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बजट सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने बुलाई सभी दलों के नेताओं की बैठक

सरकार ने भी रविवार को ऐसी बैठक बुलाई है जहां प्रधानमंत्री और शीर्ष विपक्षी नेता उन मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं जो सदन में उठाए जा सकते हैं

Updated On: Jan 27, 2018 08:10 PM IST

Bhasha

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बजट सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ने बुलाई सभी दलों के नेताओं की बैठक

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद के बजट सत्र की पूर्व संध्या पर रविवार को सदन में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई है. बजट सत्र में तीन तलाक विधेयक समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव होने की आशंका है.

सरकार ने भी रविवार को ऐसी बैठक बुलाई है जहां प्रधानमंत्री और शीर्ष विपक्षी नेता उन मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं जो सदन में उठाए जा सकते हैं.

इस सत्र का पहला चरण 29 जनवरी से 9 फरवरी तक चलेगा. इस दौरान सरकार 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी और फिर एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा.

लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ सत्र शुरू होगा.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि संसद में अपने पहले ऐसे अभिभाषण में कोविंद लोगों खासकर पिछड़े और कमजोर तबकों के विकास और सशक्तिकरण पर सरकार द्वारा बल दिए जाने को रेखांकित कर सकते हैं.

वर्ष 2019 के अगले लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी नीत एनडीए सरकार द्वारा यह आखिरी पूर्ण बजट पेश किए जाने के मद्देनजर ऐसी संभावना है कि इसमें दृढ़ राजनीतिक झलक दिखेगी.

नौ फरवरी के बाद मध्यावधि अवकाश के पश्चात फिर पांच मार्च को संसद के बजट सत्र का दूसरा सत्र प्रारंभ होगा जो छह अप्रैल तक चलेगा.

संभावना है कि इस दौरान सरकार तीन तलाक पर संबंधित कानून और अन्य पिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित विधेयक को पारित कराने की पुरजोश कोशिश कर सकती है. इन दोनों ही विधेयकों का बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से काफी महत्व है. बीजेपी तीन तलाक को खत्म करने के लिए काफी मुखर है. शीर्ष अदालत ने हाल ही में तीन तलाक को अमान्य करार दिया था.

लोकसभा ने तीन तलाक के मामले में दोषी मुस्लिम व्यक्तियों के लिए कैद की सजा के प्रावधान वाले विधेयक को पारित कर दिया था लेकिन राज्यसभा में एकजुट विपक्ष ने उसमें अड़ंगा लगा दिया. राज्यसभा में सरकार अल्पमत में है.

बीजेपी अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान कर पिछड़े वर्गों के बीच अपना समर्थन मजबूत करने की आस कर रही है. संवैधानिक दर्जा मिलने से यह आयोग और मजबूत हो जाएगा.

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