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'भारत नैतिक शिक्षा का नेतृत्व करे तो चीन भी उस राह पर चलेगा'

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुरातन नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह आज भी उतना ही उपयोगी है

Updated On: Dec 07, 2017 04:26 PM IST

FP Staff

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'भारत नैतिक शिक्षा का नेतृत्व करे तो चीन भी उस राह पर चलेगा'

82 वर्षीय दलाई लामा ने एक इंटरव्यू में कहा है कि प्राचीन भारतीय संस्कृति द्वारा बताए गए रास्ते पर चल कर आज की दुनिया के गुस्से के अंत किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने कहा कि ताकत से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता.

द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दुनिया में अब तक कई युद्ध हुए हैं, इनसे कुछ वक्त के लिए तो समाधान निकला है लेकिन स्थायी शांति के लिए दुनिया को बातचीत का ही सहारा लेना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए ऐसा किया जा सकता है. भारत के लिए यह कोई नई बात नहीं है. यहां अहिंसा का इतिहास हजारों साल पुराना है. इसी कारण भारत पाकिस्तान से ज्यादा शांतिपूर्ण है.

भारतीय संस्कृति ने मुझे दी ताकत

साथ ही उन्होंने कहा कि इसे कोई पुरातन ज्ञान नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह आज भी उतना ही उपयोगी है. इसने मुझे आत्मबल और इच्छाशक्ति की ताकत बताई. उन्होंने कहा कि अन्य धर्मों में ईश्वर पर निर्भरता की बात कही गई है.

जबकि भारतीय संस्कृति में ईश्वर का स्थान तो है पर हर कार्य करने की जिम्मेदारी आपकी स्वयं है. भारत में मन को प्रशिक्षित करने की बात कही गई है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन जो पारंपरिक रूप से एक बौद्ध देश है उसने भारतीय संस्कृति के रास्ते पर चला है. आज वहां कई लोग तिब्बती बौद्ध धर्म में रुचि दिखा रहे हैं. अगर भारत नैतिकता के बारे में धर्मनिरपेक्ष शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाता है तो चीन भी उसका अनुसरण करेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि चीन को तिब्बत के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए. साथ ही उन्हें हमारी संस्कृति का सम्मान करना चाहिए.

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