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बजट 2017: गांवों को चमकाने की कोशिश क्या रंग ला पाएगी

नोटबंदी की मार के सामने इतनी भर ब्याज माफी तो ऊंट के मुंह में जीरा है.

Updated On: Feb 01, 2017 02:16 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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बजट 2017: गांवों को चमकाने की कोशिश क्या रंग ला पाएगी

फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली का बजट देखकर ऐसा लग रहा था कि उन्होंने नोटबंदी के असर को खत्म करने की पूरी तैयारी कर रखी थी.

आमतौर पर सरकार से यह शिकायत रहती है कि वो अपने बजट में गांवों की अनदेखी करती है लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. इस बार जेटली के बजट का बड़ा फोकस गांवों पर इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहा है.

सरकार ने कहा है कि अभी तक देश में 40 से 60 फीसदी शौचालय हैं, जिसे 2018 तक बढ़ाकर 100 फीसदी कर देंगे. यानी देश के सभी गांवों में शौचालय की सुविधा होगी.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा जोर

सरकार गांवों की इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बेहतर बनाने पर जोर दे रही है. इस दिशा अहम कदम उठाते हुए सरकार प्रधानमंत्रीर ग्राम सड़क योजना के तहत हर दिन 133 किलोमीटर सड़कें बनाने वाली है. अभी तक इस योजना के तहत फिस्कल ईयर 2011 से 2014 तक 73 किलोमीटर की सड़कें बन रही थीं.

सरकार ने किसानों को राहत देते हुए फसल बीमा के लिए 9 हजार करोड़ रुपए अलग रखे हैं.

नोटबंदी के बाद सरकार की इस बात पर काफी छीछालेदर हुई थी कि उन्होंने गांवों के बारे में कोई विचार नहीं किया. इसका असर उनके बजट भाषण में भी दिखा. डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 1.5 लाख गांवों को ब्रॉड बैंड से जोड़ने की योजना बनाई है.

किसानों की मुश्किल

सरकार की इन कोशिशों का फायदा किसानों तक कितना पहुंच पाता है यह आने वाले समय में ही पता चलेगा. सरकार ने अपने बजट भाषण में किसानों के लिए खेती का कर्ज बढ़ा दिया है लेकिन यह साफ नहीं है कि यह कर्ज कैसे मिलेगा. सरकार किसानों की आमदनी 2022 तक बढ़ाकर दोगुनी करना चाहती है लेकिन यह कैसे करेगी इसकी कोई साफ योजना नहीं है.

 

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