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जम्मू-कश्मीर में चारागाहों की जमीनें सुरक्षित करने के लिए कानून बनाए सरकार: टीआरसीएफ

गुज्जर शोधकर्ता जावेद राही की अध्यक्षता वाले टीआरसीएफ ने राज्य में रोशनी कानून के तहत प्रभावशाली लोगों को जमीनें दिए जाने की जांच कराने की भी मांग की है

Bhasha Updated On: Jul 15, 2018 08:30 PM IST

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जम्मू-कश्मीर में चारागाहों की जमीनें सुरक्षित करने के लिए कानून बनाए सरकार: टीआरसीएफ

रविवार को गुज्जर और बकरवाल जनजातीय समुदायों के एक संगठन ने जम्मू कश्मीर में चारागाह की जमीनों के तेजी से कम होने पर चिंता जताई है. साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से इनके संरक्षण के लिए कानून बनाने की मांग की है.

गुज्जर शोधकर्ता जावेद राही की अध्यक्षता वाले टीआरसीएफ ने राज्य में रोशनी कानून के तहत प्रभावशाली लोगों को जमीनें दिए जाने की जांच कराने की भी मांग की है. साल 2001 में बने रोशनी कानून का मकसद सरकारी जमीन के कब्जाधारियों को उसका मालिकाना हक देकर 25,000 करोड़ रुपए इकट्ठा करना था. ताकि इस धन का इस्तेमाल बिजली के क्षेत्र में किया जा सके.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना से सरकार को 78.74 करोड़ रुपए मिले जिसमें कश्मीर से 54 करोड़ और जम्मू से 24 करोड़ रुपए मिले. टीआरसीएफ ने कहा कि चारागाहों की जमीनों के इस्तेमाल का उद्देश्य बदले जाने से जनजातीय समुदायों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है. उनका कहना है कि यह गुज्जरों और बकरवालों की प्रवासी संस्कृति और जीने के खानाबदोश तौर तरीकों के लिए नुकसानदेह है.

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