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ये मोदी-शाह की बीजेपी है, यहां मामलों को पेंडिंग नहीं रखा जाता

नई बीजेपी में नए तरह का ट्रेंड सामने आया है जहां विरोधियों को मौका नहीं दिया जाता

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 27, 2017 04:16 PM IST

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ये मोदी-शाह की बीजेपी है, यहां मामलों को पेंडिंग नहीं रखा जाता

बिहार में सियासत ने ऐसी करवट ली कि चंद घंटों में ही दोस्त दुश्मन हो गए और दुश्मन दोस्त बन गए. महागठबंधन की सरकार में असहज दिख रहे नीतीश कुमार ने लालू के साथ रिश्ते खत्म करने का ऐलान किया.

अब उनकी घर वापसी हो गई है. नीतीश-मोदी की जोड़ी चर्चा में है. बिहार में नीतीश-सुमो से ज्यादा चर्चा नीतीश-नमो की दोस्ती की हो रही है.

नमो विरोध के नाम पर बीजेपी से नाता तोड़ने वाले नीतीश कुमार की घर वापसी तो हो गई है. लेकिन, चंद घंटों में ही हुए इस सियासी उठापटक की पटकथा पहले से लिख दी गई थी.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ से बनाई गई रणनीति के तहत महागठबंधन के टूटने के बाद बिना किसी देरी के अगली सरकार बनाने की कोशिश तेज हो गई.

जेडीयू विधायक दल की बैठक के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया. लेकिन, शाम के वक्त हुए इस इस्तीफे के तुरंत बाद सियासी हलचल अचानक बढ़ गई.

बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक नीतीश के इस्तीफे के तुरंत बाद शाम 7 बजे बुलाई गई जिसमें नीतीश कुमार को समर्थन देने का फैसला कर लिया गया. फैसला इस बात का हुआ कि बीजेपी सरकार में भी शामिल होगी. लेकिन, फैसले को गोपनीय रखा गया.

Amit Shah in Odisha

संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद जे पी नड्डा ने केवल इतना कहा कि एक समिति बनाई गई है जो इस पूरे मामले पर आगे इस मुद्दे पर तमाम संभावनाओं पर विचार करेगी.

उधर, पटना में भी विधानमंडल दल की बैठक के बाद सुशील मोदी ने भी समिति बनाने की बात कहकर नीतीश के साथ जाने की संभावना को और प्रबल कर दिया.

यह अमित शाह की सियासी चाल का हिस्सा था जिसके तहत नीतीश कुमार को समर्थन देने को लेकर लेटर टाइप हो रहा था, तो दूसरी तरफ, बीजेपी को समर्थन देने के फैसले को गोपनीय रखा गया.

बिहार बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि 'नीतीश के साथ जाने का फैसला पहले ही ले लिया गया था. लेकिन, किसी तरह का कोई दूसरा सियासी ड्रामा नहीं हो सके, लिहाजा, इस फैसले को गोपनीय रखा गया.'

बीजेपी नेता का कहना था 'पार्टी आलाकमान नहीं चाहता था कि किसी भी सूरत में सरकार बनने में देरी हो, लिहाजा जल्द से जल्द बीजेपी विधायकों को नीतीश के घर पहुंचने को कहा गया.'

रात 9 बजे के करीब बीजेपी नेता सुशील मोदी ने नीतीश सरकार में शामिल होने का ऐलान कर दिया. फिर, अपने सरकारी आवास 1 अणे मार्ग में एनडीए संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद रात बारह बजे नीतीश कुमार सरकार बनाने का दावा पेश करने पहुंच गए.

बिहार के गवर्नर केसरीनाथ त्रिपाठी को रूटीन चेक अप के लिए हास्पिटल जाना था जिसके चलते नीतीश कुमार को राजभवन जाने में देरी हुई, वरना, आधी रात के पहले ही नीतीश कुमार राज भवन पहुंच जाते.

उधर, आरजेडी की तरफ से भी सबसे बडी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का दावा किया जाने लगा. आरजेडी ने राजभवन से समय मांगा तो सुबह 11 बजे मिलने का वक्त भी मिल गया था.

