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उन्नाव ग्राउंड रिपोर्ट पार्ट-2: MLA कुलदीप सेंगर के आतंक से चुप है गांव

PUCL के सीनियर सदस्य आलोक अग्निहोत्री कहते हैं कि साफ है कि लोग कुलदीप सिंह से डरे हुए हैं, क्योंकि वो पिछले बीस साल से विधायक हैं

Rashme Sehgal Updated On: Apr 19, 2018 08:18 AM IST

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उन्नाव ग्राउंड रिपोर्ट पार्ट-2: MLA कुलदीप सेंगर के आतंक से चुप है गांव

(संपादकीय नोट: उन्नाव और आसपास के गांवों के बारे में तीन कड़ियों की सीरीज की यह दूसरी किश्त है. सीरीज में इलाके में फैले डर और दमन की संस्कृति की जांच-पड़ताल की जाएगी. साल 2017 के जून में 17 साल की नाबालिग से हुए बलात्कार से भय और दमन की इसी संस्कृति का इजहार हुआ है. पहला पार्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के माखी गांव में भयंकर सन्नाटा पसरा है. सड़कें वीरान दिखती हैं. आमतौर पर खूब बतियाने वाले गांव के लोग किसी बाहरी से बात करने को तैयार नहीं. गांव के सबसे चर्चित शख्स हैं विधायक कुलदीप सिंह सेंगर. सेंगर को एक नाबालिग के साथ बलात्कार, अपहरण और धमकाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के घर के बाहर काफी पुलिसवाले तैनात हैं. कमोबेश इतने ही पुलिसकर्मी उस सोलह साल की लड़की के घर के बाहर भी तैनात हैं, जिसने विधायक कुलदीप सेंगर पर 4 जून, 2017 को अपने साथ बलात्कार का आरोप लगाया है. इस लड़की के घर तैनात पुलिसवालों में महिला पुलिसकर्मी भी हैं.

विधायक कुलदीप सेंगर और उन पर आरोप लगाने वाली लड़की के घर के बीच फर्क साफ नजर आता है. विधायक के आवास के परिसर में दो मंदिर हैं. इसी से लगा हुआ एक इंटरमीडिएट कॉलेज है. जिसकी गेरुआ और लाल दुमंजिला इमारत की भव्यता, दिल्ली के कई बड़े स्कूलों को भी शर्मसार कर दे. इसके बरक्स आरोप लगाने वाली लड़की का घर बहुत निचले दर्जे का दिखता है. घर के बाहर एक धुंधला हो चला बोर्ड लगा है. इस बोर्ड पर लिखा है कि मकान मालिक का तार और स्टील का कारोबार है.

चूंकि लड़की के घर में ताला लगा हुआ था, तो हमने विधायक कुलदीप सेंगर के घर जाने का फैसला किया. रविवार का दिन होने की वजह से माखी गांव के काफी लोग विधायक से एकता दिखाने उनके घर पर जुटे थे. विधायक की दो बहनें भी अपने परिजनों के साथ आई हुई थीं. छोटी बहन ने कहा कि, 'विधायक जी हर रविवार को घर जरूर आते थे. इस बार वो नहीं आए, तो हम यहां चले आए'.

विवादित रहा है सेंगर का राजनीतिक इतिहास

कुलदीप सेंगर की छवि एक दलबदलू नेता की रही है. कुलदीप सेंगर का सियासी करियर करीब बीस साल का रहा है. इस दौरान वो यूपी की कमोबेश हर बड़ी पार्टी में रह चुके हैं. सेंगर ने पिछला चुनाव बांगरमऊ सीट से लड़ा था. जहां वो अपने पक्ष में ठाकुरों का वोट जुटाने में कामयाब रहे. कुलदीप सेंगर, यूपी के दो और कद्दावर ठाकुर नेताओं अरविंद सिंह गोप और निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से नजदीकी जताते रहे हैं.

