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प्रदूषण से बचने के लिए पराली का भूसा और खाद बनाने का सुझाव

किसानों ने यह स्वीकार किया कि पराली जलाना, अगली फसल के लिए खेत तैयार करने की उनकी तात्कालिक मजबूरी है

Bhasha Updated On: Nov 12, 2017 05:07 PM IST

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प्रदूषण से बचने के लिए पराली का भूसा और खाद बनाने का सुझाव

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पराली के बहुद्देशीय उपयोग की कार्ययोजना पर काम कर रहा है. पंजाब में फसल कटने के बाद पराली जलाए जाने के धुंए से दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या बढ़ गई है.

नीति आयोग और सीआईआई की संयुक्त रिपोर्ट में पराली के व्यवसायिक और घरेलू इस्तेमाल की कार्ययोजना पेश की गई है. पर्यावरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ए. के. मेहता की अगुवाई में नीति आयोग और सीआईआई के संयुक्त कार्यबल ने इस बाबत कार्ययोजना पेश की है.

पराली को जलाने से किसानों को रोकने के लिए दो उपयोग सुझाए गए हैं. पहला, पराली का भूसा बनाकर इसका व्यवसायिक इस्तेमाल करने और दूसरा, पराली से खाद बना कर किसानों को इस्तेमाल के लिए वितरित करना बेहतर तरीके हैं.

इस साल जून तक चले अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल फसल की कटाई से 60 करोड़ टन फसल अवशेष निकलता है. इसमें पंजाब में हर साल धान की पराली की हिस्सेदारी दो करोड़ टन है.

अतुल अंजान की अगुवाई में दौरा कर समिति ने दिया है रिपोर्ट 

भारतीय किसान सभा के महासचिव अतुल अंजान की अगुवाई में किसानों के समूह ने पंजाब का दौरा कर किसानों के सहयोग से ही इस समस्या के समाधान निकालने की पहल की.

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उन्होंने इस रिपोर्ट से इत्तेफाक जताते हुए कहा कि पंजाब में धान की अक्तूबर में कटाई के बाद किसानों के पास गेंहू की बुआई के लिए महज दो सप्ताह का समय बचता है.

पराली को कटाने पर किसान को समय और पैसे का दोहरा नुकसान होता है. ऐसे में किसान के पास धान की पराली के तत्काल निपटने के लिए एकमात्र विकल्प इसे जलाना ही बचता है.

अगर कटाई होने लगेगी तो इससे पंजाब में बेरोजगार बैठे लाखों खेतिहर मजदूरों से किसान पराली की कटाई करा सकेंगे. इसका दोहरा लाभ, बेरोजगारी और पर्यावरण संकट के समाधान के रूप में होगा.

किसान जानते हैं पराली जलाने से उन्हीं का हो रहा है नुकसान 

किसानों ने यह स्वीकार किया कि पराली जलाना, अगली फसल के लिए खेत तैयार करने की उनकी तात्कालिक मजबूरी है.

किसान इस बात से वाकिफ हैं कि जली हुई पराली की राख दीर्घकाल में मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को कम करती है. रिपोर्ट में फसल अवशेष के आर्थिक और वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए सरकार और उद्योग जगत की साझा पहल को जरूरी बताया गया है.

इसके लिए दो सूत्रीय कार्ययोजना भी पेश की गयी है. पहला, रासायनिक, ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां सामूहिक स्तर पर किसानों से पराली की कटाई कर एकत्र करने के बाद इसका औद्योगिक इस्तेमाल करें.

दूसरा उपाय छोटे या मझोले किसान पराली को खेत की जुताई करते हुए मिट्टी में ही दबा रहने दें जिससे यह खाद बन कर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाएगी.

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