लेकिन, उसके पहले ही सुबह दस बजे शपथ ग्रहण की औपचारिकता पूरी कर संभावित कानूनी दांव-पेच से नीतीश और बीजेपी ने बच निकलने की पूरी कोशिश की.

आरजेडी की तरफ से दावा पेश करने से पहले ही नीतीश ने 131 विधायकों के समर्थन की सूची रात 12 बजे राज्यपाल को सौंप दी.

Nitish oath ceremony

हालाकि पहले शाम पांच बजे शपथ ग्रहण करने की चर्चा हो रही थी. लेकिन, किसी तरह की संभावित फूट और विरोध की संभावना को खत्म करने के लिए सुबह-सुबह ही शपथ दिला दी गई.

लालू यादव इस रणनीति से अब छटपटा रहे हैं. इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की बात कर रहे हैं. लेकिन, इसके पहले ही नीतीश सरकार शुक्रवार को ही विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर हर सवाल का जवाब देने की तैयारी कर रही है.

अमित शाह का मास्टर स्ट्रोक

बुधवार शाम इस्तीफा देने के बाद उसी रात सरकार बनाने का दावा पेश करना, फिर अगले दिन सुबह-सुबह शपथ ग्रहण करना और फिर उसके अगले दिन शुक्रवार को ही विश्वास मत हासिल करने की कोशिश करना बीजेपी की उस सियासत को दिखाता है जिसमें अपने सियासी विरोधी को प्रतिक्रिया देने का मौका तक नहीं मिलता.

इसके पहले भी अमित शाह ने अपने चक्रव्यूह और अपनी सियासी बिसात के जरिए उन राज्यों में भी कमल खिलाया जहां संभावना कम रही थी.

इसी साल गोवा विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भी कुछ इसी तरह के हालात बने थे जब 40 सदस्यीय विधानसभा में 17 सदस्यों वाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई थी. लेकिन, मोदी-शाह की रणनीति के सामने सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस मुंह ताकती रह गई.

चुनाव परिणाम आने के बाद आधी रात को ही गडकरी गोवा के लिए रवाना हो गए थे, जहां उन्होंने छोटे दलों के नेताओं से बात शुरू कर दी थी. मनोहर पर्रिकर भी गोवा पहुंचे. एमजीपी और गोवा फारवर्ड पार्टी के तीन-तीन विधायकों का समर्थन हासिल किया.

लेकिन, इस दौरान दो निर्दलीय विधायकों की भी जरूरत थी. दोनों निर्दलीय विधायक कुश्ती संघ से जुड़े हुए थे. बीजेपी के चाणक्य अमित शाह ने इन दोनों निर्दलीय विधायकों से बात करने के लिए बीजेपी सांसद और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह को लगा दिया.

रातों-रात ब्रजभूषण शरण सिंह गोवा पहुंचे. इन दोनों विधायकों को अपने पाले में कर लिया. बीजेपी की सरकार आज गोवा में अपना काम कर रही है.

कुछ इसी तरह के हालात मणिपुर में भी बने थे जब चुनाव परिणाम आने के बाद 60 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीट जीतने के बावजूद कांग्रेस हाथ मलती रह गई और 21 सीटों वाली बीजेपी मणिपुर में पहली बार बनाने में सफल हो गई.

n biren singh

मणिपुर के मुख्यमंत्री ए बिरेन सिंह

मौजूदा हालात में जब पूरा विपक्ष एकजुट होने की कोशिश कर रहा है तो विपक्ष के सबसे भरोसेमंद चेहरे को अपने पाले में लाकर मोदी-शाह ने विपक्षी चुनौती की हवा निकाल दी है.

मोदी-शाह के नेतृत्व में यह नए दौर की बीजेपी है जो नए तेवर के साथ जल्द फैसला करती है. जबतक सियासी दुश्मन उनकी चाल को समझ पाते हैं तबतक उनके नीचे से जमीन खिसक गई होती है. बिहार में भी कुछ ऐसा ही हुआ है.

 

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