सेंगर के करीबी लोगों को मालूम है कि उनके कई ईंट भट्ठे चलते हैं. उनके पास काफी जमीन भी है, जिस पर खेती होती है. इसके अलावा उन्नाव और कानपुर में उनकी दो गहनों की दुकानें भी हैं. सेंगर का काम-धाम उनके परिजन, खास तौर से तीन भाई देखते हैं. तीनों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें सबसे कुख्यात है अतुल सिंह सेंगर. अतुल 2004 में उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब उसने उस वक्त उन्नाव के एसएसपी रामलाल वर्मा पर गोली चला दी थी. वर्मा ने सेंगर परिवार के अवैध खनन के धंधे पर लगाम लगाने की कोशिश की थी, पुलिस अफसर वर्मा को अतुल सिंह के खिलाफ केस वापस लेने को मजबूर होना पड़ा था.

आरोप है कि 2014 में अतुल ने एक पत्रकार के पिता पर भी गोली चलाई थी. क्योंकि वो पत्रकार सेंगर परिवार के खिलाफ जो रिपोर्टिंग कर रहा था, उससे अतुल नाराज हो गया था. बलात्कार पीड़ित लड़की का आरोप है कि 3 अप्रैल को कुलदीप और उनके साथियों ने ही उसके पिता पप्पू को सरेआम पीटा था. सबके सामने पप्पू की पिटाई के बाद कुलदीप ने पीड़िता के चाचा महेश को कहा था, 'मैंने उसे प्रसाद दे दिया पब्लिक में बोलने का'.

उन्नाव. (फ़र्स्टपोस्ट के लिए विकास साहू)

उन्नाव. (फ़र्स्टपोस्ट के लिए विकास साहू)

पूरा गांव इकट्ठा है सेंगर के पक्ष में

लेकिन, कुलदीप की बहनें संगीता सेंगर कहती हैं कि उनके भाई कुलदीप को बदनाम करने के लिए बड़ी साजिश रची गई है. वो अपने दावे के समर्थन में कई तर्क देती हैं. संगीता सेंगर कहती हैं कि, 'बलात्कार पीड़ित लड़की का चरित्र ठीक नहीं है. वो तीन लड़कों के साथ 10 जून 2017 को भाग गई थी. दस दिन बाद वो वापस आ गई. इसके बाद उसने तीनों लड़कों पर बलात्कार का आरोप लगा दिया. जिसके बाद तीनों लड़के जेल चले गए. उनमें से एक लड़का फौजी हरपाल सिंह और उनकी पत्नी शशि सिंह का बेटा है. वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था. मगर इस लड़की ने उस पर रेप का आरोप लगाकर उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी. उसकी मां शशि सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. इसीलिए मेरे भाई कुलदीप के ऊपर उसने जो आरोप लगाए हैं, वो सरासर गलत हैं'.

संगीता सेंगर आगे कहती हैं, 'वो लड़की एक बहुत बदनाम परिवार से ताल्लुक रखती है. उसके पिता पप्पू सिंह के बड़े भाई जाने-माने हिस्ट्रीशीटर थे. उन पर 20 मुकदमे चल रहे थे. इसी वजह से गांव के लोगों ने ही उन्हें मार डाला था. सारे फोन रिकॉर्ड तलब करके एक-एक बिंदु पर जांच होनी चाहिए'.

जब संगीता ये बातें कह रही थीं, तो वहां जमा गांव के लोग खामोशी से सब सुन रहे थे. पड़ोस के रहने वाले विकास मिश्रा माखी से दस किलोमीटर दूर रसूलाबाद के एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं. वो संगीता की बातों पर सहमति में सिर हिलाते हैं. मिश्रा कहते हैं कि, 'फेसबुक पर उस लड़की के दूसरे लड़कों से बातचीत के तमाम सबूत चर्चित हो रहे हैं. ये सभी फुटेज सीबीआई को दिए गए हैं'.

