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बजट 2017: इनकम टैक्स में क्या सौगात मिलेगी

गरीबों और मध्य वर्ग को खुश करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली इस बार के बजट में कुछ राहतभरा उपाय कर सकते हैं.

Rajesh Raparia Rajesh Raparia Updated On: Jan 10, 2017 06:25 PM IST

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बजट 2017: इनकम टैक्स में क्या सौगात मिलेगी

भारत में बजट का इंतजार दो वजहों से सबसे ज्यादा किया जाता है. पहला आयकर में क्या हुआ. और  दूसरा, क्या सस्ता या महंगा हुआ. आम आदमी इन्हीं दो पैमानों पर बजट का मूल्यांकन करता है.

इस बार आयकर दाताओं को आम बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. इसकी मुख्य वजह नोटबंदी है.

नोटबंदी से गरीब और मध्यम वर्ग को भारी मुसीबत झेलना पड़ा है. इसका गहरा एहसास अब मोदी सरकार को हो चुका है जिसका साफ-साफ संकेत नये साल की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी के दिये राष्ट्रीय संबोधन में देखे जा सकते हैं. इन वर्गों को खुश करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली इस बार के बजट में जरुर कुछ उपाय करेंगे.

मध्य वर्ग को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आयकर में राहत दी जाये. प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली अलग-अलग मंचों से इसके साफ संकेत दे चुके हैं.

इससे आयकर दाताओं की मांगों की सूची काफी लंबी हो चुकी है. लेकिन कई विशेषज्ञों के कयास हैं कि आने वाले बजट में आयकर में भारी-भरकम राहत की उम्मीद मोदी सरकार से नहीं करनी चाहिए. ऐसा वह चुनावी साल यानि 2019 में करेगी, जब लोकसभा के चुनाव होने हैं. पर अधिकतर आयकर दाता यह मान चुके हैं कि अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन आयें या नहीं, पर उनके अच्छे दिन आने वाले हैं.

1 फीसदी लोग ही देते हैं आयकर

टैक्स सलाहकार कंपनी डिलॉइट ने बजट पूर्व संभावनाओं को लेकर एक बड़ा सर्वेक्षण किया है. इसमें हिस्सा लेने वाले 58 फीसदी लोगों की मांग है कि, टैक्स फ्री आय सीमा बढ़कर 5 लाख रुपये सालाना होनी चाहिए. जो कि अभी ढाई लाख रुपये है.

देश में लगभग 3 करोड़ 65 लाख लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं. लेकिन डेढ़ फीसदी लोग ही पांच लाख रुपये से ज्यादा का आयकर टैक्स देते हैं. जो कि कुल आयकर संग्रह का 57 फीसदी है.

देश में कुल आबादी का 1 फीसदी लोग ही आयकर देते हैं. काले धन पर अंकुश लगाने के लिए नोटबंदी का कड़ा फैसला लिया है जिसमें 500 और 1000 के नोटों को रद्द कर दिया गया है. इस फैसले का एक बड़ा मकसद यह भी है कि कैसे भी देश में आयकर दाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हो. विशेषकर बड़े आयकर दाताओं की.

Tax Payers

भारत  की आबादी का केवल 1 फीसदी लोग ही आयकर देते हैं (रॉयटर्स)

प्रधानमंत्री मोदी को यह जानकर हैरानी हुई है कि देश में तकरीबन 24 लाख लोग ही ऐसे हैं जो 10 लाख रुपये का आयकर देते हैं. पर आयकर दाताओं के आकड़ों से साफ है कि छोटे आयकर दाताओं को राहत देने से सरकार पर कोई विशेष बोझ नहीं बढ़ेगा.

पर यह भी कम हैरानी की बात नहीं है कि महज 21 हजार रुपये कमाने वाला आयकर के घेरे में आ जाता है. जबकि बाजार में एक कप चाय भी 7 से 10 रुपये में मिलती है. पर अब मोदी सरकार गरीबों की सरकार बनना चाहती है और पीएम मोदी गरीबों के नये मसीहा.

सरकार पर विशेष बोझ नहीं पड़ेगा

इसलिए यह तय मानना चाहिए कि प्रधानमंत्री को गरीबों का मसीहा बनाने के लिए छोटे आयकर दाताओं को राहत जरुर दी जायेगी. और टैक्स फ्री आय की सीमा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर कम से कम तीन लाख रुपये सालाना कर दी जायेगी.

