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इन मांगों के साथ मुंबई पहुंच रहा है तीस हजार किसानों का जत्था

सोमवार सुबह से राज्य विधानसभा की ओर बढ़ेंगे जहां सत्र चल रहा होगा, इसके बाद किसान विधानसभा का घेराव करेंगे

FP Staff Updated On: Mar 10, 2018 10:19 PM IST

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इन मांगों के साथ मुंबई पहुंच रहा है तीस हजार किसानों का जत्था

महाराष्ट्र के नासिक से निकला करीब 30 हजार किसानों का जत्था मुंबई से सटे ठाणे पहुंचने वाला है. ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के बैनर तले किसानों का यह समूह कर्जमाफी की मांग को लेकर लंबे दिनों से आंदोलन पर है.

किसानों के इस जत्थे ने 5 मार्च को 180 किलोमीटर की यात्रा के लिए सेंट्रल नासिक के सीबीएस चौक से कूच शुरू किया था. हर रोज 30 किलोमीटर पदयात्रा करते इन किसानों की योजना 12 मार्च को मुंबई में महाराष्ट्र विधानसभा घेरने की है.

इस प्रदर्शन में महाराष्ट्र, विदर्भ, मराठावाड़ा, खानदेश के किसान ही नहीं बल्कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों से आए आदिवासी भी शामिल हैं.

राज्य सरकार ने अब तक इस रैली के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुंगंतीवार ने कहा कि सरकार किसानों के मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों के कर्ज भी माफ किए जा रहे हैं.

किसान सोमवार को घेरने जा रहे हैं विधानसभा को 

रैली में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) की रैली में हजारों किसान शामिल हुए हैं. एआईकेएस के सुनील मालुसरे ने बताया कि यह रैली रविवार को मुंबई पहुंच जाएगी और सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा का घेराव करेगी.

किसान सभा के नेता अशोक धौले ने कहा, 'अब बहुत हो गया. हमारा संयम टूट गया है. हमने पिछले साल भी हमने यहीं मांगे रखी थी, लेकिन सरकार को हमारी मांगों को सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. हम तब तक हार नहीं मानेंगे जब तक सरकार हमारी मांग नहीं सुनेगी. हम विधानसभा का घेराव करने जा रहे हैं.'

सोमवार सुबह से राज्य विधानसभा की ओर बढ़ेंगे जहां सत्र चल रहा होगा, इसके बाद किसान विधानसभा का घेराव करेंगे.

फॉरेस्ट एक्ट लागू करने की मांग 

एक किसान नेता ने कहा कि ये मुद्दा सिर्फ किसानों का नहीं है बल्कि इसमें आदिवासियों का भी अधिकार निहित है. फॉरेस्ट एक्ट 2005 में आया लेकिन आदिवासियों को उनकी ज़मीन का अधिकार नहीं मिला, अभी भी लाखों किसानों की ज़मीने जंगलों के बीच में हैं, ये ज़मीनें उनके पूर्वजों की हैं लेकिन फिर भी उन ज़मीनों का मालिकाना हक उन्हें नहीं मिला है, कानून इनके साथ है तब भी वे परेशानी क्यों उठाएं?

दूसरी अहम मांगों में स्वामीनाथन कमिटी की सिफारिशें लागू करने की मांग, न्यूनतम समर्थन मूल्य को बेहतर करने की मांग और बूढ़े किसानों को पेंशन की मांगें शामिल हैं. जब तक सरकार किसानों से बातचीत की पहल नहीं करती तब तक महाराष्ट्र में गतिरोध बना रहेगा. फिलहाल सरकार की तरफ से किसान प्रदर्शनकारियों से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की गई हैं.

इस किसानों ने कर्ज माफी और बिजली बिल माफी के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की भी मांग की है. एआईकेएस सचिव राजू देसले ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, 'हम लोग राज्य सरकार से चाहते हैं कि वह सुपर हाइवे और बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट के नाम पर खेती की जमीन जबरन लेना बंद करे.' उन्होंने कहा कि 25,000 किसान मुंबई तक मार्च करने के लिए निकल चुके हैं.

देसले ने दावा किया कि बीजेपी सरकार की ओर से 34,000 करोड़ रुपए की सशर्त कर्ज माफी की घोषणा के बाद से अब तक 1,753 किसान खुदकुशी कर चुके हैं. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर 'किसान विरोधी' नीति अपनाने का आरोप लगाया.

एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धावले, स्थानीय विधायक जे पी गवित और अन्य नेता इस मार्च की अगुआई कर रहे हैं. किसानों की यह यात्रा 12 मार्च को समाप्त होगी. धावले ने कहा कि बीजेपी सरकार ने किसानों से किए गए वादे पूरा न करके उनके साथ धोखा किया है.

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