परिजनों पर ही लड़की की पिता का हत्या का आरोप

विकास मिश्रा, लड़की के पिता पप्पू सिंह को भी बुरा-भला कहते हैं. विकास के मुताबिक पप्पू का किरदार भी अच्छा नहीं था. पुलिस ने उन पर भी कई केस किए हुए थे. संगीता सेंगर कहती हैं कि, 'मेरे भाई पर पिटाई के जो आरोप लगे हैं, वो सरासर गलत हैं. ये तो उनका पारिवारिक झगड़ा था. परिजनों ने ही पप्पू से मार-पीट की थी'. संगीता सवाल करती हैं कि, 'अगर उनके परिवार को हमसे कोई शिकायत थी, तो फिर पीड़िता की दो छोटी बहनें हमारे स्कूल में ही क्यों पढ़ाई कर रही थीं, जबकि पीड़िता ने तो बलात्कार का केस भी कर दिया था'.

बातचीत के दौरान ही चार लड़कियों को बुलाया जाता है. उनके नाम रश्मि, मनीषा, प्रिया और श्वेता हैं. इन लड़कियों की बलात्कार पीड़ित लड़की से दूर की रिश्तेदारी है. इनमें से बड़ी वाली की तो शक्ल भी पीड़िता से काफी मिलती है. वो तोते की तरह रटा सा बयान देती है, 'वो अच्छे चाल-चलन वाली लड़की नहीं है'. कुलदीप सेंगर की बड़ी बहन का मानना है कि विधायक ने मामले को लेकर काफी नरमी बरती. वो कहती हैं, 'सुलझाने से ये नतीजा है'.

इसके बाद हम बलात्कार पीड़ित लड़की के बगल में रहने वालों के पास जाते हैं. एक बुजुर्ग महिला पूरी घटना से इतनी डरी हुई है कि वो हाथ जोड़कर कहती है, 'मुझे अपनी बाकी की जिंदगी यहीं गुजारनी है. मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगी'. इससे पहले दिन में बलात्कार पीड़ित लड़की के चाचा महेश सिंह ने उन्नाव के ग्रीन पैलेस होटल में पत्रकारों से कहा था कि विधायक के भाई गांववालों को धमका रहे हैं कि वो अपना मुंह बंद ही रखें.

उन्नाव. (फ़र्स्टपोस्ट के लिए विकास साहू)

उन्नाव. (फ़र्स्टपोस्ट के लिए विकास साहू)

महेश ने कहा कि 'कल यानी शनिवार को उनके दो गाड़ियों से माखी गए थे. वहां उन्होंने लोगों को धमकाया कि अपना मुंह बंद रखें और हमारे परिवार से संबंध तोड़ लें. वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें. उन्हें गांव से बाहर करने की धमकियां दी गईं. गांव के दो लोग पहले से ही लापता हैं'.

'गांववालों को मुंह खोलने की धमकी मिली है'

माखी गांव की गलियों में घूमते हुए लगता है कि महेश का दावा सही है. हर घर से एक ही जवाब मिलता है कि वो विधायक जी के बारे में कुछ नहीं कहेंगे. न ही पप्पू सिंह की मौत के बारे में कुछ बोलेंगे. लोगों का जवाब एकदम रटा-रटाया था, 'विधायक जी ऐसे आदमी नहीं हैं कि रेप करेंगे. हम ने तो जब भी उनसे मदद मांगी, उन्होंने हमारा साथ दिया'. साफ दिखता है कि सियासी रूप से इतने ताकतवर शख्स के खिलाफ कोई मुंह नहीं खोलना चाहता.

उन्नाव में ब्राह्मणों की अच्छी खासी तादाद है. शहर की कुल आबादी का 20-22 फीसद ब्राह्मण हैं. इनके बाद मुसलमानों की आबादी है. लेकिन माखी गांव में तो कुलदीप सेंगर की ही चलती है. कुलदीप ने अपना सियासी करियर माखी गांव के प्रधान के तौर पर शुर किया था. जैसे-जैसे कुलदीप का कद बढ़ा, परिवार के दूसरे सदस्य भी राजनीति में आते गए. जब वो समाजवादी पार्टी के साथ थे, तो कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता को उन्नाव जिला परिषद का अध्यक्ष बना दिया गया. वो अब भी उस पद पर हैं. कुलदीप के एक भाई मनोज ब्लॉक प्रमुख हैं.

