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संसद: अब राज्यसभा में कल पेश होगा तीन तलाक बिल

सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है ऐसे में इसे पास कराने में सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

| January 04, 2018, 10:11 PM IST

FP Staff

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हाइलाइट

Jan 2, 2018

  • 11:05(IST)

    डीएमके सासंद कनीमोड़ी ने कहा है कि तीन तलाक बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए.

  • 11:03(IST)

    संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा है कि राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास करवाने के लिए कांग्रेस से बात चल रही है और ये राज्यसभा में कल पेश हो सकता है

  • 11:01(IST)

    सरकार पूरी कोशिश में लगी है कि तीन तलाक बिल राज्यसभा से भी पास करवा लिया जाए. जबकि विपक्ष इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने की तैयारी में लगा है.

संसद: अब राज्यसभा में कल पेश होगा तीन तलाक बिल

मुस्लिमों में एक बार में तीन तलाक कहने के चलन को फौजदारी अपराध बनाने संबंधी विधेयक को मंगलवार को राज्यसभा में रखा जाएगा. लोकसभा में यह विधेयक पहले ही पारित हो चुका है.

एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत के अपराध में पति को तीन साल की सजा के प्रावधान वाले इस विधेयक को पिछले सप्ताह लोकसभा में पारित किया गया था.

राज्यसभा की कार्यसूची के अनुसार मुस्लिम महिला (विवाह संबंधित अधिकारों का संरक्षण) विधेयक दो जनवरी को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद चर्चा और पारित कराने के लिए उच्च सदन में रखेंगे.

बिल को पास कराने के लिए सरकार को चाहिए विपक्ष का सहयोग

सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है ऐसे में इसे पास कराने में सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

सरकार की सारी उम्मीदें विपक्ष पर टिकी हैं. अगर कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार का साथ देती है तो राह आसान हो जाएगा लेकिन इसकी उम्मीद कम है. कांग्रेस इस बिल का समर्थन कर रही है लेकिन वह अन्य विपक्षी पार्टियों से चर्चा कर अपना फैसला लेगी.

वहीं लेफ्ट पार्टियों की मांग है कि विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि हम एक साथ तीन तलाक के खिलाफ हैं और इसका खात्मा चाहते हैं लेकिन नए बिल में इसे अपराध माना गया है जो पूरी तरह गलत है. उनका आरोप है कि बीजेपी राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इसे जल्दबाजी में लेकर आई है.

क्या है इस विधेयक में

इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि तीन तलाक पीड़ित महिला अपने और अपने अल्पवय बच्चों के लिए गुजारा भत्ता पाने के मकसद से मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकती है. पीड़िता मजिस्ट्रेट से अपने अल्पवय बच्चों के संरक्षण की मांग कर सकती है.

इस प्रस्तावित कानून के अनुसार मौके पर बोला गया तलाक, भले ही वह मौखिक, लिखित अथवा ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से हो, वह गैरकानूनी और निष्प्रभावी हो जाएगा.

इस बीच इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने दावा किया कि राज्यसभा में यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो विभिन्न मुस्लिम संगठन सुप्रीम कोर्ट की शरण लेंगे.

राज्यसभा में पार्टियों की स्थिति

राज्यसभा में अभी कांग्रेस-57, बीजेपी-57, सपा-18, एआईडीएमके-13, तृणमूल कांग्रेस-12, बीजेडी-8, वामदल-8, टीडीपी-6, एनसीपी-5, डीएमके-4, बीएसपी-4, आरजेडी के 3 सदस्य हैं. बीजेपी के पास सहयोगी दलों के 20 सांसद हैं. राज्यसभा में 238 सदस्य हैं.

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