दौरान कई बम विस्फोटों में किया गया है.

दुनिया भर में पीईटीएन की मदद से विस्फोट की खबरें आती रही हैं. समझा जाता है कि 2011 के दिल्ली उच्च न्यायालय विस्फोट में पीईटीएन का इस्तेमाल किया गया था. इस विस्फोट में 17 लोगों की मौत हो गयी थी.

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