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तीन तलाक के मसले पर फेल रहा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड: बुखारी

बुखारी ने कहा कि बोर्ड ने इस मसले पर विचार किया होता तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक नहीं पहुंचता.

Bhasha Updated On: Aug 24, 2017 05:54 PM IST

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तीन तलाक के मसले पर फेल रहा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड: बुखारी

मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक की प्रथा को सप्रीम कोर्ट के ‘असंवैधानिक’ करार दिए जाने की पृष्ठभूमि में दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर तंज कसते हुए कहा कि बोर्ड के ‘दोहरे रवयै’ ने मुसलमानों और शरिया का मजाक बना दिया है.

साथ ही उन्होंने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि देश की शीर्ष अदालत ने शरिया और पर्सनल लॉ में किसी तरह का दखल नहीं दिया है. शाही इमाम सैयद अहमद ने कहा, ‘पर्सनल लॉ बोर्ड का दोहरा रवैया रहा है. दिलचस्प बात है कि पहले तो उसने ये कहा कि एक बार में तीन तलाक का मामला शरीयत से जुड़ा है और इसमें अदालत का कोई हक नहीं बनता. फिर कहा कि एक बार में तीन तलाक दुरूस्त नहीं है और ऐसा करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. इस मामले में बोर्ड का रूख एक नहीं रहा है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘इस मामले पर बोर्ड ने मुसलमानों और शरिया का मजाक बना दिया है.’ शाही इमाम ने कहा कि ‘अदालत ने शरीयत में कोई दखल नहीं दिया. उसने न तो मजहबी आजादी पर रोक लगाई और न ही शरीयत में कोई दखल दिया. अदालत ने वही बात कही है जो बोर्ड को कहनी चाहिए थी.’

उन्होंने बोर्ड की ओर से मुसलमानों के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने का दावा किए जाने को लेकर भी सवाल खड़ा किया.

सैयद अहमद ने कहा कि बोर्ड बता दें कि आपको किसने चुना है? आप कैसे ठेकेदार बन गए? आपने अपने को खुद चुना है. बोर्ड के दोहरे रवैये से मुसलमानों का नुकसान हुआ है.’

ध्यान देने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बीते मंगलवार को बहुमत के निर्णय में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक देने की प्रथा को खत्म करते हुए इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और अमान्य करार दे दिया था. कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक की यह प्रथा कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है.

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