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आप के तीन साल: क्या अब भी दिल्ली के दिल में बसे हैं केजरीवाल?

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार आगामी 14 फरवरी को तीन साल पूरा करने जा रही है

Updated On: Jan 29, 2018 08:24 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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आप के तीन साल: क्या अब भी दिल्ली के दिल में बसे हैं केजरीवाल?

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार आगामी 14 फरवरी को तीन साल पूरा करने जा रही है. सरकार के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली के कई इलाकों में जश्न की तैयारी चल रही है. लेकिन, इस जश्न से ठीक पहले एक रिपोर्ट ने आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रातों की नींद छीन ली है.

आम आदमी पार्टी अभी 20 विधायकों की सदस्यता खत्म होने से उबर भी नहीं पाई थी कि एक और खबर ने पार्टी नेताओं की नींद गायब कर दी है. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर कहा जा सकता है कि साल 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत की संभावना न के बराबर है.

इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि राष्ट्रपति द्वारा अयोग्य ठहराए गए विधायकों को उनके ही निर्वाचन क्षेत्रों में सहानुभूति नहीं मिल रही है. राष्ट्रपति द्वारा अयोग्य ठहराए गए सभी विधायक जनता का नब्ज भांपते हुए उपचुनाव में जाने से बच रहे हैं. जानकारों का मानना है कि पिछले पांच सालों में यह पहला मौका है जब पार्टी में विवाद होने के बाद जनता की तरफ से भी पार्टी को सहानुभूति नहीं मिल रही है.

जानकारों की राय में हाल के दिनों में पार्टी में घटित कुछ घटनाक्रमों से जनता के बीच अरविंद केजरीवाल की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है. अभी कुछ दिन पहले ही दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों को लेकर पार्टी में काफी बवाल कटा था. पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक कवि कुमार विश्वास ने खुलकर पार्टी नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. कुमार विश्वास प्रकरण अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि 20 विधायकों की अयोग्य ठहराए जाने की खबर आ गई. इस खबर ने पार्टी की मुसीबत और बढ़ा दी.

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कुल मिलाकर पिछले कुछ दिनों से ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी में और खासकर अरविंद केजरीवाल के लिए कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है. अधिकांश मीडिया संस्थानों के द्वारा भी आम आदमी पार्टी और उनके नेताओं को कोई खास तवज्जो नहीं दी जा रही है.

कुछ ऐसे पत्रकार भी जो पहले कभी आम आदमी पार्टी के लिए सॉफ्ट रहा करते थे, वे भी धीरे-धीरे से आम आदमी पार्टी से किनारा करने लगे हैं. पार्टी के अंदर से जिस तरह से कलह लगातार निकल रही है, उससे पार्टी की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है. खासकर पिछले कुछ दिनों में पार्टी द्वारा लिए गए कुछ फैसलों के कारण पार्टी को काफी नुकसान पहुंचा है.

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कुछ साल पहले तक कहा जाता था कि आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी स्वच्छ छवि को लेकर बेहद सतर्क रहा करते थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल के पिछले कुछ फैसलों ने उनकी स्वच्छ छवि पर बदनुमा दाग लगाने का काम किया है.

पार्टी के ही कुछ नेताओं ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा है कि पिछले एक-दो सालों से केजरीवाल लगातार गलत पर गलत फैसले लिए जा रहे हैं. इससे पार्टी को काफी नुकसान पहुंच रहा है. पार्टी कैडर में ठीक संदेश नहीं जा रहा है. हमलोगों को पार्टी कार्यकर्ताओं को जवाब देना मुश्किल हो गया है.

अभी हाल ही में दिल्ली में तीन राज्यसभा सीटों के लिए जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की राय को अनदेखी की गई, वह भी अपने आप में पार्टी की जमीनी नेताओं की हकीकत बयां कर रही हैं. दिल्ली की आम जनता खासकर बुद्धिजीवी वर्गों में भी 'आप' को लेकर जो व्याकुलता पहले हुआ करती थी, अब वह दिखाई नहीं दे रही है. कुछ लोगों को मानना है कि लाभ के पद पर जिन 20 विधायकों की सदस्यता गई है, वह भी चुनाव में दोबारा से नहीं जाना चाहते हैं. यही कारण है कि पार्टी उपचुनाव से बचना चाह रही है.

पिछले कुछ दिनों में बेशक पार्टी ने इस मामले को लेकर हमला तेज कर दिया है, लेकिन, पार्टी यह भी जानती है कि अगर आज चुनाव हुए तो उसे सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए आम आदमी पार्टी 20 विधायकों की सदस्यता को कोर्ट कचहरी में उलझा कर लंबा खींचना चाह रही है.

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चार दिन पहले ही यानी पिछले शुक्रवार को ही आम आदमी पार्टी के 'अयोग्य' विधायकों को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली थी. जो थोड़ी बहुत राहत मिली भी थी वह यह थी कि हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से सोमवार तक यानी 29 जनवरी तक 20 विधानसभा सीटों के उपचुनाव की घोषणा नहीं करने को कहा था. हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति के उस आदेश पर भी कुछ नहीं कहा है, जिसमें राष्ट्रपति ने एक नोटिफिकेशन के जरिए 20 विधायकों को 'अयोग्य' ठहरा दिया था.

Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट

सोमवार को एक बार फिर से इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि हमलोगों पर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला किसी भी तरह से नहीं बनता है. जानबूझ कर हमलोगों को फंसाया गया है. सोमवार को हाईकोर्ट ने मामला डबल बेंच में ट्रांसफर कर दिया है.

आम आदमी पार्टी की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग ने 20 विधायकों को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया. 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में आप विधायकों की संख्या 66 से घटकर अब 46 हो गई है. अब अगर दिल्ली हाईकोर्ट उपचुनाव कराने के रोक को हटा लेती है तो आने वाले दिनों में दिल्ली में 20 विधानसभा के उपचुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा.

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