कुलदीप के बारे में मशहूर है कि वो बिना हिचक के पार्टी बदलते रहे हैं. 2002 में कुलदीप ने विधानसभा का चुनाव उन्नाव सदर सीट से बीएसपी के टिकट पर लड़ा और जीता था. अगले चुनाव में यानी 2007 में वो समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव के करीबी बन गए थे. 2007 का चुनाव कुलदीप ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा. 2012 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें बांगरमऊ के बजाय उन्नाव की भगवंत नगर सीट से टिकट दिया. वो चुनाव भी कुलदीप ने जीत लिया था. लेकिन, 2017 के चुनाव में कुलदीप ने बीजेपी के टिकट पर फिर से बांगरमऊ सीट पर चुनाव लड़ा और जीता.

पीड़ित के चाचा महेश, कुलदीप की बहन के आरोप को नकारते हुए कहते हैं, 'मेरी भतीजी उन लड़कों के साथ भागी नहीं थी, जैसा विधायक का परिवार दावा कर रहा है. उसे अगवा कर लिया गया था. उसे तभी वापस आने दिया गया, जब उसकी मां ने माखी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी'. महेश आगे कहते हैं कि, 'मेरे बड़े भाई पप्पू को अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीटा था. ये परिवार का झगड़ा नहीं था, जैसा विधायक का परिवार दावा कर रहा है. वो लोगों को बता रहे हैं कि मेरे चाचा के लड़के ने मेरे बड़े भाई को मारा था. मेरे चाचा का नाम जंग बहादुर सिंह हैं. लोग उनसे जाकर खुद पूछ लें कि सच क्या है'.

'सेंगर से डरकर ही नहीं हुई कार्रवाई'

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज यानी PUCL के सीनियर सदस्य आलोक अग्निहोत्री कहते हैं कि साफ है कि लोग कुलदीप सिंह से डरे हुए हैं, क्योंकि वो पिछले बीस साल से विधायक हैं. अग्निहोत्री कहते हैं कि इसी वजह से जब पीड़िता ने विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ बलात्कार की शिकायत की, तो पुलिस ने उसका तब तक संज्ञान नहीं लिया, जब तक वो जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नहीं मिली.

आलोक अग्निहोत्री सवाल करते हैं कि आखिर पुलिस दस महीने से पीड़िता की शिकायत पर कर क्या रही थी? वो कहते हैं कि सबको पता है कि उन्नाव की एसपी पुष्पांजलि सिंह, विधायक कुलदीप की रिश्तेदार हैं. हकीकत ये है कि किसी ने लड़की की मदद नहीं की. शायद इसमें भी कोई बड़ा सियासी हित था? अग्निहोत्री मानते हैं कि पप्पू सिंह की मौत में जिला पुलिस और जिला अस्पताल की आपराधिक मिलीभगत थी.

हालांकि, उन्नाव जिला अस्पताल के दो डॉक्टर निलंबित कर दिए गए हैं. माखी थाना प्रमुख और कुछ सिपाहियों का तबादला कर दिया गया है. मगर उन्नाव पुलिस के पास अपने बचाव में तर्क मौजूद है. उन्नाव के डीएसपी स्वतंत्र सिंह कहते हैं, 'लड़की के पिता की मौत पुलिस कस्टडी का केस नहीं है. उन्हें गिरफ्तार करके उन्नाव जेल ले जाया गया था. जेल की पुलिस उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले आई थी, इसमें लोकल पुलिस का कोई रोल ही नहीं'. स्वतंत्र सिंह कहते हैं, 'हां, लड़की और उसके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी है. मैंने इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया है ताकि बलात्कार पीड़ित और उसके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो.'

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