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आदिवासी कल्याण के नाम पर चल रहा था लड़कियों की तस्करी का धंधा, सीएम तक थी पहुंच

दिल्ली के शकरपुर में प्रभा और उसके पति एक प्लेसमेंट एजेंसी चलाते हैं. इस प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए वो लड़कियों को नौकरी को दिलाती थी. प्रभा अपने द्वारा नौकरी दिलाई गई लड़कियों की सैलेरी अपने पास रख लेती थी

Updated On: Sep 25, 2018 04:01 PM IST

FP Staff

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आदिवासी कल्याण के नाम पर चल रहा था लड़कियों की तस्करी का धंधा, सीएम तक थी पहुंच

प्रभा मुनी का नाम दिल्ली में आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करने की वजह से राजनीतिक गलियारों तक में जाना जाने लगा था. यहां तक की प्रभा मुनी ने चुनाव लड़ने की भी पूरी तैयारी कर ली थी. लेकिन जब इनके समाज सेवा की सच्चाई सामने आई तो सभी हैरान रह गए. प्रभा ने झारखंड और छत्तीसगढ़ से 150 लड़कियों की तस्करी कर उन्हें बंधुआ मजदूर के तौर पर बेच दिया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक जांच में सामने आया है कि दिल्ली के शकरपुर में प्रभा और उसके पति एक प्लेसमेंट एजेंसी चलाते हैं. इस प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए वो लड़कियों को नौकरी को दिलाती थी. प्रभा अपने द्वारा नौकरी दिलाई गई लड़कियों की सैलेरी अपने पास रख लेती थी और उन्हें धमकाती थी कि अगर किसी ने पैसे मांगे तो गांव में रह रहे उनके परिवार वालों के लिए बुरा होगा. जिन लड़कियों ने विरोध किया उन्हें मारा पीटा गया और उन्हें एक कमरे में बंद करके रखा गया. प्रभा मुनी पर झारखंड पुलिस ने 25000 रुपए का इनाम भी रखा गया.

डीसीपी (वेस्ट) मोनिका भारद्वाज ने कहा जांचकर्ताओं को प्रभा ने बताया कि जब प्रभा अपने पति रोहित मुनी से मिली थी तब वो प्लेसमेंट एजेंसी चलाता था. 2013 में उनकी शादी के बाद प्रभा उसी एजेंसी में एजेंट की तरह काम करने लगी. वे लोग द्वारका और पश्चिमी दिल्ली के घरों में लोगों को घरेलु सहायक मुहैया कराते थे. वे लोग लड़कियों को बढ़िया खाना, नौकरी और पैसे का लालच देते थे. इसके बाद लड़कियों को दिल्ली लाया जाता था और कोठियों के मालिकों से कमीशन लेकर उन लड़कियों को वहां रखवा दिया जाता था. प्रभा ने दावा किया कि वो लड़कियों की सैलरी खुद ले लेती थी क्योंकि वो लड़कियां पढ़ी लिखी नहीं थी और इसलिए वो अपने पैसे सही से मैनेज नहीं कर पाती थी.

प्रभा का पति रोहित मुनी, शीला दीक्षित के साथ... फोटो- रोहित के फेसबुक वॉल से

प्रभा का पति रोहित मुनी, शीला दीक्षित के साथ... फोटो- रोहित के फेसबुक वॉल से

एनजीओ के नाम पर बनाई राजनीतिक पहचान:

2014 में प्रभा ने बेघर लोगों के लिए एनजीओ स्थापित किया लेकिन उसका रजिस्टर नहीं कराया. जल्दी ही वो आदिवासियों के वेलफेयर के नाम पर कार्यक्रम भी आयोजित करने लगे जिसमें नेता भी शामिल होते. हालांकि 2017 में जब कुछ लड़िकयों को बचाया गया तभी प्रभा का नाम संदिग्धों में शामिल हो गया था. लेकिन प्रभा को यकीन था कि राजनेताओं से प्रगाढ़ संबंध के कारण उसे और उसके पति को कुछ नहीं होगा. लेकिन जब जांचकर्ताओं को कई लड़कियों ने दंपत्ति के अत्याचार के बारे में बताया तो फिर उन पर शिकंजा कसा गया. कोर्ट ने भी पीड़िता लड़कियों के बयान के आधार उसे भगोड़ा घोषित कर दिया.

लेकिन इतने के बावजूद भी प्रभा ने हाल ही में झारखंड के सिमडेगा ने लड़की की तस्करी की. लड़की के माता ने जब स्थानीय पुलिस से संपर्क किया तो अपहरण का केस दर्ज किया गया. इसके बाद लड़की को कुछ दिनों के अंदर ही खोज निकाला गया और बचा लिया गया. दंपत्ति लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे जिसकी वजह से पुलिस की चंगुल से वो बच रहे थे लेकिन रविवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया.

 

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