S M L

वायु प्रदूषण से हर मिनट मर रहे हैं दो भारतीय, जानिए आप पर है कितना बड़ा खतरा?

मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक हर साल वायु प्रदूषण के कारण 10 लाख से ज्यादा भारतीय मारे जाते हैं

Updated On: Feb 19, 2017 11:50 AM IST

Bhasha

0
वायु प्रदूषण से हर मिनट मर रहे हैं दो भारतीय, जानिए आप पर है कितना बड़ा खतरा?

जिस हवा में भारतीय सांस लेते हैं, वह रोज जहरीली होती जा रही है और एक नए अध्ययन में कहा गया है कि वायु प्रदूषण के कारण प्रतिदिन औसतन दो लोग मारे जाते हैं.

मेडिकल मेग्जीन ‘द लांसेट’ के मुताबिक, हर साल वायु प्रदूषण के कारण 10 लाख से ज्यादा भारतीय मारे जाते हैं और दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से कुछ शहर भारत में हैं.

इस सप्ताह जारी हुई एक रिसर्च साल 2010 के आंकड़ों पर आधारित है. इसमें कहा गया है कि वैश्विक तौर पर 27.34 लाख बच्चे समय पूर्व जन्म के मामलों को पीएम 2.5 के प्रभाव से जोड़ा जा सकता है. नौ महीने से पहले जन्म लेने वाले मामलों में सबसे बुरी तरह दक्षिण एशिया प्रभावित होता है. यहां 16 लाख जन्म समय से पहले होते हैं.

रिसर्च में कहा गया है कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण विस्तृत तौर पर एक-दूसरे से जुड़े हैं और इनसे एकसाथ निपटे जाने की जरूरत है.

द लांसेट में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन ‘मानवीय स्वास्थ्य पर तो भारी खतरा पैदा करता ही है’ साथ ही साथ यदि सही कदम उठाए जाएं तो वह ‘21वीं सदी का सबसे बड़ा वैश्विक स्वास्थ्य अवसर भी है.’ पत्रिका में छपे अध्ययन में कहा गया कि उत्तर भारत में छाया स्मॉग भारी नुकसान कर रहा है. हर मिनट भारत में दो जिंदगियां वायु प्रदूषण के कारण चली जाती हैं.

इसके अलावा, विश्व बैंक के आकलन के मुताबिक यदि भारत में श्रम से होने वाली आय के क्रम में देखा जाए तो इससे 38 अरब डॉलर का नुकसान होता है.

DelhiPollution3

रिपोर्ट की मानें तो वायु प्रदूषण सभी प्रदूषणों का सबसे घातक रूप बनकर उभरा है. दुनियाभर में समय से पूर्व होने वाली मौतों के क्रम में यह चौथा सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आया है.

हाल ही में 48 प्रमुख वैज्ञानिकों ने अध्ययन जारी किया और पाया कि पीएम 2.5 के स्तर या सूक्ष्म कणमय पदार्थ :फाइन पार्टिक्युलेट मैटर: के मैटर में पटना और नई दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर हैं. ये कण दिल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं.

एक आकलन के मुताबिक वायु प्रदूषण की चपेट में आने पर हर दिन 18 हजार लोग मारे जाते हैं. इस तरह यह स्वास्थ्य पर मंडराने वाला दुनिया का एकमात्र सबसे बड़ा खतरा बन गया है. विश्व बैंक का आंकलन है कि यह श्रम के कारण होने वाली आय के नुकसान के क्रम में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 225 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाता है.

कई भारतीय रिपोर्ट से विरोधाभास रखते हुए द लांसेट ने कहा कि कोयले से संचालित होने वाले बिजली संयंत्र वायु प्रदूषण में 50 प्रतिशत का योगदान देते हैं.

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अनिल माधव दवे ने हाल ही में संसद में यह माना था कि भारत वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए वार्षिक तौर पर महज सात करोड़ रूपए खर्च करता है.

साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर हषर्वर्धन ने कहा, ‘जब प्रदूषण फेफड़ों पर असर डालना शुरू करता है, खासकर छोटे बच्चों के, तब यह घातक साबित हो सकता है. यह एक स्वीट पॉइजन की तरह है और इस पर चिंता स्वाभाविक है. इस संदर्भ में बहुत कुछ किया गया है लेकिन बहुत कुछ किया जाना बाकी भी है.

इस रिपोर्ट में दुनियाभर से जानकारी ली गई है. लगभग 16 संस्थान इस पहल के अकादमिक साझेदार हैं. इनमें यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, सिंगुआ यूनिवर्सिटी और सेंटर फॉर क्लाइमेट एंड सिक्योरिटी आदि शामिल हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में स्वास्थ्य एवं जलवायु परिवर्तन के प्रमुख डॉ डी कैंपबैल लेंड्रम ने कहा, ‘पेरिस समझौता एक ऐतिहासिक उपलब्धि था. अब चुनौती यह है कि इसमें जिन लक्ष्यों पर सहमति बनी थी, उन्हें हासिल किया जाए.

उन्होंने कहा, ‘डब्ल्यूएचओ विभिन्न देशों को उनके सामने मौजूद स्वास्थ्य संबंधी खतरों, कम कार्बन वाले भविष्य से जुड़े अवसरों और आज के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे से निपटने के लिए जरूरी सहयोग के साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए मिलकर काम कर रहा है.’

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi