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दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद क्या भिखारियों के दिन बहुरेंगे?

दिल्ली सहित देश के दूसरे कई राज्यों में मुंबई में भीख मांगने वाली रोकथाम अधिनियम 1959 को ही अपनाया जाता है

Updated On: Aug 10, 2018 10:51 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद क्या भिखारियों के दिन बहुरेंगे?

पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में भीख मांगने को अपराध घोषित करने वाले कानून को समाप्त कर दिया. दिल्ली में भीख मांगना अब अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा. इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली की सड़कों पर अगर भिखारी भीख मांगते दिख जाए तो दिल्ली पुलिस उसे पकड़ नहीं सकती है. हां, हाईकोर्ट ने मुंबई में भीख मांगने वाली रोकथाम कानून के सेक्शन 11 में छेड़छाड़ करने से मना जरूर कर दिया. यानी कोई आदमी या भीख मंगवानेवाला गिरोह किसी शख्स से बलपूर्वक या जबरदस्ती भीख मंगवाने का धंधा करवाता है तो उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है.

किसी को भी राइट टू स्पीच के तहत रोटी मांगने का पूरा अधिकार है: कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि भूखे व्यक्ति को खाना मांगने का पूरा अधिकार है. दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायधीश सी हरिशंकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया. इस फैसले के बाद दिल्ली में भीख मांगने के आरोप में जेल में बंद भिखारियों के खिलाफ मुंबई में लागू कानून के तहत लंबित मुकदमा रद्द किया जा सकेगा. कोर्ट ने कहा कि किसी को भी राइट टू स्पीच के तहत रोटी मांगने का पूरा अधिकार है.

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गौरतलब है कि पिछले साल ही केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा था कि अगर कोई आदमी गरीबी के कारण भीख मांगता है तो यह कोई अपराध नहीं है. लेकिन, साथ में हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि सामाजिक और आर्थिक पहलू को ध्यान में रखते हुए भीख मांगने के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए दिल्ली सरकार अलग कानून बनाने के लिए स्वतंत्र है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते 16 मई को ही सरकार से पूछा था कि भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है? अगर सरकारी आंकड़ों की मानें तो दिल्ली-एनसीआर में लगभग एक लाख भिखारी हैं. सिर्फ दिल्ली-दिल्ली में ही 50 से 60 हजार भिखारी सड़कों पर भीख मांगते दिख जाएंगे.

दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते बुधवार को भीख मांगनेवाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि मुंबई में भीख मांगने वाली रोकथाम कानून में काफी संतुलन है. इस कानून में भीख मांगना अपराध की श्रेणी में गिना जाता है.

लेकिन, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंडर और कर्णिका सहनी ने अपने-अपने जनहित याचिका में भिखारियों के लिए मूलभूत मानवीय सुविधाएं और मौलिक अधिकार मुहैया कराए जाने का अनुरोध किया था. हर्ष मंदर भारत में भूख और भिखारियों पर काफी सालों से काम करते आ रहे हैं. इस काम के लिए उन्हें राजीव गांधी सदभावना अवार्ड भी मिल चुका है.

ताज्जुब की बात यह है कि देश की संसद ने भीख मांगने के खिलाफ अब तक कोई भी कानून पारित नहीं किया है. दिल्ली सहित देश के दूसरे कई राज्यों में मुंबई में भीख मांगने वाली रोकथाम अधिनियम 1959 को ही अपनाया जाता है. दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दूसरे राज्यों के जेल में बंद भिखारियों को भी राहत मिल सकती है.

बता दें कि इस अधिनियम के तहत अभियोजन पक्ष को (धारा 11) के तहत भिक्षा मंगवाने वाले गिरोहों और लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है. धारा 11 के तहत दोषी पाए गए लोगों को कम से कम एक वर्ष और अधिकतम तीन साल की सजा सुनाई जाती है. यह अधिनियम पुनर्वास करने के लिए बहुत काम करता है, लेकिन दंड का प्रावधान नहीं के बराबर है. इस अधिनियम की धारा 11 के तहत व्यक्ति को रोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

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भिखारी गिरफ्तारी के कारणों से अनजान रहते हैं

साल 1960 में इस अधिनियम को दिल्ली में लागू किया गया था. कई सालों के बाद इस अधिनियम को पहली बार सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और कर्णिका सावनी ने चुनौती दी, जिन्होंने अधिनियम की धारा 11 को छोड़कर सभी वर्गों की वैधता और संवैधानिकता पर सवाल उठाया था.

भिखारियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले कुछ वकीलों का मानना है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार 74% व्यक्ति अनौपचारिक श्रम क्षेत्र से होते हैं. ये लोग छोटे होटल, बाजार और कंस्ट्रक्शन लाइन से संबंधित होते हैं.इनमें 45 प्रतिशत लोग बेघर होते हैं. अक्सर देखा जाता है कि भिखारी गिरफ्तारी के कारणों से अनजान रहते हैं.

दिल्ली में भीख मांगना एक अपराध है इस पर याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि कानून के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन किया जा रहा है. यह अनुच्छेद लोगों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है, क्योंकि जो लोग भीख मांगने का काम करते हैं, वे ऐसा जीवित रहने के लिए करते हैं.

फर्स्टपोस्ट हिंदी ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के कई इलाकों में भिखारियों की स्थिति का जायजा लिया. फर्स्टपोस्ट की तफ्तीश में ज्यादातर भिखारियों की दयनीय स्थिति के बारे में पता चला, लेकिन तफ्तीश में ऐसे भी कई गिरोहों के बारे में पता चला, जो मासूम बच्चों और अनाथों से भीख मंगवाने का काम कराते हैं.

दिल्ली में ज्यादातर भिखारी पहाड़गंज, हजरत निजामुद्दीन, लाल किला, चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के इलाके, कनॉट प्लेस और पहाड़गंज के इलाकों में देखने को मिलते हैं. खासकर टूरिस्ट प्लेस और पुराना किला के भैरव मंदिर हो या कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर इन जगहों पर भिखारियों की संख्या बहुत ज्यादा होती है.

क्योंकि इस समय दिल्ली में 15 अगस्त की तैयारी चल रही है ऐसे में दिल्ली की सड़कों पर से भिखारी लगभग गायब नजर आ रहे हैं. जो भिखारी नजर भी आ रहे हैं वह दिल्ली पुलिस से छुप-छुपा कर भीख मांगते दिख रहे हैं. शायद उनको हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी नहीं है या फिर कहीं न कहीं दिल्ली पुलिस का डर सता रहा है.

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