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भारतीय महिलाओं की खूबसूरती का पैमाना न गढ़ें बिप्लव, मीडिया को मसाला देने से किरकिरी ही होगी

भारतीय महिलाएं अपने नयन-नक्श और रंग की वजह से नहीं बल्कि अपनी कर्मठता, आचरण, संवेदनशीलता, समर्पण, त्याग, शौर्य, बलिदान और आदर्शों की वजह से पूजी और सम्मानित मानी जाती हैं

Updated On: Apr 27, 2018 08:09 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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भारतीय महिलाओं की खूबसूरती का पैमाना न गढ़ें बिप्लव, मीडिया को मसाला देने से किरकिरी ही होगी
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त्रिपुरा में 25 साल से कायम लेफ्ट के एकछत्र राज को उखाड़ फेंकने के बाद बीजेपी ने सत्ता की कमान एक युवा चेहरे को सौंपी. बिप्लव कुमार देब त्रिपुरा के नए सीएम बने. इससे पहले वो राज्य बीजेपी के अध्यक्ष भी थे. उनकी युवा ऊर्जा, कार्यशक्ति और विचारों से प्रभावित हो कर ही बीजेपी आलाकमान ने उनके हाथों में त्रिपुरा का ताज सौंपा. लेकिन सत्ता में आने के बाद वो भूल गए कि वो किसी संवैधानिक पद पर जिम्मेदार भूमिका में हैं जहां उनकी निजी सोच और गलत बयानी पार्टी के लिए भी खतरा बन सकती है.

बिप्लव कुमार देब का हालिया बयान ये साबित करता है कि वो न तो परिपक्व राजनीतिज्ञ हैं और न ही मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के मुताबिक खुद को अभी तक ढाल सके हैं. इसकी बड़ी वजह उनके बयानों से झलकती है.

बिप्लव कुमार देब ने सौंदर्य प्रतियोगिताओं को लेकर जो बयान दिया उसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है. पूर्व मिस वर्ल्ड डायना हैडन की खूबसूरती पर सवाल उठाने पर बिप्लव कुमार देब की मानसिकता पर सवाल उठ रहे हैं. यहां तक कि उन्होंने सौंदर्य को लेकर जिस तरह से पूर्व विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय और डायना हेडन की तुलना की वो समझ से परे है. वो डायना हैडन की जीत को फिक्सिंग मानते हैं. इसके पीछे उनकी दलील बेहद ही संकुचित मानसिकता का परिचय देती है. वो कहते हैं कि ऐश्वर्या राय की खूबसूरती को समझा जा सकता है लेकिन डायना हैडन की खूबसूरती को वो समझ नहीं सके. उनके मुताबिक सही मायने में ऐश्वर्या राय ही भारतीय महिलाओं की खूबसूरती का प्रतिनिधित्व करती हैं.

अगरतला में हैंडलूम पर आधारित एक वर्कशॉप में उन्होंने कहा, 'हम महिला को देवी लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में देखते हैं. ऐश्वर्या मिस वर्ल्‍ड बनी तो ठीक है. वो सही मायने में भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं. लेकिन मैं डायना हेडन की खूबसूरती नहीं समझ पा रहा हूं.'

बिप्लब कुमार देब के सवालों में उनका पूर्वाग्रह दिखता है

वो डायना हेडन के खिताब जीतने को कॉस्मेटिक माफिया की देन मानते हैं. वो लगातार पांच साल तक मिस वर्ल्ड या मिस यूनिवर्स खिताब जीतने पर सवाल उठा रहे हैं. वो पूछ रहे हैं कि पांच साल के बाद क्यों और सुंदरियां भारत से नहीं आ सकीं?

biplab kumar deb

उनके सवालों में उनका पूर्वाग्रह ही दिखाई देता है. उन्हें ये जानना चाहिए कि अगर इस देश में सौंदर्य की प्रतिमूर्ति मां दुर्गा की पूजा होती है तो शक्ति के रूप में मां काली की साधना भी होती है.

यह भी पढ़ें- महाभारतकालीन इंटरनेट: मेरे बयान पर हंसने वालों की सोच छोटी: बिप्लब देब

भारतीय महिलाएं अपने नयन-नक्श और रंग की वजह से नहीं बल्कि अपनी कर्मठता, आचरण, संवेदनशीलता, समर्पण, त्याग, शौर्य, बलिदान और आदर्शों की वजह से पूजी और सम्मानित मानी जाती हैं. सौंदर्य कभी किसी एक पैमाने में नहीं रखा और न ही परखा जा सकता है. इसके आयाम बहुत हैं जिन्हें बिप्लव देब अभी अपनी राजनीति की युवावस्था में समझ नहीं सके हैं.

आज अगर उन्हें डायना हेडन को मिस वर्ल्ड बनाना समझ में नहीं आ रहा है तो बहुत मुमकिन है कि भविष्य में उन्हें पार्टी आलाकमान के फैसले भी समझ न आएं जो जनहित और जनभावना में लिए गए हों. बिप्लव देब का बयान न सिर्फ जनभावना के खिलाफ है बल्कि नारी अस्मिता को भी आहत करता है.

नजरिया ही दुनिया को कुदरत की दी गई आंखों से खूबसूरत भी देखता है तो बदरंग भी. बस सवाल सोच का है कि वो किस नजरिए से कायनात को देखता है. डायना हेडन को बिप्लब देब के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं. उन्होंने उस दौर में भारत का मान और स्वाभिमान बढ़ाया जब ग्लोबल होती दुनिया में भारत को लोग ‘थर्ल्ड-वर्ल्ड’ की नजर से देखते थे. डायना ने खूबसूरती का नया पैमाना गढ़ा और अपनी मेहनत से ही उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जो देश की तमाम बेटियों की आंखों में किसी सपने सा पलता है.

