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केसरीनाथ त्रिपाठी को मिला बिहार राज्यपाल का प्रभार, जानिए उनकी कुछ खास बातें

त्रिपाठी पर पहले ही पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा का कार्यभार है

FP Staff Updated On: Jun 21, 2017 03:51 PM IST

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केसरीनाथ त्रिपाठी को मिला बिहार राज्यपाल का प्रभार, जानिए उनकी कुछ खास बातें

रामनाथ कोविंद को एनडीए के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बिहार के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दोबारा केसरी नाथ त्रिपाठी सौंपी गई है.

उत्तर प्रदेश के रहने वाले और पश्चिम बंगाल के मौजूदा राज्यपाल त्रिपाठी इससे पहले भी बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाल चुके हैं. ब्राह्मण जाति से आने वाले त्रिपाठी नवंबर 2014 से अगस्त 2015 तक बिहार के राज्यपाल थे.

हालांकि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल होने के नाते उन पर अब अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी. पश्चिम बंगाल फिलहाल नेपाली-भाषी गोरखाओं की अलग राज्य की मांग के चलते उथल-पुथल झेल रहा है.

कानून और संविधान के बड़े जानकार हैं त्रिपाठी

इसके अलावा 82-वर्षीय त्रिपाठी पर राज्यपाल के रूप में मिजोरम जैसे संवेदनशील राज्य की भी जिम्मेदारी है. लेकिन कानून और संवैधानिक विषयों के मामले में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि केंद्र ने एक बार फिर उनपर भरोसा जताया.

खास बात ये है कि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और अब बिहार जहां के राज्यपाल पद पर वह आसीन होने वाले हैं, वहां गैर-बीजेपी दलों का शासन है.

एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और सांवैधानिक विशेषज्ञ त्रिपाठी पेशे से वकील हैं. उन्होंने इलाहबाद उच्च न्यायलय में 1956 से 2014 तक वकालत की. इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश से 5 बार विधायक और उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं.

राजनीती में लंबी पारी के बावजूद बेदाग छवि

केसरी नाथ त्रिपाठी एक साफ छवि वाले व्यक्ति हैं. myneta.in की जानकारी के मुताबिक उनपर कोई भी आपराधिक मुकदमा नहीं चल रहा है.

साथ ही वह कई मौकों पर मोदी सरकार के फैसलों पर अपना अलग रुख भी जता चुके हैं. इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक जहां एक ओर रामनाथ कोविंद ने नोटबंदी का समर्थन किया था. वहीं त्रिपाठी ने कहा था कि शुरूआत में लोगों को इससे तकलीफ उठानी होगी.

बिहार के राज्यपाल के रूप में उनके नए कार्यकाल पर सबकी नजर होगी क्योंकि नीतीश सरकार का बीजेपी के साथ संबंध लगातार खट्टा-मीठा रहा है. हालांकि रामनाथ कोविंद के कार्यकाल के दौरान बिहार सरकार और राज्यपाल के बीच संबंधों में लगातार सुधार हुए. नीतीश कुमार के साथ उनके संबंध अच्छे बताए जाते हैं.

कोविंद अपने कार्यकाल के नीतीश सरकार पर बेवजह किसी टिपण्णी से बचते रहे और इस दौरान उन्होंने मीडिया से भी दूरी बनाए रखी. अब उनके जाने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और राज भवन के बीच किस तरह के रिश्ते रहते हैं.

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