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बेंजामिन नेतन्याहू का भारत दौरा: पीएम मोदी अगर क्रांतिकारी नेता हैं तो वो किस तरह की क्रांति ला रहे हैं?

इजरायली प्रधानमंत्री ने पिछले हफ्ते मोदी को कहा था कि वो क्रांतिकारी नेता हैं. वो देश में क्रांति ला रहे हैं और भारत को आगे ले जा रहे हैं

Aakar Patel Updated On: Jan 22, 2018 01:57 PM IST

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बेंजामिन नेतन्याहू का भारत दौरा: पीएम मोदी अगर क्रांतिकारी नेता हैं तो वो किस तरह की क्रांति ला रहे हैं?

'आप एक क्रांतिकारी नेता हैं और आप भारत में क्रांति ला रहे हैं. आप इस शानदार देश को भविष्य में ले जा रहे हैं.' यह बात पिछले हफ्ते इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कही.

इसका क्या मतलब हो सकता है? मेरे शब्दकोश में क्रांति का अर्थ बताया गया है, 'संपूर्ण या नाटकीय परिवर्तन करना या इसमें शामिल होना.' आमतौर पर ऐसा परिवर्तन जो एक क्रांतिकारी चाहता है, स्थापित व्यवस्था के खिलाफ एक तरह की बगावत होती है, खासकर सरकार के खिलाफ. चूंकि नेतन्याहू भारत को शानदार (यह जानना रोचक होगा कि वो ऐसा क्यों सोचते हैं) भी कह रहे हैं, यह मान लेना सुरक्षित होगा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि मोदी इस व्यवस्था को उखाड़ फेंकने का प्रयास कर रहे हैं. तो आखिर वह कहना क्या चाहते हैं? मैं सच में नहीं जानता और अंदाजा लगाना नहीं चाहता. एक लम्हे के लिए, इस सच्चाई को एक तरफ रख दें कि नेतन्याहू यहां जरा सी तारीफ पर पिघल जाने वाले एक ग्राहक को हथियार बेचने आए हैं.

एक तरह से यह बिल्कुल सच है कि मोदी स्थापित व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उपाय कर रहे हैं. लेकिन यह बदलाव है क्या? मैं कहूंगा यह सुधार है, लेकिन उन अर्थों में नहीं जिन अर्थों में आमतौर पर ‘क्रांतिकारी’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.

स्वच्छ भारत की क्रांति?

मैं मोदी की एक खास पहल, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से इसकी तस्वीर उकेरने की कोशिश करता हूं. पाठकों को याद होगा कि किस तरह प्रधानमंत्री ने हाथों में झाड़ू थाम कर सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते हुए इसे लांच किया था और दूसरों को भी ऐसा करने और इसके बारे में ट्वीट करने के लिए प्रोत्साहित किया था.

उनकी वेबसाइट स्वच्छ भारत अभियान के मकसद के बारे में बताती हैः 'एक साफ-सुथरा भारत, महात्मा गांधी को 2019 में उनके 150वें जन्मदिवस पर सबसे अच्छी श्रद्धांजलि है, जो देश उनको दे सकता है… स्वच्छता के लिए जन आंदोलन की अगुवाई करते हुए प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के स्वच्छ और स्वास्थ्यकारी भारत के सपने को पूरा करने का लोगों से आह्वान किया.' श्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में सफाई अभियान की खुद शुरुआत की थी. गंदगी साफ करने के लिए खुद झाड़ू उठा कर स्वच्छ भारत अभियान को देशभर में एक जन आंदोलन बनाते हुए पीएम ने कहा कि लोगों को ना गंदगी फैलानी चाहिए ना दूसरों को ऐसा करने देना चाहिए. उन्होंने लोगों को मंत्र दिया ‘ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे.’

swachhta hi seva

अपने शुरुआती भाषण में मोदी ने साफ, सफाई, कूड़ा और कूड़ा फैलाना शब्द का 21 बार इस्तेमाल किया. शब्द ‘शौचालय’ और ‘सफाई’ उस लाइन में एक बार आया जब मोदी कहते हैं, 'एक साथ स्वास्थ्य समस्या का समाधान करती है जिसका घरों में उचित शौचालय के अभाव में अनुमानतः आधे भारतीय परिवारों को सामना करना पड़ता है.'

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क्या व्यवहार में बदलाव चाहते हैं मोदी?