Income Tax Office

नोटबंदी के बाद पहली बार पेश होने वाले बजट से आम लोगों को काफी उम्मीदें हैं   (रॉयटर्स)

इससे करोड़ों आयकर दाताओं को राहत मिलेगी और इस फेरबदल से सरकार पर कोई विशेष बोझ भी नहीं बढ़ेगा. क्योंकि इनका कुल आयकर संग्रह में बेहद मामूली योगदान है. लेकिन आयकर दाताओं की उम्मीदों की सूची काफी लंबी है.

अधिकांश आयकर दाता चाहते हैं कि आयकर स्लैब में भी कर दरों में बदलाव होना चाहिए. मांग है कि पांच लाख रुपये तक मौजूदा स्लैब को बढ़ाकर 7 लाख रुपये किया जाये. और आयकर दर भी 10 फीसदी रखी जाये.

अभी आयकर की धारा 24बी में दो लाख रुपये तक आवास कर्ज ब्याज पर कटौती मिलती है. इसे बढ़ाने की पुरजोर मांग है. इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश में कर छूट को दोबारा बहाल करने की भी मांग है.

एनपीएस में पीपीएफ जैसी छूट मिले

आयकर दाताओं की सबसे बडी मांग है कि, नेशनल पेंशन स्कीम में वही कर छूट मिले जो पीपीएफ (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड) में मिलती है.

Union Budget

संसद का बजट सत्र 31 जनवरी से शुरु हो रहा है (पीटीआई)

हर सरकार चाहती है कि सभी देशवासी ईमानदारी से अपना टैक्स अदा करे. पर सरकार को भी करदाताओं के प्रति ईमानदारी से पेश आना चाहिए. लेकिन कोई भी सरकार ऐसा करने में विफल रही है. इसलिए कर मुक्त आय सीमा का अचूक हथियार हर सरकार अपने पास रखना चाहती है.

प्रत्यक्ष कर संहिता बिल पर पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा की अगुवाई में संसदीय स्टैंडिंग कमिटि बनी थी. इस समिति ने सिफारिश की थी कि कर मुक्त आय सीमा को जीवन लागत से जोड़ देना चाहिए.

हर साल महंगाई से जीवन लागत बढ़ जाती है. इसलिए सरकार महंगाई भत्ता बढ़ाती है. इससे सालाना आय बढ़ जाती है और टैक्स भी. इसलिए सरकार को कर मुक्त आय सीमा की थोक या खुदरा मूल्य सूचकांक से जोड़ देना चाहिए. इससे कर मुक्त आय सीमा का स्वतः ज्यादा सम्मानजनक ढंग से समायोजन हो जायेगा.

जाहिर है कि इस व्यवस्था में आम जनता को सरकार के आगे हाथ फैलाने से छुटकारा मिल जाएगा.

विसंगतियां दूर करने की पहल

पता नहीं प्रधानमंत्री मोदी को आयकर के इन प्रावधानों का पता है या नहीं. लेकिन वे भी जानकर हैरान रह जायेंगे.

आयकर कानून के तहत हर बच्चे पर 100 रुपये महीने का शिक्षा भत्ता मिलता है. सबको मालूम है कि हर महीने कितनी फीस बच्चों की जाती है. यदि बच्चा हॉस्टल में रहता है, तो 300 रुपये महीने का हॉस्टल भत्ता मिलता है. क्या यह कर दाताओं के साथ क्रूर मजाक नहीं है. और बड़ी हैरानी की बात यह है कि सरकारें आती हैं, बदल जाती हैं. पर इन नियमों में कोई बदलाव नहीं होता है.

Arun-Jaitley-narendra-modi

इसी तरह 1600 रुपये का यातायात भत्ता प्रति माह का प्रावधान है. इतनी रकम में बस से भी आफिस नहीं पहुंचा जा सकता है. मोदी सरकार अमीरी-गरीबी का अंतर कम करना चाहती है, छोटे आय वालों का दिल जीतना चाहती हैं. तो सरकार को तहे दिल से इन विसंगतियों को दूर करने की पहल इस बजट से शुरू कर देनी चाहिए.

कुल मिला कर मोदी सरकार ने न्योता दे दिया है, पर दावत का इंतजाम होना अभी बाकी है.

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