पार्टी के दूसरे गिरिराज सिंह बनने की राह पर न चले बिप्लब देब

किसी की मेहनत को सिर्फ एक गैरजिम्मेदाराना बयान देकर खारिज करने से पहले बिप्लव कुमार देब अपने संवैधानिक पद और सार्वजनिक जीवन की ली गई शपथ के बारे में भी सोचें क्योंकि अब उनका हर बयान और आचरण आम जनता के सामने आदर्श के रूप में ही देखा जाएगा.

गिरिराज सिंह

बिप्लव कुमार देब पार्टी के दूसरे गिरिराज सिंह बनने की राह पर न चलें तो ये उनके लिए भी बेहतर होगा. इससे पहले बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने भी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर नस्लीय टिप्पणी की थी. अब बिप्लव कुमार देब भी गोरे रंग और नीली आंखों को खूबसूरती का पर्याय बताते हुए डायना हेडन के खिताब में अपनी संकुचित सोच का पैबंद लगाने की कोशिश न करें.

यह भी पढ़ें- डायना हेडन नहीं ऐश्वर्या राय के पास है भारत की खूबसूरती: बिप्लब देब

बिप्लव कुमार देब कौन हैं? एक युवा नेता और त्रिपुरा के नए नवेले बने सीएम. इससे पहले उनकी पहचान राज्य के बीजेपी अध्यक्ष की रही. उससे पहले वो दिल्ली में पढ़ाई करने के लिए आए थे. दिल्ली में किसी जिम में इंस्ट्रक्टर भी रहे थे. बाद में राजनीति में उनके आने के बाद किस्मत के दरवाजे इस तरह खुले कि आज वो त्रिपुरा में सत्ता संभाल रहे हैं.

बिप्लव कुमार देब त्रिपुरा में युवाओं के लिए एक उदाहरण बन चुके हैं. राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले युवा उन्हें देखकर अपने भविष्य के सपने देख सकते हैं. ऐसे में बिप्लव कुमार देब के हल्के बयान उनके कद और पद को हल्का करने का ही काम करेंगे.

माणिक सरकार की सादगी से भी सीख सकते हैं बिप्लब देब

सीएम की कुर्सी पर बैठकर उन्हें सार्वजिनक जीवन के आचरण को सिर्फ आवरण ही नहीं बनाना होगा बल्कि आत्मसात भी करना होगा. वो जिस पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार की कुर्सी पर बैठे हैं उनके ही आचरण को करीब से देखें और समझें. माणिक सरकार की सादगी देश के राजनीतिज्ञों में एक मिसाल मानी जाती है.

बिप्लव कुमार देब पार्टी के दूसरे नरेश अग्रवाल भी न बनें. उनसे पार्टी को साल 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर बहुत उम्मीदें हैं. नरेश अग्रवाल जब हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए थे तो उन्होंने भी अतिउत्साह और आवेग में आकर समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद जया बच्चन के प्रति अभद्र टिप्पणी की थी. लेकिन जब पार्टी अलाकमान की तरफ से उन्हें फटकार मिली तो फौरन ही अपने बयान के लिए खेद भी जता दिया.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi speaks during the inauguration of Delhi End TB summit at Vigyan Bhawan in New Delhi on Tuesday.PTI Photo by Shahbaz Khan (PTI3_13_2018_000058B)

शब्दों के तीर जुबान की कमान से एक बार निकलने के बाद वापस नहीं लौटते हैं. किसी की भावना को आहत कर बिप्लव कुमार देब अपनी निजी सोच को सही साबित नहीं कर सकते हैं. इससे पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी बड़े गर्व के साथ कहा था कि वो हिंदू हैं और ईद नहीं मनाते हैं. योगी भी ये भूल गए कि वो हिंदू बाद में हैं और पहले उस सूबे के रक्षक हैं जिस पर सभी धर्म के लोगों की हिफाज़त का जिम्मा है.

पीएम मोदी के चेतावनी के बाद भी आ रहे हैं ऐसे बयान

खासबात ये है कि कुछ ही दिन पहले पीएम मोदी ने नमो ऐप के जरिए सभी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को बयान संभलकर देने के लिए चेताया है. पीएम मोदी ने ही कहा है कि पार्टी के नेता किसी भी मामले में विद्वान और विश्लेषक बनने से बचें. उन्होंने साफ कहा कि नेताओं के गैरजिम्मेदाराना बयान ही मीडिया को मसाला देने का काम करते हैं और उसके बाद फिर मीडिया पर ही सवाल उठाना फिजूल है.

यह भी पढ़ें- व्यंग्य: बिप्लब की बात में तो दम है, गलती लोगों की है उनकी बात ही नहीं समझ पा रहे

यही काम बिप्लव कुमार देब ने किया. उन्होंने मसाला खुद दिया और अब सोशल मीडिया उसका तड़का लगा रहा है. इससे पहले वो ये कहकर सनसनी फैला चुके थे कि महाभारत काल में ही इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू हो चुका था. उन्होंने कहा था कि संजय ने इंटरनेट की तकनीक के जरिए ही धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाया था.

निजी सोच जब कभी सार्वजनिक जीवन पर हावी पड़ेगी तो ऐसे ही बयानों की वजह से बिप्लव कुमार देब परिहास का विषय बनेंगे. अगर वो गंभीरता नहीं ओढ़ सकते तो कम से कम चुप्पी ही थाम लें. कहीं ऐसा न हो कि उनका दिया गया ‘मसाला’ साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का त्रिपुरा में जायका बिगाड़ दे.

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