S M L

उन्नाव ग्राउंड रिपोर्ट पार्ट-1: पिता की मौत और घर न लौट पाने के दर्द में डूबा पीड़िता का परिवार

पीड़िता का परिवार राजपूत है और इस परिवार ने कड़ा रुख अपनाया. पीड़िता और उसकी मां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता-दरबार में गुहार करने के लिए लखनऊ पहुंचे थे और पिता ने भी विरोध किया था

Rashme Sehgal Updated On: Apr 18, 2018 12:34 PM IST

0
उन्नाव ग्राउंड रिपोर्ट पार्ट-1: पिता की मौत और घर न लौट पाने के दर्द में डूबा पीड़िता का परिवार

(संपादकीय नोट: उन्नाव और आसपास के गांवों के बारे में तीन कड़ियों की सीरीज की यह पहली किश्त है. लेखमाला में इलाके में फैले डर और दमन की संस्कृति की जांच-पड़ताल की जाएगी. साल 2014 के जून में 17 साल के नाबालिग से हुए बलात्कार से भय और दमन की इसी संस्कृति का इजहार हुआ है.)

किसी भी 17 साल की किशोरी की तरह उसे भी अपने दोस्तों के साथ घूमना-फिरना और आपस में सेल्फी शेयर करता होना चाहिए था, आने वाली उस फिल्म के बारे में गपशप करता होना चाहिए था जिसे वे नजदीक के मॉल में देख सकें. लेकिन 17 साल की इस किशोरी की कहानी एकदम ही अलग है. नारंगी कुर्ते और काले रंग की चूड़ीदार वाली इस किशोरी का चेहरा दुपट्टे से आधा ढंका है और वह एक ऐसे भंवर में घिरी है जिससे निजात का रास्ता मिलता नहीं दिखता.

इस किशोरी पर थकान हावी है, वह बड़ी मुश्किल से कहती है कि 'मेरा मुंह पूरी तरह से सूखा है. मुझे कुछ देर आराम की जरूरत है. मैंने अभी-अभी अपना पिता खोया है और विधायक के भाई और उसके साथियों ने जिस तरह से उन्हें पीट-पीटकर जान से मारा उसे सोचकर अब भी मेरा कलेजा दहल रहा है.'

बाहुबल और धनबल का जोर

किशोरी की बातों में जिस विधायक का जिक्र आया वह कुलदीप सिंह सेंगर हैं यूपी के उन्नाव जिले के बांगरमऊ से बीजेपी के विधायक. सेंगर बाहुबली राजनेता हैं. उन्होंने अपनी साख-धाक धनबल, बाहुबल और जाति के दम पर कायम की है. इस विधायक के भाई उनके लिए ‘हिटमैन’ (लठैत) का काम करते हैं. विधायक के छोटे भाई अतुल के बारे में कहा जाता है कि वह धनबल और बाहुबल दोनों का इस्तेमाल करता है.

माना जा रहा है कि अतुल ने ही अपने समर्थकों से बीते 2 अप्रैल को किशोरी के पिता पर हमला करने के लिए कहा था. किशोरी के पिता को इस बुरी तरह मारा गया कि उन्नाव के जिला अस्पताल में लाते वक्त उनके शरीर 19 गहरे जख्म थे. यह बात अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में लिखी है.

यह किशोरी एक ऊंची छत वाले कमरे में एक बड़े बिछावन पर लेटी है. कमरे की दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है. लड़की के पास उसकी चाची मौजूद हैं. बिछावन के नजदीक ही चार वर्दीधारी महिला पुलिसकर्मी कुर्सी पर बैठी हैं. बलात्कार के संताप से उबरने के लिए जूझ रही इस किशोरी के साथ ये सब चौबीसों घंटे मौजूद रहते हैं. किशोरी का आरोप है कि कुलदीप सिंह सेंगर ने 4 जून 2017 को उसके साथ बलात्कार किया. उसके बाद हादसों का एक सिलसिला चला और इसी क्रम में 8 अप्रैल 2018 को उसके पिता की मौत हुई.

ये भी पढ़ें: उन्नाव रेप केस: सेंगर के भाई को कोर्ट 4 दिन के CBI रिमांड पर भेजा

किशोरी की दर्दनाक कहानी से एक बार फिर उजागर हुआ है कि महिलाएं और किशोर, खासकर किशोर उम्र की लड़कियां किस हद तक समाज के ताकतवर तबके के हाथों लगातार शोषण का शिकार हो रही हैं. लड़की बार-बार बेहोश हो जाती है, उसके ब्लड शुगर के घट-बढ़ की लगातार निगरानी की जा रही है.

लड़की पर विपदा की शुरूआत दस महीने पहले हुई. वह कहती है: 'मैं अपनी चाची के साथ विधायक के घर पर गई थी. विधायक ने मेरे साथ बलात्कार किया जबकि वह बाहर पहरेदारी पर खड़ी रही.' लड़की यहां जिस चाची का जिक्र कर रही है उसका नाम शशि सिंह है. शशि सिंह सेना के जवान हरपाल सिंह की पत्नी है. यह वाकया जब पेश आया तब हरपाल सिंह गांव में नहीं था.

सबसे पहले इन तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ केस

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि लड़की को गांव के तीन लोगों- शशि और हरपाल के लड़के सुभम सिंह, उसके ड्राइवर नरेश तिवारी और ब्रजेश यादव ने अगवा किया. लड़की बताती है कि ये लोग उसे एक बड़ी रकम की एवज में बेच चुके होते लेकिन इसी दरम्यान 20 जून, 2017 को लड़की की मां ने एक शिकायत दर्ज करवा दी.

लड़की की मां गेस्टहाऊस के दूसरे कमरे में बैठी हैं- उनके साथ में मृत पति का भाई बैठा है और सास भी. सास बुजुर्ग हैं और बीमार भी. लड़की की मां गहरे दुख में हैं, एकदम निढाल की सी दशा है उनकी, बिल्कुल टूट चुकी हैं. वो गहरे अफसोस के स्वर में कहती हैं, 'मैं समझ नहीं पा रही कि आसपास क्या कुछ हो रहा है. बीस साल पहले मैं इस गांव में एक कमउम्र दुल्हन के रुप में आई थी. मेरे चार लड़कियां और एक चार साल का बेटा है. मेरी लड़की गुम हो गई तो मैंने 20 जून 2017 को माखी थाने में इसकी शिकायत लिखवाई थी.'

गुमशुदा लड़की अगले रोज बरामद हुई. उसने 22 जून को बयान दिया कि उसके साथ बलात्कार हुआ है. इस बयान के आधार पर तीनों लड़कों शुभम सिंह, नरेश तिवारी और ब्रजेश यादव की गिरफ्तारी हुई. पीड़ित लड़की का आरोप है कि माखी थाने में पुलिस ने सेंगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया. सेंगर से इस इलाके में लोग भय खाते हैं. पीड़ित लड़की सवाल करती है, 'जब वे लोग एफआईआर तक दर्ज करने में डर रहे थे तो फिर मेरी मेडिकल जांच करवाने का सवाल ही कहां उठता है?'

SIT team probes Unnao rape case

जब सेंगर और उसके भाइयों को भनक पड़ी कि लड़की एफआईआर दर्ज करवाने पर तुल गई है तो उनलोगों ने पीड़िता के परिवार पर जबर्दस्त दबाव बनाया. परिवार का सबसे छोटा भाई कुछ साल पहले ही दिल्ली आकर नांगलोई में रहने लगा था. वह गांव की व्यभिचार भरी इस राजनीति से अपने को दूर रखना चाहता था.

ये भी पढ़ें: रेप पर फांसी की सजा की मांग: सख्त कानून से ज्यादा जरूरी है कानून का सख्ती से पालन

लड़की के परिवार के सेंगर से अच्छे थे रिश्ते

पीड़िता के मृत पिता के भाई बताते हैं, 'हमलोगों के सेंगर और उसके भाइयों से अच्छे रिश्ते थे. उनका घर हमारे घर के सामने ही है. हमारी बेटियों ने उनके स्कूल में पढ़ाई की है.' दरअसल, पीड़िता की बहनें अभी जिस इंटरमीडियट कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं वह भी सेंगर की जमीन पर बना है. यहां दो मंदिर भी बने हैं. कॉलेज के परिसर में बसों को पार्क करने की जगह है. कॉलेज में छिटपुट एयर कंडीशन का भी इंतजाम है.

पीड़िता के चाचा कहते हैं, 'इन आरोपों के बाद पुलिस ने हमारे परिवार पर दबाव बनाना शुरू किया इसलिए भतीजी हमारे साथ रहने के लिए दिल्ली चली आई. मेरे भाई ने भी गांव छोड़ दिया.' माना जा रहा है कि 2 अप्रैल के दिन सेंगर के गुण्डों ने पीड़िता के पिता की बेरहमी से पिटाई की थी. इसे देखकर पीड़िता की दादी बेहोश हो गई थीं. उन्होंने फर्स्टपोस्ट को बताया कि, 'होली के दिन की घटना है. मेरी दवाइयां खत्म हो गई थीं. मैंने बेटे से कहा कि माखी जाकर दवाइयां ले आओ. वह अपने बेटे के लिए एक साइकिल भी खरीदना चाहता था. बच्चा कुछ दिनों से साइकिल के लिए जिद कर रहा था.'

