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तीन तलाक के खिलाफ जंग जीतने वाली कौन हैं ये पांच महिलाएं

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उन पांच महिलाओं की याचिकाओं पर सुनाया है जिन्हें इस प्रथा की वजह से घोर अमानवीय यातना झेलनी पड़ी

FP Staff Updated On: Aug 22, 2017 11:14 PM IST

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तीन तलाक के खिलाफ जंग जीतने वाली कौन हैं ये पांच महिलाएं

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक कहकर तलाक देने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत को अपने ऐतिहासिक फैसले में गैर-कानूनी और असंवैधानिक कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उन पांच महिलाओं की याचिकाओं पर सुनाया है जिन्हें इस प्रथा की वजह से घोर अमानवीय यातना झेलनी पड़ी.

इन महिलाओं की लड़ाई का ही यह परिणाम है कि अब कोई मुस्लिम मर्द अपनी पत्नी को ईमेल, खत, व्हाट्सऐप, फेसबुक या फोन आदि के जरिए तीन तलाक नहीं दे पाएगा.

आइए जानते हैं इन पांच महिलाओं के बारे में जिन्होंने तलाक देने की इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाया.

सायरा बानो

इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में करीब 2 साल पहले सबसे पहली बार उत्तराखंड की रहने वाली 36 वर्षीय सायरा बानो ने उठाया था.

अक्टूबर, 2015 में 15 साल की शादी के बाद सायरा के पति रिजवान अहमद ने एक चिट्ठी के जरिए उसे तीन तलाक दिया था. उस वक्त सायरा अपने माता-पिता के घर पर थी.

रिजवान ने अपनी चिट्ठी में तीन बार तलाक-तलाक-तलाक लिखा था. सायरा इस तलाक की वैधता को लेकर सबसे पहले स्थानीय मौलवी से मिली. उसने इस तलाक को जायज ठहराया. इसके बाद सायरा ने सुप्रीम कोर्ट में ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी मान्यताओं के खिलाफ याचिका दायर की. सायरा समाजशास्त्र में एमए हैं और रिजवान से उन्हें एक बेटा और बेटी है. तलाक के बाद रिजवान दोनों बच्चों को अपने साथ ले गया.

हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में सायरा ने कहा,’मैं इस फैसले का स्वागत और समर्थन करती हूं. यह मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन है.’ सायरा की याचिका के साथ-साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह की चार अन्य महिलाओं की याचिका को भी इस केस में शामिल किया और उन्हें भी पक्षकार बनाया.

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गुलशन प्रवीन

गुलशन प्रवीन ने भी सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को खत्म करने के लिए एक याचिका दाखिल की थी. गुलशन का कहना है कि उसके पति ने 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर लिखकर उसे तलाक दिया था.

गुलशन अंग्रेजी साहित्य में एमए है. गुलशन ने अपने पति पर घरेलू हिंसा का भी इल्जाम लगाया है. उसके पति को 2015 में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के मामले में गिरफ्तार भी किया जा चुका है.

एनडीटीवी से बातचीत में गुलशन ने कहा कि ‘मेरे पति को एक दिन मुझे तलाक देने की सूझी और एक पल में मैं और मेरा 2 साल का बेटा रिदान बेघर हो गए.’

आफरीन रहमान

आफरीन की शादी एक वैवाहिक वेबसाइट के जरिए 2014 में हुई थी. शादी के कुछ ही महीने बाद उसने आरोप लगाया कि उसके सास-ससुर उसे दहेज के लिए मानसिक तौर से परेशान कर रहे हैं. इसके कुछ महीने बाद उनके साथ मारपीट होने लगी.

उसे घर छोड़कर जाने के लिए कहा गया. फिर वो अपने माता-पिता के घर आ गई जहां जनवरी 2016 में उसे स्पीड पोस्ट से तलाक दिया गया.

इशरत जहां

31 वर्षीय इशरत जहां पश्चिम बंगाल के हावड़ा की रहने वाली हैं. इशरत को उसके पति ने फोन करके तीन बार तलाक-तलाक कहकर तलाक दिया था. अप्रैल, 2015 में एक दिन इशरत के पति मुर्तजा ने दुबई से उसे फोन किया और फोन पर तीन बार तलाक कहकर फोन काट दिया.

इशरत इस फैसले से काफी खुश हैं. उन्हें तीन बेटियां और एक बेटा है. इशरत का कहना है कि मुर्तजा ने बेटे की चाहत में दूसरी शादी कर ली जबकि 2010 में उन्हें एक बेटा भी हुआ था. लेकिन इससे दोनों के संबंधों में कोई सुधार नहीं हुआ.

अतिया सबरी

28 वर्षीय अतिया सबरी इस केस की आखिरी पीड़ित पिटीशनर हैं. वे यूपी के सहारनपुर की रहने वाली हैं.

2012 में वाजिद अली से उनकी शादी हुई थी. वाजिद अली ने नवंबर, 2015 में सबरी के भाई के ऑफिस में एक कागज पर तीन बार तलाक-तलाक लिखकर भेजा था.

सबरी ने तीन तलाक को यह कहकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी कि यह महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करता है.

इन पीड़ित महिलाओं के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन नामक एक स्वतंत्र संगठन को भी इस मामले में एक पक्षकार बनाया था. इसकी मुख्य वजह यह थी कि इस संगठन ने एक सर्वे करके यह बताया था कि देश की 92 फीसदी महिलाएं तीन तलाक का खात्मा चाहती हैं.

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