यह करीब-करीब पूरी तरह उधार लिया गया विचार है, क्योंकि यह पूर्व के कार्यक्रमों का विस्तार है, और इस कारण मोदी के लिए कम आकर्षक होना चाहिए था. गंदगी आंखों को चुभती है, और काफी हद तक सौंदर्यबोध में चिढ़ पैदा करने वाली है. यह सेनिटेशन (स्वास्थ्य रक्षा) जैसा राष्ट्रीय संकट (हमारे 38 फीसद बच्चे दो साल की उम्र में ही अविकसित रह जाते हैं, जिससे उनको बौद्धिक या शारीरिक जीवन पूरा करने का कोई मौका ही नहीं मिलता) नहीं है. लेकिन मोदी का ध्यान और आह्वान कूड़ा फैलाने पर है, क्योंकि जो वो हासिल करना चाहते हैं, वह यह है कि हर भारतीय नागरिक के चरित्र में बदलाव आए, क्योंकि उन्हें लगता कि व्यवहार में बदलाव जरूरी है.

आंतरिक कायांतरण. इस किस्म के सुधार आमतौर पर आध्यात्मिक और धार्मिक गुरुओं द्वारा किए जाते हैं. यह लोकलुभावन राजनीति के दायरे में नहीं आता.

ठीक इसी तरह इसी प्रवृत्ति के साथ सामाजिक सुधार के लिए नोटबंदी के सनक भरे फैसले की प्रेरणा को भी समझा जा सकता है. भारतीयों को काले धन की लत छुड़ानी ही पड़ेगी और इसका तरीका उनको व्यावहारिक बदलाव के लिए मजबूर करके और उनकी नकदी छीन लेना है. यह आखिर में कारआमद होता है या नहीं, यह लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है या नहीं, लोग उनकी गलाकाट नीतियों के वार से वास्तव में मरते हैं या नहीं, विशेषज्ञ बाद में इन सब पर गहराई से चर्चा करेंगे. मोदी को अपना काम करना चाहिए जिससे कि वो लोगों पर जोर (मजबूर कर सकेंगे) लगा सकेंगे कि वह सही काम करें, या जिसे वह सही समझते हैं. यह पितातुल्य शख्स, जो कि उनकी लोकप्रियता को देखते वह कई अर्थों में बन चुके हैं, के सुधार हैं.

PM Modi

प्रधानमंत्री या समाज सुधारक?

बॉलीवुड के निर्देशक मधुर भंडारकर ने हाल ही में एक लेख (जब एक प्रधानमंत्री बन गया समाज सुधारक) लिखा है, जिसमें इन्हीं पहलुओं को उठाया गया है. वह लिखते हैंः 'ऐसे कई उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि हमारा समाज कैसे एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है. बड़ी संख्या में लोगों का योगा करना, वीआईपी संस्कृति खत्म करने के लिए लाल बत्ती हटा देना, दिव्यांगों के लिए खास योजना और लोगों का उनकी जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनना, फॉर्म/प्रमाणपत्र राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित कराने की औपचारिकता खत्म करना, लोगों को खुद की खाद तैयार करने के लिए प्रेरित करना- ये सारी बातें छोटी शुरुआत लग सकती हैं, लेकिन इनका असर व्यापक है.'

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क्या ये ऐसी चीजें हैं, जिन पर भारत के प्रधानमंत्री को ध्यान देना चाहिए, मैं फिलहाल यहां इस पर ध्यान नहीं देना चाहता. मुद्दा यह है कि ये सामाजिक बदलाव हैं, जिन पर उन्होंने हमारा ध्यान खींचा है. कई बार उन्होंने माना है कि उनसे गलती हो गई या जल्दबाजी हुई. आज स्वच्छ भारत वेबसाइटें, जिनमें एक शहरी केंद्रों के लिए भी है, शौचालय और सेनिटेशन के बारे में, हालांकि ये बहुत कम ही हैं, प्रमुखता से बता रही हैं.

नेतन्याहू की तारीफ के जवाब में मोदी ने कहा, 'मेरे बारे में कहा जाता है कि मैं नतीजे देखने के लिए अधीर रहता हूं और यही बात आपके बारे में भी कही जाती है.' हम आशा कर सकते हैं कि हमें सुधारों का यह सिलसिला चलता रहेगा.

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