पीड़िता के परिवार ने अपनाया था कड़ा रुख

पीड़िता का परिवार राजपूत है और इस परिवार ने कड़ा रुख अपनाया. पीड़िता और उसकी मां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता-दरबार में गुहार करने के लिए लखनऊ पहुंचे. उन्होंने अदालती जांच की मांग करते हुए एक अर्जी भी दायर की. 22 अगस्त, 2017 को सेंगर को लड़की की दर्ज करवाई गई शिकायत की कॉपी (प्रति) मिली जो डाक के जरिए उन्नाव पहुंची थी.

ये भी पढ़ें: उन्नाव रेप मामला: क्या हट जाएगा आरोपी कुलदीप सेंगर पर लगा पॉक्सो एक्ट?

चिट्ठी के आने के बाद से ही पूरा मामले ने एक अलग रंगत अख्तियार कर ली. दोनों परिवारों के संबंध पहले से कहीं ज्यादा बिगड़ गए. एक वक्त वह भी था जब पीड़िता के परिवार के लोग सेंगर को दादू कहकर बुलाते थे. विधायक भी पीड़िता की दादी को अम्मा कहकर बुलाते थे. लेकिन अब वो समय बीत चुका था. सेंगर ने अपने को इलाके में ठाकुर जाति के मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है. उन्नाव में ठाकुर जाति के वोट एकमुश्त उनकी तरफ पड़ते हैं. सेंगर को अपने खिलाफ उठती विरोध की आवाज जरा भी बर्दाश्त नहीं थी.

पीड़िता के पिता.

पीड़िता के पिता.

पीड़िता के पिता ने सेंगर का एक पोस्टर बनवाकर उसे माखी में बंटवाया था. पोस्टर में सेंगर को दस चेहरे वाले रावण के रूप में दिखाया गया था. इससे भी दोनों परिवारों के रिश्ते बिगड़े. सेंगर चाहते थे कि एफआईआर वापस ले लिया जाय. उन्होंने पीड़िता के परिवार से यह भी कहा था कि वह लड़की की शादी करवाने में मदद करेंगे. उन्नाव जिले के जेल सुप्रिटेन्डेन्ट एके सिंह का कहना है कि सेंगर के चार समर्थकों और कुछ अज्ञात लोगों ने पीड़िता के पिता की कथित तौर पर पिटाई की और इसके बाद उसे पुलिस को सौंप दिया. पीड़िता के पिता को पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर इसे अगले रोज साढ़े सात बजे शाम में जेल भेज दिया गया.

पिता के बिना असहाय है परिवार

पांच अप्रैल को पीड़िता के पिता ने पेट-दर्द और उल्टी की शिकायत की. जिला अस्पताल के डाक्टर 6 अप्रैल को जेल पहुंचे और उसे कुछ दवाइयां दी. सात अप्रैल को पीड़िता के पिता को अस्पताल ले जाया गया. वहां ब्लड, यूरीन और अल्ट्रासाउंड टेस्ट हुए. जांच में सबकुछ सामान्य निकला और सुप्रिटेन्डेन्ट एके सिंह के मुताबिक उसे शाम के समय फिर से जेल भेज दिया गया.

ए.के. सिंह का कहना है कि '8 अप्रैल को पीड़िता के पिता ने फिर से पेटदर्द और उल्टी की शिकायत की. उसका ब्लडप्रेशर बहुत कम हो गया था इसलिए जेल के डाक्टर ने हमलोगों से कहा कि उसे जिला अस्पताल ले जाना ठीक होगा. उसे रात में 8.45 बजे अस्पताल में भर्ती करवाया गया और 9 अप्रैल को शाम में 3.45 बजे उसकी मौत हो गई.'

पीड़िता और उसकी मां लखनऊ चले गए थे. वहां पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करने की कोशिश की. पीड़िता की मां स्थिति का बयान करते हुए कहती हैं, 'आप हमारी हालत पर गौर कीजिए कि हमारा परिवार क्या कीमत चुका रहा है. हम अब कभी माखी नहीं लौट सकेंगे. अब परिवार में कोई पुरुष नहीं बचा जो हमारी हिफाजत करे.' पीड़िता की मां ऐसा कहते हुए रोने लगती हैं.

उन्होंने अपनी बात में यह भी जोड़ा कि, 'अगर वे लोग हमें दंड देना चाहते थे तो वे मेरे पति की बांह काट लेते या फिर उनके कान काट लेते. मैं अपने पति के जिंदा रहते उनकी देखभाल करती. लेकिन उन लोगों ने आखिर ये क्या किया? उन लोगों ने तो मेरे पति की मृत देह भेजी. अब इन चार लड़कियों और छोटे बेटे की जिम्मेवारी मेरे कंधे पर है. इस जिम्मेवारी में सहारा देने के लिए मेरे साथ आज कौन खड़ा है?'

(फीचर्ड इमेज में प्रतीकात्मक तस्वीर)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi