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पत्थरबाजों को संगठित करने के लिए हुआ 300 वाट्सऐप ग्रुप्स का इस्तेमाल

इंटरनेट सुविधाओं पर रोक लगने से पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई.

Updated On: Apr 24, 2017 09:42 AM IST

FP Staff

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पत्थरबाजों को संगठित करने के लिए हुआ 300 वाट्सऐप ग्रुप्स का इस्तेमाल

कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है. आएदिन सुरक्षा बलों को कश्मीरी लोगों के पत्थरों का शिकार होना पड़ रहा है. पत्थरबाजी की घटनाओं में सीमापार से मदद मिलने की खबरें आती रही हैं. अब इसमें तकनीक के इस्तेमाल की खबरें भी आ रही हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया पर पीटीआई के हवाले से छपी खबर के मुताबिक, कश्मीर में पत्थरबाजों को संगठित करने के लिए करीब 300 वाट्सऐप ग्रुप्स का इस्तेमाल किया गया है.

Kashmir Killing

(फोटो: पीटीआई)

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुठभेड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में बाधा पैदा करने के लिए पत्थरबाजों को वाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए संगठित किया गया. इस तरह के हर एक वाट्सऐप ग्रुप में करीब 250 सदस्य हैं. हमने ग्रुप्स और उनके एडमिन्स की पहचान कर ली है. जिन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था. पिछले तीन हफ्तों में इस तरह के 90 फीसदी वाट्सऐप ग्रुप्स बंद किए जा चुके हैं.

Kashmir

अधिकारी ने बताया की सरकार के इंटरनेट सुविधाओं पर रोक लगाने के फैसले से पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है. इंटरनेट सुविधाएं न होने की वजह से भीड़ को संगठित कर पाना नामुमिक सा हो गया है. जबकि पहले सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में बाधा पैदा करने वाले पत्थरबाजों की भीड़ 10 किलोमीटर पहले ही दिख जाती थी. हालांकि इंटरनेट पर रोक लगने से आम आदमी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

Kashmir-Police

स्टॉक मार्केट में काम करने वाले एक शख्स का कहना है कि आज बिजनेस वार्ता के लिए इंटरनेट पर निर्भर है. सोमवार को जबतक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल नहीं हुई तब तक मेरा बिजनेस ठप पड़ा रहा.

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