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गुजरात में टाइगर जिंदा है... 28 साल बाद फिर सुनने को मिल रहा 'वाघ आयो'

1992 के बाद से बाघ कभी भी गुजरात में नहीं देखे गए. लेकिन अब 28 साल बाद एक बार फिर लगता है, गुजरात में 'शेर खान' की एंट्री हो गई है

Updated On: Feb 11, 2019 05:01 PM IST

Subhesh Sharma

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गुजरात में टाइगर जिंदा है... 28 साल बाद फिर सुनने को मिल रहा 'वाघ आयो'

Tiger Zinda hai ! यहां ये बात बॉलीवुड स्टार सलमान खान के लिए नहीं बल्कि जंगल के राजा 'टाइगर' के लिए हो रही है और वो भी गुजरात से गायब हो चुके टाइगर के लिए. क्योंकि बहुत जल्द गुजरात में पुरानी कहावत... 'वाघ आयो, वाघ आयो' फिर से सुनने को मिलने वाली है.

गुजरात किसी समय देश का इकलौता ऐसा राज्य था, जहां तीनों बड़ी बिल्लियां यानी टाइगर (बाघ), लैपर्ड (तेंदुआ), लॉयन (बब्बर शेर) पाए जाते थे. लेकिन अंधाधुंध शिकार और सही संरक्षण न मिलने के कारण बाघ भारत के जंगलों से गायब होते गए. 1992 के बाद से बाघ कभी भी गुजरात में नहीं देखे गए. लेकिन अब 28 साल बाद एक बार फिर लगता है, गुजरात में 'शेर खान' की एंट्री हो गई है. गुजरात के डांग बार्डर के पास टाइगर की झलक देखने को मिली है.

सोशल मीडिया पर वायरल

पेशे से टीचर महेश महेरा ने महीसागर जिले के लुनावाडा तालुक में एक बाघ को सड़क पार करते हुए देखा और उसकी तस्वीरें अपने फोन के कैमरे में भी कैद कर ली. ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं. और वन अधिकारी भी अब बाघ की खोज में सतर्क हो गए हैं. स्थानीय सरकारी स्कूल के टीचर महेश ने बताया कि महीसागर जिले के बोरिया गांव के पास उन्होंने एक बाघ को सड़क पार करते हुए देखा है. ये घटना 6 फरवरी की है. इसके बाद उन्होंने गाड़ी के अंदर से अपने मोबाइल फोन से उसकी फोटो खींची और दोस्तों व सोशल मीडिया पर शेयर की.

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कैमरा ट्रैप्स की ली जा रही मदद

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में पीसीसीएफ अक्षय सक्सेना ने बाघ की मौजूदगी का पता लगाने के लिए सर्च ऑपरेशन के आदेश दिए हैं. साथ ही तस्वीर कितनी सच है, इसका पता लगाने को भी कहा है. उन्होंने कहा है कि हम टाइगर का मल, पग मार्क्स और उसके द्वारा मारे गए जानवरों की तलाश कर रहे हैं. बाघ की तस्वीरों के लिए तीन कैमरा ट्रैप्स भी लगाए गए हैं.

पहले भी आ चुकी है बाघ के होने की खबर

दरअसल ये पहली बार नहीं है, जब गुजरात के डांग बार्डर के पास के जंगलों में टाइगर के दिखने की बात सामने आई हो. पिछले साल नवंबर में डांग बार्डर से महज दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर महाराष्ट्र की सीमा में आने वाले जंगल में एक मेल टाइगर का मल मिला था. इसके अलावा जुलाई, 2017 में भी गुजरात के तापी जिले के निझर गांव में इनसान पर बाघ के हमले की खबर सामने आई थी.

डांग फिर बन सकता है बाघों का घर

डांग में अगर बाघ के होने के संकेत मिल रहे हैं, तो इसे पूरी तरह से झुठलाया नहीं जा सकता है. महाराष्ट्र के बार्डर से सटे इस इलाके में कभी बाघ आजादी से घूमा करते थे. 1979 में पब्लिश हुए एक जरनल 'Cheetal' में कहा गया था कि 1979 में गुजरात में हुए टाइगर सेंसस (बाघों की संख्या का पता लगाना) में राज्य में करीब 13 टाइगर थे और इनमें से करीब 6-7 डांग में पाए जाते थे.

Image source: Wikipedia

Image source: Wikipedia

डांग का जियोग्राफिकल एरिया को देखें तो यहां पुर्णा वाइल्डलाइफ सेंचुरी और वांसदा नेशनल पार्क भी है. ये फॉरेस्ट बेल्ट डांग, तापी और महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले को भी कवर करता है. यहां बड़ी बिल्ली के रूप में लैपर्ड (तेंदुए) का दिखना आमबात है. आपको जानकर हैरानी होगी कि गुजरात में 1989 में 13 टाइगर थे. लेकिन तीन साल बाद ही यहां से टाइगर का नामो निशान मिट गया. मगर एक बार फिर 28 साल बाद बाघ की तस्वीरें सामने आने के बाद ये जगह फिर से बाघ के घर के रूप में अपनी पहचान बना सकती है. इसके लिए लिहाजा हमें एक बात समझनी होगी कि जानवर हैं तो जंगल हैं और जंगल हैं तो हम हैं...

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