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ट्राई के नए नियम: मानक से ज्यादा कॉल ड्रॉप्स पर 10 लाख तक का जुर्माना

अगर कोई ऑपरेटर लगातार 9 महीनों तक कॉल ड्रॉप के लिए तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उस पर कार्रवाई होगी

Bhasha Updated On: Aug 18, 2017 09:59 PM IST

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ट्राई के नए नियम: मानक से ज्यादा कॉल ड्रॉप्स पर 10 लाख तक का जुर्माना

ट्राई ने कॉल ड्रॉप पर रोक लगाने के लिए शुक्रवार को कड़े दिशानिर्देश जारी किए.

इन दिशानिर्देशों के तहत अगर कोई ऑपरेटर लगातार 9 महीनों तक कॉल ड्रॉप के लिए तय मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उस पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा.

ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने नई दिल्ली में कहा, 'हमने कॉल ड्रॉप के मामले में एक से पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव किया है. यह ग्रेडेड जुर्माना प्रणाली है जो किसी नेटवर्क के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी.'

ट्राई के कार्यवाहक सचिव एस के गुप्ता ने कहा कि अगर कोई ऑपरेटर लगातार 3 तिमाहियों में कॉल ड्रॉप के मानकों को पूरा करने में फेल हो जाता है तो जुर्माना राशि 1.5 गुना बढ़ जाएगी और लगातार तीसरे महीने में यह दोगुनी हो जाएगी. हालांकि, अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये तक रहेगा.

'आरएलटी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कॉल ड्राप छुपाने को होता है'

शर्मा ने कहा, 'कॉल ड्रॉप को मापने को लेकर कई मुद्दे हैं. औसत से कई चीजें छिप जाती हैं. नए नियमों के तहत हम किसी नेटवर्क के अस्थायी मुद्दे पर भी ध्यान देंगे और साथ ही नेटवर्क के फैलाव को भी देखेंगे.'

संशोधित नियमों के तहत किसी दूरसंचार सर्किल में 90 प्रतिशत मोबाइल साइटें 90 प्रतिशत समय तक 98 प्रतिशत तक कॉल्स को आसानी से से संचालित करने में सक्षम होनी चाहिए. यानी कुल कॉल्स में से दो प्रतिशत से अधिक ड्रॉप की श्रेणी में नहीं आनी चाहिए.

किसी खराब स्थिति या दिन के व्यस्त समय में एक सर्किल के 90 प्रतिशत मोबाइल टावरों पर कॉल ड्रॉप की दर तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. ट्राई ने रेडियो लिंक टाइम आउट टेक्नोलॉजी (आरएलटी) के लिए भी मानक तय किए हैं. कथित रूप से इसका इस्तेमाल टेलिकॉम ऑपरेटरों द्वारा कॉल ड्रॉप को छुपाने के लिए किया जाता है.

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