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सोहराबुद्दीन मामला: दो गवाह अपने बयान से पलटे, कुल 61 हुई संख्या

गुरुवार को हुई विशेष सीबीआई कोर्ट में अपने बयानों से मुकरे दो और गवाह, अब तक 38 में से 15 आरोपी बरी हो चुके हैं

Updated On: May 18, 2018 04:51 PM IST

FP Staff

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सोहराबुद्दीन मामला:  दो गवाह अपने बयान से पलटे, कुल 61 हुई संख्या

सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ मामलों में अभियोजन पक्ष के दो और गवाह गुरुवार को हुई सीबीआई की एक विशेष अदालत के सामने अपने बयान से पलट गए. इस तरह अपने बयानों से मुकरने वाले गवाहों की संख्या 61 हो चुकी है.

गुरुवार को हुई सुनवाई में उदयपुर पुलिस के पूर्व सब-इंस्पेक्टर हजारी लाल मीणा सीबीआई के जज एस जे शर्मा के सामने अपने बयान से पलट गए.

खबर के अनुसार रिटायर मीणा ने अपने बयान में कहा था कि 24 दिसंबर, 2006 की शाम को पुलिस अधीक्षक दिनेश एम एन (मामले में एक पूर्व आरोपी) ने उससे कैदियों प्रजापति और आजम खान की सुरक्षा के लिए पुलिस दल उपलब्ध कराने के लिए कहा था. इन कैदियों को अगले दिन उदयपुर जेल से अहमदाबाद की अदालत ले जाया जाना था.

मीणा के अनुसार पुलिस के पास सूचना थी कि प्रजापति फरार होने का प्रयास कर सकता है इसलिए दिनेश ने उससे कहा कि एक विशेष टीम उनकी सुरक्षा करेगी.

हालांकि गुरुवार को अदालत में मीणा ने इस तरह का कोई आदेश मिलने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वह नहीं जानता कि प्रजापति की सुरक्षा किसने की या इसके लिए एक विशेष टीम गठित की गई थी.

पुलिस के अनुसार प्रजापति उस समय फरार हो गया था जब उसे अहमदाबाद ले जाया जा रहा था और वह 28 दिसम्बर, 2006 को एक मुठभेड़ में मारा गया था.

सीबीआई के अनुसार वह एक फर्जी मुठभेड़ में मारा गया क्योंकि वह इससे पहले एक फर्जी मुठभेड़ में शेख की मौत का चश्मदीद था.

गुरूवार को हुई सुनवाई के दौरान अपने बयान से पलटने वाला एक अन्य गवाह गोविंद सिंह है. जो उदयपुर के सूर्जापुल पुलिस स्टेशन में एक इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे.

सिंह ने सीबीआई को बताया था कि उन्होंने पुलिस स्टेशन कि डायरी में चार पुलिस अधिकरियों के थाने से जाने कि सूचना दर्ज कि थी. ये चार पुलिस अधिकारी दिनेश एम एन के निर्देश पर काम कर रहे एक विशेष कार्यबल का हिस्सा थे. सीबीआई के अनुसार ये चार पुलिसकर्मी उस टीम का हिस्सा थे जो प्रजापति को अहमदाबाद लेकर गई थी.

हालांकि सिंह ने सुनवाई के दौरान अपने बयान से मुकरते हुए कहा कि उन्होंने डायरी में कोई सूचना दर्ज नहीं की थी. अदालत अब तक अभियोजन पक्ष के 88 से अधिक गवाहों के बयान ले चुकी है जिनमें से 61 गवाह अपने बयान से पलट चुके हैं.

मालूम हो कि एक संदिग्ध गैंगस्टर शेख और उसकी पत्नी नवंबर, 2005 में गुजरात पुलिस के साथ हुई कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए थे. उनका सहयोगी प्रजापति भी दिसंबर, 2006 में गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ हुई कथित फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था.

सीबीआई द्वारा आरोपित 38 लोगों में से 15 को बंबई की अदालत बरी कर चुकी है. जिनमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डी जी वंजारा, राजकुमार पांडियन, दिनेश एम एन और बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह (गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री) शामिल हैं.

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