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जज लोया टाइमलाइन: क्या आप जानते हैं कब क्या हुआ?

जज लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सुनवाई कर रहे थे, उसी बीच हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई , उनकी मौत के बाद पढ़िए कब-कब क्या हुआ

Updated On: Apr 19, 2018 05:32 PM IST

FP Staff

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जज लोया टाइमलाइन: क्या आप जानते हैं कब क्या हुआ?

B.H. Loya स्पेशल सीबीआई जज लोया की मौत की जांच एसआईटी नहीं करेगी. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने के बाद जज लोया का मामला एकबार फिर सुर्खियों में है. जज लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सुनवाई कर रहे थे. जज लोया की मौत के बाद कब-कब क्या हुआ, देखिए एक नजर में.

1 दिसंबर 2014

नागपुर में जज लोया को हार्ट अटैक आया. यहां वह अपने एक सहयोगी की बेटी की शादी में गए थे.

नवंबर 2017

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब लोया की बहन ने उनकी मौत को संदिग्ध बताया. वह इसे सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले से जोड़ रही हैं.

11 जनवरी 2018

सुप्रीम कोर्ट लोया की मौत की स्वतंत्र जांच कराने वाली दो याचिका पर सुनवाई करने पर राजी हुई.

12 जनवरी 2018

सुप्रीम कोर्ट ने लोया की संदिग्ध मौत को ‘गंभीर मामला’ बताते हुए महाराष्ट्र सरकार की प्रतिक्रिया मांगी.

16 जनवरी 2018

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, महाराष्ट्र सरकार यह फैसला ले सकती है कि याचिकाकर्ता को लोया की मौत से जुड़े क्या दस्तावेज सौंपे जाएंगे.

22 जनवरी 2018

लोया का मौत पर दायर याचिका में इस मामले को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट से दो याचिकाओं को अपने पास (सुप्रीम कोर्ट) में ट्रांसफर करा लिया.

31 जनवरी 2018

पूर्व नेवी चीफ एडमिरल (रिटायर्ड) एल रामदास सुप्रीम कोर्ट गए. वह सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जजों और पूर्व पुलिस अधिकारियों के पैनल में इंडिपेंडेंट जांच की मांग कर रहे थे.

2 फरवरी 2018

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वह सिर्फ लोया की मौत को लेकर चिंतित है. हम सोहारबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में अमित शाह की रिहाई सहित किसी भी दूसरे मुद्दे से इसे जोड़ना नहीं चाहते हैं.

5 फरवरी 2018

मुंबई के वकीलों के एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर 11 लोगों की दोबारा जांच कराने की मांग की. इनमें 2 जज भी शामिल थे.

9 फरवरी 2018

महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रही याचिका का विरोध किया और इसे ‘मोटिवेटेड’ और ‘येलो जर्नलिज्म’ बताया.

12 फरवरी 2018

महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने उन चार जजों के बयान लेने को कहा जो लोया के जीवन के आखिरी दिन उनके साथ थे और जिन लोगों ने उनकी मौत को ‘नेचुरल’ बताया था.

19 फरवरी 2018

सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह जज लोया के मामले को गंभीरता से हैंडल कर रहे हैं. इसी दिन याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनपर केस छोड़ने का दबाव बन रहा है.

5 मार्च 2018

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट का रोस्टर बदलना एक रूटीन है. इसलिए हाईकोर्ट में सोहराबुद्दी शेख मामले की सुनवाई में जज बदलने पर सवाल नहीं उठाना चाहिए.

8 मार्च 2018

वरिष्ठ वकीलों ने जज पर आरोप लगाया कि वह लोया मामले के सामने लाने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है, महाराष्ट्र सरकार से नहीं.

9 मार्च 2018

महाराष्ट्र सरकार पर जज को धमकाने सहित कई तरह के आरोप लगाए गए. जज लोया मामले में कुछ एक्टिविस्ट वकीलों का कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया और न्याय से जुड़े अधिकारियों को इस तरह की चीजों से बचना चाहिए.

9 मार्च 2018

इस मामले में शामिल एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन का कहना है कि लोया की छाती में दर्द था, जिससे आशंका बढ़ी है कि उन्हें जहर दिया गया है.

12 मार्च 2018

मुंबई में वकीलों के एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह बॉम्बे हाई कोर्ट का एक ऑर्डर पेश किया, जिसमें कहा गया था कि लोया मामले में फैसला देने वाले दो जजों में से एक ने 2014 में बीजेपी के नेता के खिलाफ एक आपराधिक मामले को सेटल करने का फैसला दिया था.

16 मार्च 2018

सुप्रीम कोर्ट ने लोया मामले में जांच की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है.

19 अप्रैल 2018

सुप्रीम कोर्ट ने लोया मामले की स्वतंत्र जांच कराने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले को स्कैंडल बनाने की कोशिश की जा रही है. इस याचिका में बॉम्बे हाई कोर्ट के जजों पर अधिकारियों की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है.

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